बीकानेर जिले के ग्रामीण अंचल में बुधवार को मौसम का मिजाज अप्रत्याशित रूप से बदल गया, जिससे खाजूवाला और आसपास के इलाकों में भारी अव्यवस्था फैल गई। तेज गति से चली अंधड़ भरी हवाओं और मूसलाधार बारिश ने स्थानीय निवासियों को संभलने का तनिक भी अवसर नहीं दिया। तूफानी झोंकों की वजह से कई मुख्य मार्गों और रिहायशी क्षेत्रों में विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़ गए अथवा उनकी भारी टहनियां टूटकर नीचे आ गिरीं। इन घटनाओं के चलते अलग-अलग स्थानों पर करीब आधा दर्जन लोग घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती कराया गया है।
ग्रामीण बुनियादी ढांचे को भी इस अचानक आई प्राकृतिक आपदा से गहरा आघात पहुंचा है। तेज हवाओं के दबाव से कई स्थानों पर बिजली के खंभे धराशायी हो गए और विद्युत ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हो गए। इसके अलावा खुले स्थानों और घरों पर स्थापित सोलर प्लेटें भी हवा के प्रचंड वेग से टूटकर बिखर गईं। इसके चलते क्षेत्र के कई गांवों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है और लोगों को पेयजल एवं अन्य दैनिक कार्यों के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
चलते वाहन पर गिरा भारी पेड़, अस्पताल में भर्ती कराए गए घायल
तूफान के दौरान सबसे गंभीर दुर्घटना खाजूवाला क्षेत्र में 15 वाली पुली और 22KJD के समीप घटित हुई। यहां मार्ग से गुजर रहे एक ट्रैक्टर पर अचानक सड़क किनारे खड़ा एक भारी पेड़ टूटकर गिर पड़ा। पेड़ सीधे ट्रैक्टर के ऊपर गिरने से उस पर सवार दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और आसपास मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए राहत कार्य शुरू किया।
हादसे की सूचना मिलते ही गुल्लूवाली निवासी महेंद्र खालिया ने सक्रियता दिखाई और दोनों घायलों को तुरंत अपने वाहन से खाजूवाला स्थित उप जिला अस्पताल (SDH) पहुंचाया। अस्पताल के चिकित्साकर्मियों ने घायलों को प्राथमिक उपचार देकर उनकी स्थिति को स्थिर किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हवाओं की गति इतनी तेज थी कि वाहन चालकों को सुरक्षित स्थान पर रुकने तक का मौका नहीं मिल सका, जिससे यह हादसा हुआ।
जगह-जगह धराशायी हुए पेड़ और क्षतिग्रस्त हुआ विद्युत ढांचा
अंधड़ का विनाशकारी प्रभाव केवल एक मार्ग या गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खाजूवाला के विस्तृत ग्रामीण भूभाग में जगह-जगह तबाही के निशान दिखाई दिए। विभिन्न ढाणियों और संपर्क सड़कों पर पेड़ उखड़ने से यातायात बाधित हो गया। इन छिटपुट घटनाओं में भी कई राहगीर और स्थानीय नागरिक चोटिल हुए, जिससे घायलों की कुल संख्या करीब आधा दर्जन तक पहुंच गई।
बिजली तंत्र को पहुंचे व्यापक नुकसान के चलते संबंधित विभाग के सामने आपूर्ति बहाल करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कई स्थानों पर हाई-टेंशन और लो-टेंशन लाइनों के खंभे झुक गए या टूट गए, जबकि ट्रांसफार्मर गिरने से शॉर्ट सर्किट और बिजली गुल होने की स्थिति उत्पन्न हो गई। सोलर प्लेटों के टूटने से सौर ऊर्जा पर निर्भर कृषि पंपों और घरेलू संयंत्रों को भी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की टीमें नुकसान का सटीक ब्योरा तैयार करने में जुटी हुई हैं ताकि आवश्यक मरम्मत कार्य तेज गति से शुरू किया जा सके।
चने के आकार के ओले बरसे, काश्तकारों के माथे पर खिंची चिंता की लकीरें
इस अंधड़ और वर्षा के साथ ही क्षेत्र में चने के आकार के ओले गिरने की भी पुष्टि हुई है। अचानक हुई ओलावृष्टि के बाद पूरे इलाके में तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक का असर बढ़ गया। हालांकि, इस मौसमी बदलाव ने कृषि समुदाय के लिए गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
खेतों में खड़ी फसलों पर ओलों और तेज हवाओं की मार पड़ने से काश्तकारों को व्यापक खराबे की आशंका सता रही है। किसानों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में भी अंधड़ और ओलावृष्टि का यह सिलसिला जारी रहा, तो बची हुई पैदावार भी पूरी तरह नष्ट हो सकती है। कृषि विभाग और राजस्व अधिकारी अब खेतों में जाकर फसलों को पहुंचे वास्तविक नुकसान की प्रारंभिक जानकारी जुटाने में लगे हैं, जबकि किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए मौसम सामान्य होने की प्रार्थना कर रहे हैं।
























