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जालोर के सरकारी स्कूल की बदली तस्वीर, बिना सरकारी मदद के ग्रामीणों ने जुटाए 4.5 करोड़ रुपयेराजस्थान
16 अक्तू॰ 2026, 1:28 pm (59 मिनट पहले)· 0

जालोर के सरकारी स्कूल की बदली तस्वीर, बिना सरकारी मदद के ग्रामीणों ने जुटाए 4.5 करोड़ रुपये

राजस्थान के जालोर जिले के नरसाणा गांव में ग्रामीणों और पूर्व छात्रों के सहयोग से सरकारी स्कूल का कायापलट हो गया है। बिना किसी सरकारी सहायता के साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से आधुनिक सुविधाओं से लैस दो मंजिला भवन तैयार किया गया है।

राजस्थान के जालोर जिले के नरसाणा गांव में एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली है, जहां सरकारी मदद की बाट जोहने के बजाय ग्रामीणों ने खुद ही अपने गांव के स्कूल की तस्वीर बदल दी है। एक समय था जब इस सरकारी विद्यालय में 450 से ज्यादा बच्चों के बैठने के लिए पर्याप्त जगह तक नहीं हुआ करती थी और छात्रों को खुले आसमान के नीचे या बरामदों में पढ़ाई करनी पड़ती थी। आज उसी स्कूल की जगह एक भव्य और आधुनिक दो मंजिला भवन खड़ा हो गया है। इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में एक भी रुपया सरकारी खजाने से नहीं लिया गया है, बल्कि इसे पूरी तरह से जनसहयोग के जरिए संभव बनाया गया है।

शुरुआत और जनसहयोग की मुहिम

इस बड़े बदलाव की नींव एक मजबूत संकल्प और सामूहिक प्रयासों से रखी गई। इस पूरी पहल की शुरुआत पंचायतीराज सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी, पूर्व छात्र और सरपंच प्रतिनिधि जसवंत सिंह ने की थी। उन्होंने स्कूल की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए गांव के लोगों और पुराने विद्यार्थियों से आगे आने की अपील की। उनकी इस अपील का असर यह हुआ कि पूरा गांव एकजुट हो गया और सभी ने मिलकर अपने पुराने विद्यालय का कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया। गांव में इसके लिए एक व्यापक मुहिम चलाई गई, जिसके तहत हर घर से एक ईंट जुटाने का संदेश दिया गया।

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प्रवासी व्यवसायियों और ग्रामीणों का योगदान

इस मुहिम में केवल नरसाणा गांव के स्थानीय लोग ही शामिल नहीं हुए, बल्कि देश के दूसरे राज्यों में कारोबार कर रहे गांव के प्रवासी व्यवसायी भी पूरे दिल से जुड़े। लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार खुलकर दान दिया। इस अभियान में किसी ने 51 हजार रुपये का योगदान दिया, तो किसी ने सात लाख रुपये की सहायता राशि पहुंचाई। इसके अलावा, कई बड़े भामाशाहों और दानदाताओं ने तो एक कदम आगे बढ़कर 21 लाख रुपये तक की भारी-भरकम राशि स्कूल के निर्माण के लिए समर्पित कर दी। लोगों की इस उदारता और करीब साढ़े चार साल की कड़ी मेहनत के रंग लाई, जिससे कुल मिलाकर लगभग 4.50 करोड़ रुपये की राशि जुटाई जा सकी।

आधुनिक सुविधाओं से लैस नया स्कूल भवन

जनता के पैसे से बना यह नया दो मंजिला विद्यालय भवन किसी निजी और महंगे संस्थान से कम नहीं है। इसमें विद्यार्थियों की शिक्षा, खेलकूद और अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए तमाम अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। इस भवन में कुल 21 शानदार कमरे और दो बड़े हॉल बनाए गए हैं, जिससे बच्चों को बैठने की तंगी से हमेशा के लिए निजात मिल गई है। इसके अलावा, विद्यार्थियों के शारीरिक विकास को बढ़ावा देने के लिए एक अंडरग्राउंड इनडोर स्टेडियम भी तैयार किया गया है। विज्ञान के छात्रों के प्रयोगों के लिए एक आधुनिक साइंस लैब भी बनाई गई है, ताकि वे बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें।

जल संरक्षण और भविष्य की तैयारी

पर्यावरण और जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इस स्कूल परिसर में विशेष इंतजाम किए गए हैं। पानी की निरंतर आवश्यकता को पूरा करने और भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए 10 हजार लीटर की क्षमता वाला एक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी तैयार किया गया है। इसकी मदद से बारिश के हर एक बूंद पानी को सहेजा जा सकेगा, जिससे भविष्य में पानी की कोई कमी नहीं होगी। इस तरह नरसाणा के लोगों ने यह साबित कर दिया है कि यदि समाज के सभी वर्ग, ग्रामीण, पूर्व छात्र और व्यवसायी मिलकर किसी नेक काम के लिए हाथ मिलाएं, तो बड़े से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

सवाल-जवाब

नरसाणा गांव का स्कूल किस जिले में स्थित है?
नरसाणा गांव राजस्थान के जालोर जिले में स्थित है।
इस स्कूल के निर्माण में कुल कितना खर्च आया है?
इस विद्यालय भवन के निर्माण में करीब 4.50 करोड़ रुपये की लागत आई है।
इस मुहिम की शुरुआत किसने की थी?
इस पहल की शुरुआत पंचायतीराज सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी और सरपंच प्रतिनिधि जसवंत सिंह ने की थी।
नए स्कूल भवन में क्या-क्या प्रमुख सुविधाएं दी गई हैं?
नए भवन में 21 कमरे, दो बड़े हॉल, एक अंडरग्राउंड इनडोर स्टेडियम, साइंस लैब और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया है।
इस निर्माण के लिए पैसे कहां से जुटाए गए?
पैसे गांव के ग्रामीणों, पूर्व विद्यार्थियों और दूसरे राज्यों में कारोबार कर रहे प्रवासी व्यवसायियों के जनसहयोग से जुटाए गए।
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