विश्व प्रसिद्ध खाटूश्याम जी मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना सामने आई है। श्री श्याम मंदिर कमेटी ने मंदिर में होने वाली संध्या आरती के समय में बदलाव करने का निर्णय लिया है। इस बदलाव के संबंध में मंदिर प्रशासन द्वारा एक आधिकारिक सूचना भी जारी कर दी गई है। यदि आप भी बाबा श्याम की इस पावन संध्या आरती का हिस्सा बनना चाहते हैं और उनके दर्शन लाभ लेना चाहते हैं, तो इस नई समय-सारणी को ध्यान से नोट कर लें। मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान ने इस विषय में जानकारी देते हुए स्पष्ट किया है कि मंदिर की प्राचीन परंपराओं के अनुसार समय-समय पर आरती के समय में बदलाव किया जाता है।
संध्या आरती के नए समय की पूरी जानकारी
श्री श्याम मंदिर कमेटी की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, बाबा श्याम की संध्या आरती के समय को अब पंद्रह मिनट पहले कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत, अब संध्या आरती शाम को ठीक 7:00 बजे आयोजित की जाएगी। इससे पहले इस आरती का समय शाम को 7:15 बजे निर्धारित था। मंदिर कमेटी ने बताया कि यह नया नियम भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी के अवसर पर 15 सितंबर से लागू कर दिया गया है। संध्या आरती में सामान्यतः भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, इसलिए मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से विशेष रूप से अपील की है कि वे इस नए समय के अनुसार ही अपने आगमन की योजना बनाएं। इससे मंदिर परिसर में भीड़ का सही प्रबंधन हो सकेगा और भक्तों को दर्शन करने में किसी प्रकार की असुविधा या परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
मंदिर की पांच दैनिक आरतियों का महत्व
खाटूश्याम जी मंदिर में प्रतिदिन नियमित रूप से पांच मुख्य आरतियां की जाती हैं। हिंदू धर्म में इन सभी पांच आरतियों का अपना-अपना एक विशेष और गहरा धार्मिक महत्व माना गया है। इन पांच आरतियों में से दो आरतियां बेहद खास मानी जाती हैं, क्योंकि इस दौरान बाबा श्याम का विशेष रूप से अलौकिक श्रृंगार किया जाता है। इन आरतियों के समय भक्तों को बाबा श्याम के अलग-अलग रूपों के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।
वर्तमान में, गर्मी के मौसम के अनुसार मंदिर के कपाट खुलते ही सबसे पहले सुबह 4:30 बजे मंगला आरती की जाती है। इसके पश्चात, दिन की दूसरी प्रमुख आरती सुबह 7:15 बजे होती है जिसे श्रृंगार आरती कहा जाता है। इस श्रृंगार आरती के दौरान बाबा श्याम का विभिन्न प्रकार के रंग-बिरंगे सुगंधित फूलों और देव वस्त्रों से अत्यंत सुंदर श्रृंगार किया जाता है। तीसरी आरती दोपहर के समय 12:30 बजे होती है जिसे भोग आरती कहा जाता है, जिसमें बाबा को विशेष पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसके बाद चौथी आरती संध्या आरती होती है, जिसके समय में ही बदलाव किया गया है और अब यह शाम 7:00 बजे होगी। दिन की पांचवीं और अंतिम आरती शयन आरती होती है जो रात को 10:00 बजे की जाती है। इस आरती के पूरा होने के बाद आम दिनों में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
बर्बरीक से बाबा श्याम बनने की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा श्याम को 'हारे का सहारा' कहा जाता है और उन्हें साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का अवतार माना गया है। महाभारत काल की एक अत्यंत प्रसिद्ध कथा के अनुसार, भीम के पौत्र बर्बरीक महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से शामिल होने के लिए रणभूमि की तरफ प्रस्थान कर रहे थे। उसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने एक गरीब ब्राह्मण का भेष धारण करके बर्बरीक का मार्ग रोका और उनसे उनके शीश का दान मांग लिया।
वीर बर्बरीक ने बिना किसी संकोच या हिचकिचाहट के अपना शीश काटकर भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया। बर्बरीक के इस अभूतपूर्व और महान बलिदान से अत्यंत प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें एक दिव्य वरदान दिया। श्रीकृष्ण ने कहा कि कलियुग में संसार उन्हें 'श्याम' के नाम से पूजेगा। इसके साथ ही वे जीवन में हर हारे हुए व्यक्ति का सहारा बनेंगे और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी करेंगे। इसी वरदान के बाद से बाबा श्याम को भक्तों के बीच 'हारे का सहारा' के रूप में पूजा जाता है और उनके दरबार में हर साल लाखों श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर आते हैं।
















