राजस्थान के जालोर जिले में स्थित भीनमाल इलाका नकदी सब्जियों की खेती के एक प्रमुख केंद्र के तौर पर उभर रहा है। यहां के खेतों में इस समय टमाटर की पैदावार बड़े पैमाने पर देखी जा रही है। इलाके की भौगोलिक स्थिति, उपजाऊ मिट्टी और अनुकूल मौसमी मिजाज टमाटर की फसल के लिए काफी मुफीद साबित हो रहे हैं। लहलहाते हरे पौधों के बीच गुच्छों में पकते लाल टमाटर न केवल खेतों की रंगत बदल रहे हैं, बल्कि इस समूचे क्षेत्र को सब्जी उत्पादन के नक्शे पर एक खास पहचान भी दिला चुके हैं।
परंपरागत फसलों से आगे निकलकर आधुनिक सब्जी उत्पादन की ओर रुख
भीनमाल और आसपास के ग्रामीण इलाकों में अब खेती की तस्वीर तेजी से बदल रही है। यहां के काश्तकार अब केवल पारंपरिक अनाज या तिलहन फसलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हुए व्यावसायिक सब्जियों की बुवाई की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। टमाटर की बागवानी को सफलता से अंजाम देने के लिए खेत की तैयारी से लेकर अंतिम चरण तक लगातार मेहनत की दरकार होती है। किसान पहले वैज्ञानिक तरीके से स्वस्थ पौध तैयार करते हैं, जिसके बाद मुख्य खेत में कतारबद्ध रोपाई की जाती है। इसके उपरांत समय पर सिंचाई का प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण के लिए निराई-गुड़ाई और कीटों से बचाव के लिए पौधों की नियमित निगरानी की जाती है, ताकि फलों का विकास समुचित आकार और गुणवत्ता के साथ हो सके।
पौध रोपण से लेकर तुड़ाई और सुरक्षित पैकिंग का चक्र
टमाटर की पैदावार में कई क्रमिक पड़ाव शामिल होते हैं। रोपाई के कुछ सप्ताह बाद खेतों में नए पौधों पर फूल आने शुरू होते हैं, जिसके बाद छोटे हरे फल आकार लेने लगते हैं। अनुकूल तापमान मिलने पर ये फल धीरे-धीरे पककर गहरे लाल रंग में तब्दील हो जाते हैं। जब फसल पूरी तरह परिपक्व हो जाती है, तब कुशल मजदूरों और काश्तकारों द्वारा फलों की तुड़ाई का काम शुरू किया जाता है। खेतों में ही गुणवत्ता और आकार के आधार पर टमाटरों की छंटाई की जाती है, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित परिवहन के लिए मजबूत प्लास्टिक कैरेटों और पारंपरिक टोकरियों में करीने से भरा जाता है ताकि वे लंबी दूरी के सफर में खराब न हों।
राजस्थान से गुजरात तक अंतरराज्यीय मंडियों में पहुंच
भीनमाल की जमीन पर पैदा होने वाला यह टमाटर सिर्फ स्थानीय खपत या नजदीकी हाट-बाजारों तक ही सीमित नहीं रहता। खेत से निकलने के बाद यह राजस्थान के विभिन्न जिलों की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में भेजा जाता है। इसके अलावा, पड़ोसी राज्य गुजरात की बड़ी थोक मंडियों में भी भीनमाल के टमाटर की भारी मांग रहती है, जहां ट्रकों के जरिए रोज माल रवाना किया जाता है। फसल की तुड़ाई के तुरंत बाद सुचारू परिवहन और सटीक समय पर मंडी पहुंचना किसानों के मुनाफे के लिए बेहद जरूरी होता है, क्योंकि यह एक जल्दी खराब होने वाली जिंस है। यही वजह है कि मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराज्यीय बाजार से जुड़ाव भीनमाल के किसानों के लिए इस फसल को आर्थिक रूप से बेहद अहम बना देता है।



















