झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी इलाके में स्थित सुप्रसिद्ध लोहार्गल धाम से एक बेहद दुखद और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पहाड़ी पर बने बरखंडी बाबा मंदिर से पिछले दो दिनों से गायब चल रहे 80 वर्षीय संत सूरजदास जी महाराज का शव दोपहर के समय पहाड़ी की तलहटी में घनी झाड़ियों के बीच फंसा हुआ पाया गया। संत की तलाश में स्थानीय ग्रामीण और पुलिस प्रशासन पिछले 48 घंटों से जुटे हुए थे, लेकिन शव मिलने की खबर आते ही पूरे क्षेत्र में शोक और स्तब्धता की लहर दौड़ गई।
दो दिनों से जारी सघन तलाशी अभियान के बाद दिखा शव
बागोरिया की ढाणी के सरपंच राजेंद्र सैनी के नेतृत्व में स्थानीय निवासियों ने पहाड़ी और आस-पास के बीहड़ जंगलों में लगातार खोजबीन अभियान चलाया। काफी प्रयासों और मशक्कत के बाद ग्रामीणों की नजर मंदिर से काफी नीचे एक अत्यंत दुर्गम और पथरीली खाई में झाड़ियों के बीच फंसे शव पर पड़ी। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए। यह इलाका अत्यधिक ऊंचाई और बेहद पथरीले रास्तों वाला है, जहां सामान्य रूप से आवाजाही करना भी एक बड़ी चुनौती साबित होता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुंचने का आग्रह किया।
26 सितंबर की शाम से गायब थे संत, टूटी मिली थी तिजोरी
घटनाक्रम के ब्योरे के मुताबिक, संत सूरजदास जी महाराज 26 सितंबर 2026 की शाम के समय से ही बरखंडी बाबा मंदिर से लापता हो गए थे। अगली सुबह यानी 27 सितंबर को जब श्रद्धालु और यात्री दर्शन करने पहुंचे, तो संत को वहां न पाकर उन्होंने उनके शिष्य शंकर दयाल गुर्जर को फोन के माध्यम से सूचित किया। शिष्य ने जब मंदिर का मुआयना किया, तो परिसर के हालात देखकर हर कोई सन्न रह गया। मंदिर के भीतर रखी तिजोरी टूटी हुई थी और उसमें जमा नकदी गायब मिली। इसके अतिरिक्त स्नानघर का दरवाजा भी टूटा हुआ पाया गया और पूरे मंदिर परिसर में तोड़फोड़ के स्पष्ट संकेत दिखाई दे रहे थे। 26 सितंबर की रात मंदिर की बत्तियां न जलने के कारण शिष्य को पहले ही अनहोनी की आशंका हो गई थी, जिसके बाद गोठड़ा थाने में बाकायदा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई थी।
ग्रामीणों को हत्या और लूट की आशंका, पुलिस जांच में जुटी
मंदिर की तिजोरी टूटने, सामान बिखरा होने और संत का शव गहरी खाई में झाड़ियों के बीच मिलने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। स्थानीय लोगों को गहरा संदेह है कि अज्ञात उपद्रवियों या लुटेरों ने 26 सितंबर की रात लूटपाट के इरादे से धावा बोला, संत की हत्या की और साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उनके शव को पहाड़ी से नीचे गहरी खाई में फेंक दिया। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लूट अथवा हत्या के दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की जा सकती है। मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा गहन वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के उपरांत ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करवा ली है और साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं।
32 वर्षों से मंदिर में साधनारत थे 80 वर्षीय संत
दर्ज आधिकारिक विवरण के अनुसार, करीब 80 वर्षीय संत सूरजदास जी महाराज के पिता का नाम भूराराम था। वे मूल रूप से जयपुर जिले के गोविंदगढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिगोद कला गांव के निवासी थे। संत पिछले लगभग 32 वर्षों से लोहार्गल धाम के इस एकांत और ऊंचे बरखंडी बाबा मंदिर में रहकर नियमित पूजा-अर्चना और सेवा कार्य कर रहे थे। पहाड़ी पर अत्यंत ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां आम दिनों में लोगों की आवाजाही काफी सीमित रहती है। अब इस रहस्यमयी घटना के बाद जांच एजेंसियों के सामने कई अनुत्तरित सवाल खड़े हैं कि संत किन परिस्थितियों में बाहर आए, मंदिर की तिजोरी किसने तोड़ी और शव इतनी गहरी खाई तक कैसे पहुंचा।

















