पाली जिले के रानी उपखंड क्षेत्र के ऐतिहासिक नाडोल कस्बे से एक बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां के प्रसिद्ध गवई, जिसे मलोप तालाब भी कहा जाता है, उसमें पिछले कुछ दिनों से लगातार सैकड़ों मछलियों की मौत हो रही है। जलीय जीवों के इस तरह बड़ी संख्या में दम तोड़ने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और स्थानीय लोगों में गहरा रोष व्याप्त है।
तालाब का बदलता रंग और असहनीय दुर्गंध
गवई तालाब का पानी लगातार काला पड़ता जा रहा है और उससे उठने वाली तेज और असहनीय दुर्गंध ने आसपास की घनी आबादी के साथ-साथ वहां से गुजरने वाले राहगीरों का भी जीना मुहाल कर दिया है। इस भयानक बदबू के कारण स्थानीय निवासियों का घरों में रहना तक मुश्किल हो गया है। पशु-पक्षियों के जीवनदाता और इस पूरे इलाके के भूजल स्तर को बनाए रखने वाले मुख्य आधार स्तंभ की ऐसी बदहाली ने सबको झकझोर कर रख दिया है।
जहरीले रसायन की आशंका और ऑक्सीजन का संकट
स्थानीय निवासी मीठालाल डाबी सहित क्षेत्र के कई अन्य लोगों ने तालाब के पानी में किसी जहरीले रसायन या केमिकल के मिलने की गंभीर आशंका जताई है। इसके साथ ही, कुछ जानकारों का मानना है कि इस भीषण गर्मी और गंदगी के अत्यधिक जमाव के कारण पानी के भीतर घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर अचानक काफी नीचे गिर गया होगा, जो इस भारी तबाही की एक बड़ी वजह बन गया है। इसके अलावा, लंबे अरसे से इस तालाब के घाटों पर बेरोक-टोक चल रही गाड़ियों और कपड़ों की धुलाई ने इसके पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर दिया है। हालांकि, इन सब के बावजूद मछलियों की इस सामूहिक मौत के पीछे की असल और आधिकारिक वजह अभी तक सामने नहीं आ सकी है.
मवेशियों और भूजल का मुख्य सहारा
यह ऐतिहासिक गवई तालाब केवल एक जलाशय नहीं है, बल्कि यह नाडोल क्षेत्र के बेजुबान पशु-पक्षियों और मवेशियों की प्यास बुझाने का इकलौता साधन है। इसके साथ ही, यह जलस्रोत कस्बे के भूजल स्तर को रिचार्ज करने और आसपास के तमाम कुओं में पानी का स्तर बनाए रखने के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। ऐसे में इस जलस्रोत का इस तरह दूषित हो जाना सीधे तौर पर पर्यावरण और आम जनस्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की पुरजोर मांग
बढ़ते हुए इस पर्यावरणीय संकट को भांपते हुए गुस्से में आए ग्रामीणों ने उपखंड प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। लोगों ने मांग की है कि तालाब के पानी के नमूने लेकर उनकी फौरन वैज्ञानिक जांच कराई जाए। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि मछलियों की मौत के असली कारणों का पता लगाकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और तालाब को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए जल्द से जल्द पुख्ता कदम उठाए जाएं ताकि किसी बड़े खतरे को टाला जा सके।



















