राजस्थान के जालौर जिले के भीनमाल शहर में स्थित नाड़ी वाले गणपति मंदिर की ख्याति अपनी प्राचीनता, चमत्कारी इतिहास और अनूठी मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक फैली हुई है। खजूरिया नाले के निकट बने इस मंदिर में गणेश महोत्सव के दौरान खास धार्मिक आयोजनों की धूम रहती है, जिसमें हिस्सा लेने के लिए भारी तादाद में भक्त पहुंचते हैं। इसके अलावा, सप्ताह के हर बुधवार को इस पावन परिसर में किसी मेले जैसा जीवंत और भव्य दृश्य देखने को मिलता है।
पौराणिक कथा और राजा क्षेम की तपस्या
मंदिर से जुड़ी प्राचीन लोक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में भीनमाल को श्रीमाल नाम से पुकारा जाता था। उस दौरान राजा क्षेम ने इसी पवित्र भूमि पर भगवान विनायक को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की थी। ऐसी आस्था है कि उनकी साधना से संतुष्ट होकर गणेश जी इसी जगह प्रकट हुए और राजा को एक शाप से पूरी तरह मुक्ति दिलाई। इस प्रसंग के बाद ही यहां भगवान गणपति की स्थापना की गई और नियमित रूप से पूजा-अर्चना का सिलसिला शुरू हुआ जो आज भी जारी है।
मूर्ति में दिखाई देती हैं मानव शरीर की नसें
सिद्धिविनायक मंदिर विकास समिति के सचिव अमृतलाल डी. प्रजापत के अनुसार, यह स्थल अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी माना जाता है। जब उत्सव या विशेष अवसरों पर भगवान गणेश का श्रृंगार किया जाता है, तो उनकी प्रतिमा पर मानव शरीर की नसों जैसी बनावट साफ तौर पर नजर आती है। इस मंदिर की एक खास विशेषता यह भी है कि यहां सरकारी अधिकारी और विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपनी पदोन्नति की कामना लेकर आते हैं। केवल भीनमाल ही नहीं बल्कि अन्य दूर-दराज के क्षेत्रों से भी अफसर अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि मन्नत पूरी होने के बाद कई अधिकारी उच्च पदों पर आसीन हुए हैं। पूर्व काल में भीनमाल के एसडीएम भी यहां आए थे और बाद में उनका प्रमोशन हुआ था।
चमत्कार और कारीगर के सुरक्षित बचने की घटना
मंदिर समिति के सचिव ने आस्था को बल देने वाली एक और रोमांचक घटना का भी जिक्र किया। उनके बताए अनुसार, एक बार मंदिर में रंग-रोगन और मरम्मत का काम चल रहा था, तभी एक कारीगर ऊंचे गुंबद की छत से अचानक नीचे आ गिरा। हैरान करने वाली बात यह रही कि उस कारीगर को खरोंच तक नहीं आई और वह सुरक्षित बच गया। मंदिर से जुड़े ऐसे कई प्रसंग और अनुभव श्रद्धालुओं के मन में इस स्थान के प्रति अटूट विश्वास और चमत्कारी मान्यताओं को और अधिक मजबूत बनाते हैं।
वर्तमान मंदिर का निर्माण और जीर्णोद्धार कार्य
मंदिर के इतिहास के बारे में सचिव बताते हैं कि प्राचीन मंदिर के समय के साथ ध्वस्त हो जाने के बाद लंबे अरसे तक यहां केवल पुराने अवशेष ही बचे रहे थे। इसके बाद आज से करीब 50 वर्ष पूर्व वर्तमान भव्य मंदिर का निर्माण करवाया गया। समय के साथ मंदिर की व्यवस्थाओं को व्यवस्थित करने और इसके सौंदर्यीकरण के लिए वर्ष 2007 में सिद्धिविनायक मंदिर विकास समिति का औपचारिक गठन किया गया। इस समिति के प्रयासों से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया, सुरक्षा के लिए चारदीवारी बनाई गई, पास की नाड़ी का सौंदर्यीकरण किया गया और पूरे परिसर में बड़े पैमाने पर पौधरोपण जैसे सकारात्मक कार्य संपन्न कराए गए।
गणेश महोत्सव और साप्ताहिक आयोजनों की रौनक
पवित्र गणेश महोत्सव के दौरान इस मंदिर को रंग-बिरंगी और आकर्षक रोशनी से बेहद खूबसूरती से सजाया जाता है, और कई प्रकार के विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। इसके अतिरिक्त, हर बुधवार को भक्तों का तांता लगा रहता है और दूर-दराज से लोग दर्शन लाभ पाने आते हैं। समृद्ध इतिहास, अनूठी मान्यताओं और गहरी आस्था का यह केंद्र आज भी भीनमाल के प्रमुख और विशिष्ट धार्मिक स्थलों में अपनी एक अलग और अनूठी पहचान संजोए हुए है।














