मवेशियों को सेहतमंद रखने और दुग्ध उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए संतुलित खुराक देना बेहद जरूरी माना जाता है। पशुओं के भोजन में केवल चारा, दाना, कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन और विटामिन ही पर्याप्त नहीं होते हैं, बल्कि खनिज लवणों की भी इसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये मिनरल्स पशुओं की हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाने का काम करते हैं, उनकी मांसपेशियों को ठीक से काम करने में सहायता देते हैं और शरीर की कई अन्य आंतरिक प्रक्रियाओं को सुचारू रूप से चलाते हैं। यदि इन जरूरी तत्वों की कमी हो जाए तो पशुओं को कई तरह की बीमारियां घेर सकती हैं, इसलिए पशुपालकों को हमेशा इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पशुओं के आहार में ये खनिज प्रचुर मात्रा में शामिल हों।
कैल्शियम की भूमिका और इसके स्रोत
कैल्शियम पशुओं के शरीर में हड्डियों और दांतों को मजबूत ढांचा प्रदान करता है। इसके अलावा, यह खनिज मांसपेशियों के सुचारू संचालन और खून का थक्का जमाने की प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभाता है। गाय और भैंस जब बच्चा देती हैं, तो उस दौरान शरीर में कैल्शियम की भारी कमी होने पर दुग्ध ज्वर नामक गंभीर बीमारी होने का खतरा रहता है। खासतौर पर दूध देने वाले पशुओं को कैल्शियम की ज्यादा आवश्यकता होती है, क्योंकि जब वे दूध देती हैं तो उनके शरीर से कैल्शियम बाहर निकलता रहता है। पशुओं के लिए हरी पत्तेदार फसलें और दलहनी चारा कैल्शियम के बहुत अच्छे स्रोत माने जाते हैं।
फॉस्फोरस और पाइका की समस्या
फॉस्फोरस भी हड्डियों के निर्माण में और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में सहायता करता है। इसकी कमी होने पर पशु अजीब हरकतें करने लगते हैं जैसे कि वे मिट्टी या अन्य अनावश्यक चीजें खाने लगते हैं। पशुओं में होने वाली इस समस्या को पाइका कहा जाता है। इसके अलावा, फॉस्फोरस की कमी के कारण पशुओं में प्रजनन से जुड़ी परेशानियां और बांझपन जैसी गंभीर समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। अनाज और मछली से बनने वाले उत्पाद फॉस्फोरस के बेहतरीन स्रोत हैं। पशुओं के भोजन में हमेशा कैल्शियम और फॉस्फोरस का एक संतुलित अनुपात बनाए रखना बहुत जरूरी होता है ताकि उनका शरीर सही ढंग से विकास कर सके।
मैग्नीशियम, सोडियम और पोटेशियम के कार्य
मैग्नीशियम शरीर की हड्डियों, नसों और मांसपेशियों को सही तरीके से काम करने में मदद पहुंचाता है। इसके प्रमुख स्रोतों में गेहूं की भूसी, कपास की खली और अलसी की खली शामिल हैं। दूसरी ओर, सोडियम और क्लोराइड शरीर के भीतर पानी तथा अन्य लवणों का उचित संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। ये दोनों ही तत्व साधारण नमक में आसानी से मिल जाते हैं। इसके साथ ही, पोटेशियम मांसपेशियों के संकुचन और नसों तक जरूरी संदेश पहुंचाने के लिए बेहद आवश्यक माना गया है।
आयरन, तांबा, आयोडीन और सेलेनियम का महत्व
शरीर के भीतर आयरन हीमोग्लोबिन के निर्माण में मदद करता है, और यही हीमोग्लोबिन खून के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का कार्य करता है। शरीर में आयरन की कमी होने पर खून की कमी यानी एनीमिया हो सकता है। इसी तरह तांबे की कमी होने पर पशुओं की शारीरिक वृद्धि रुक सकती है या प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा हड्डियों में दिक्कतें, दस्त और प्रजनन संबंधी कई अन्य परेशानियां भी आ सकती हैं, जबकि बीज और उनसे बनने वाले उत्पाद तांबे के अच्छे स्रोत हैं। आयोडीन भी पशुओं के शरीर के लिए बेहद जरूरी है और इसकी कमी से गलगंड नामक बीमारी हो सकती है। इसके अलावा सेलेनियम शरीर की कोशिकाओं को किसी भी तरह के नुकसान से बचाने में सहायता करता है।
संतुलित आहार और मिनरल मिक्सचर की सलाह
पशुओं को हमेशा उनकी उम्र, वजन, मौजूदा दूध उत्पादन क्षमता और गर्भावस्था की स्थिति के अनुसार ही संतुलित आहार देना चाहिए। उनके शरीर में खनिज लवणों की किसी भी कमी को पूरा करने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह के बाद मिनरल मिक्सचर दिया जा सकता है। ऐसा करने से पशुओं का स्वास्थ्य लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है और साथ ही उनका दुग्ध उत्पादन भी बढ़ता है।




















