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मऊ में मकानों और स्कूल के ऊपर से गुजरती हाई टेंशन लाइनें बनीं जानलेवा खतरा, ग्रामीणों में गहराया खौफभारत
12 अक्तू॰ 2026, 2:26 pm (1 घंटे पहले)· 0

मऊ में मकानों और स्कूल के ऊपर से गुजरती हाई टेंशन लाइनें बनीं जानलेवा खतरा, ग्रामीणों में गहराया खौफ

मऊ जिले में रिहायशी छतों, खेतों और एक विद्यालय के ठीक ऊपर से लटकती हाई टेंशन और एलटी बिजली की तारों से हादसों का डर बना हुआ है। हाल ही में करंट से तीन युवकों की मौत के बाद स्थानीय लोग तारों को तुरंत दुरुस्त और स्थानांतरित करने की मांग कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में रिहायशी बस्तियों, कृषि भूमियों और शैक्षणिक परिसरों के बेहद करीब से गुजरने वाले बिजली के हाई टेंशन तार स्थानीय निवासियों के लिए एक गंभीर और लगातार बना रहने वाला खतरा साबित हो रहे हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि जनपद के विभिन्न हिस्सों में बिजली के इन भारी तारों की चपेट में आकर नागरिकों की जान जाने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, मगर संबंधित प्रशासनिक तंत्र इस पर अब तक कोई ठोस व स्थायी समाधान नहीं निकाल सका है। कई मकानों की छतों से महज कुछ फीट की दूरी पर लटकते ये तार रोजमर्रा की जिंदगी को भारी जोखिम में डाल रहे हैं, जिसके कारण लोग अपने ही घरों की छतों पर जाने से कतराने लगे हैं।

ग्रामीण इलाकों और नगर क्षेत्र में छतों के पास लटकते तार

पूर्व विधानसभा प्रत्याशी डॉक्टर धर्म सिंह गौतम के अनुसार घरों के बिल्कुल ऊपर से जाने वाले हाई टेंशन तारों के कारण आम नागरिकों को हर समय अपनी सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। उनका कहना है कि केवल मुख्य हाई टेंशन लाइन ही नहीं, बल्कि एलटी यानी लो टेंशन बिजली की लाइनें भी ग्रामीण इलाकों के साथ साथ नगर क्षेत्र में बने मकानों की छतों से नाममात्र की दूरी पर गुजर रही हैं। छतों और इन नंगे तारों के बीच बेहद कम अंतर होने के कारण हमेशा यह आशंका बनी रहती है कि कोई मामूली सी असावधानी भी किसी बड़े बिजली हादसे का सबब बन सकती है। इस तरह के तारों के संपर्क में आने से पूर्व में भी कई नागरिकों की असमय जान जा चुकी है।

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स्थानीय स्तर पर इसे बिजली विभाग की कार्यप्रणाली की बड़ी चूक माना जा रहा है। अगर बिजली विभाग समय रहते सक्रिय होकर केबलों को सही ढंग से व्यवस्थित कर दे या भूमिगत व कवर्ड केबलिंग का सुरक्षित प्रबंध कर दे, तो इस तरह के जानलेवा हादसों को पूरी तरह रोका जा सकता है। यह संकट केवल रिहायशी मकानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि किसानों के खेतों के ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार भी जमीन से बहुत कम ऊंचाई पर झूलते रहते हैं। जब किसान खेतों में जुताई, बुआई या अन्य कृषि कार्य करते हैं, तो उन्हें हर कदम पर करंट लगने का खतरा बना रहता है, जिससे उनकी खेती का काम भी सीधे तौर पर प्रभावित हो रहा है। नागरिकों का कहना है कि विभाग को प्राथमिकता के आधार पर सभी जर्जर व लटकते तारों की मरम्मत कर उन्हें सुनियोजित करना चाहिए।

हालिया हादसे के बाद दहशत, मंत्री के गृह जनपद में दावों पर सवाल

पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रत्याशी राजेंद्र यादव का कहना है कि बिजली तंत्र की अनदेखी के चलते जनपद में आए दिन दुर्घटनाएं घटित होती रहती हैं। हाल ही में मऊ में एक मकान की छत पर हाई टेंशन तार के संपर्क में आ जाने से तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इस दुखद घटना के बाद से पूरे इलाके में गहरा डर फैल गया है, खासकर उन मोहल्लों और बस्तियों में जहां मकानों के ऊपर से सीधे हाई टेंशन लाइन गुजर रही है। विशेषकर बारिश के मौसम में गीली छतों और नमी भरे वातावरण के चलते यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे हर परिवार किसी अप्रिय घटना की आशंका में जीता है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि विडंबना यह है कि इसी जनपद से ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री आते हैं, फिर भी बुनियादी सुरक्षा की यह हालत बनी हुई है। कागजी प्रक्रियाओं में तो अक्सर तारों को बदलने या दुरुस्त करने की बातें दर्ज हो जाती हैं, लेकिन जमीनी धरातल पर तारों की वास्तविक स्थिति जस की तस रहने से खतरा कम होने के बजाय और बढ़ जाता है। नागरिकों ने मांग उठाई है कि विभाग उन सभी आबादी वाले क्षेत्रों को बाकायदा चिह्नित करे जहां से बिजली की लाइनें घरों के बिल्कुल करीब से निकल रही हैं, और उन्हें वहां से हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया जाए, ताकि लोग बिना किसी डर के अपने घरों की छतों का इस्तेमाल कर सकें।

गालिबपुर के प्राथमिक विद्यालय में भी मंडराता खतरा

यह समस्या केवल घरों और खेतों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नौनिहालों के शिक्षण संस्थानों तक पहुंच चुकी है। प्राथमिक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गालिबपुर के परिसर के ऊपर से भी हाई टेंशन बिजली की लाइन गुजर रही है। विद्यालय के प्रधानाचार्य अरविंद के अनुसार स्कूल भवन के ठीक ऊपर से निकलती यह लाइन शिक्षकों और छात्र छात्राओं के मन में लगातार डर पैदा करती है। विद्यालय प्रबंधन द्वारा तारों को स्थानांतरित करने अथवा सुरक्षित करने के लिए संबंधित विभाग को बार बार पत्र भेजकर गुहार लगाई गई, लेकिन इसके बावजूद आज तक इन तारों को वहां से हटाने का कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

बरसात के दिनों में यह खतरा सबसे ज्यादा विकराल रूप ले लेता है। स्कूल आने जाने वाले सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को इन्हीं तारों के ठीक नीचे से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में हर समय यह डर बना रहता है कि कहीं अचानक कोई केबल टूटकर नीचे न गिर जाए या करंट का फैलाव न हो जाए। विद्यालय प्रशासन और अभिभावकों ने पुरजोर मांग की है कि शिक्षा के माहौल में कोई बाधा न पहुंचे और बच्चों की जान सुरक्षित रहे, इसके लिए बिजली लाइन का शीघ्र निस्तारण किया जाए।

विभाग की तरफ से नोटिस की बात

इस पूरे मामले पर बिजली विभाग के अधिकारी आशीष का कहना है कि जिन लोगों ने बिजली विभाग द्वारा पहले से बिछाई जा चुकी तारों की लाइन के नीचे नए सिरे से अपने मकान बना लिए हैं, उन्हें विभाग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी नए मकान या रिहायशी निर्माण के ऊपर से बिजली विभाग की तरफ से कोई नई बिजली की लाइन नहीं बिछाई जाएगी।

सवाल-जवाब

मऊ जिले में हाई टेंशन तारों को लेकर ग्रामीण क्यों परेशान हैं?
ग्रामीण क्षेत्रों और नगर में घरों की छतों, खेतों और स्कूल के बेहद करीब से हाई टेंशन और एलटी तार गुजर रहे हैं, जिससे करंट लगने और हादसों का डर बना हुआ है।
मऊ में हाल ही में बिजली के तारों से क्या बड़ा हादसा हुआ था?
हाल ही में मऊ में एक छत पर हाई टेंशन तार की चपेट में आने से तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
गालिबपुर के स्कूल में बिजली के तारों की क्या स्थिति है?
प्राथमिक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गालिबपुर के ऊपर से हाई टेंशन लाइन गुजर रही है, जिससे शिक्षकों और छात्रों में हर समय केबल टूटने या हादसे का भय रहता है।
क्या स्कूल प्रशासन ने इस खतरे के खिलाफ कोई शिकायत की थी?
प्रधानाचार्य अरविंद के अनुसार संबंधित बिजली विभाग को कई बार पत्र लिखकर तार हटाने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बिजली विभाग के अधिकारी आशीष ने इस समस्या पर क्या रुख अपनाया है?
बिजली अधिकारी आशीष ने कहा कि पहले से बिछाई गई लाइनों के नीचे नए मकान बनाने वालों को नोटिस जारी किया जाएगा और आगे से किसी घर के ऊपर नई लाइन नहीं बिछाई जाएगी।
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टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·अभी

तीन-तीन जवानों की जान जाने के बाद भी बिजली विभाग सोया हुआ है क्या? मकानों की छतों और खेतों के ऊपर से गुजर रहे इन जानलेवा तारों को हटाने के लिए प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है क्या?

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 मिनट पहले

छतों से महज़ कुछ फीट की दूरी पर लटकते तार जानलेवा हैं, बच्चे कैसे खेलेंगे?

Priya Sharma@priya-sharma·17 मिनट पहले

अर्जुन, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछले साल जब मैं गाँव गई थी, तो बच्चों को छतों पर खेलते देख मेरी भी साँसें अटक गई थीं, तार सचमुच बहुत पास हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 मिनट पहले

तीन युवकों की मौत के बाद भी महकमा खामोश कैसे बैठा है, समझ नहीं आता। शायद विभाग किसी और बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है।

Ravikash Gupta@ravikash·38 मिनट पहले

करण भाई, महकमा खामोश नहीं बैठा होगा, शायद फाइलें ऊपर नीचे होने में वक्त लग रहा हो। वैसे तीन युवकों की मौत के बाद विभाग पर इतनी सीधी लापरवाही का आरोप लगाना थोड़ा जल्दबाजी हो सकता है, हो सकता है तकनीकी अड़चनें रही हों।

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