सीकर जिले की स्थानीय राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया जब प्रदेश सरकार के नगरीय विकास एवं आवासन (यूडीएच) मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बेटे दुर्गासिंह ने पंचायत समिति चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया. उन्होंने किसी राजनीतिक दल के सिंबल के बजाय एक निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी ताल ठोकने का फैसला किया है. दुर्गासिंह द्वारा भरा गया यह नामांकन पत्र श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड 19 से संबंधित है, जिसके सामने आते ही क्षेत्र के सियासी गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं.
कार्यकर्ताओं की पुरानी नाराजगी को बताया मुख्य वजह
नामांकन पत्र जमा करने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के तुरंत बाद दुर्गासिंह ने मीडिया और स्थानीय समर्थकों के सामने अपनी बात रखी. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कदम उन्होंने अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के तहत नहीं, बल्कि स्थानीय कार्यकर्ताओं के दबाव और उनकी भावना का सम्मान करते हुए उठाया है. उन्होंने दावा किया कि पिछले ढाई साल के लंबे अंतराल से इलाके के कार्यकर्ता पार्टी के कामकाज और कार्यशैली से असंतुष्ट चल रहे थे. जमीनी स्तर के इन्हीं कार्यकर्ताओं की लगातार यह इच्छा थी कि वह स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरें और उनकी आवाज बनें. इसी जनभावना को ध्यान में रखकर उन्होंने यह चुनावी कदम उठाया है.
वार्ड 19 के स्थानीय समीकरणों पर गहरा असर
पंचायत चुनाव पूरी तरह से वार्ड स्तर की सूक्ष्म राजनीति और सीधे व्यक्तिगत संपर्कों पर आधारित होते हैं. जब किसी सत्तारूढ़ कैबिनेट मंत्री का पुत्र ही अपनी पृष्ठभूमि से इतर निर्दलीय ताल ठोक दे, तो वहां के समीकरणों में व्यापक उथल-पुथल होना स्वाभाविक है. श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के वार्ड 19 में अब मुकाबला पूरी तरह खुला और दिलचस्प हो गया है. हालांकि दुर्गासिंह ने यह खुलकर उजागर नहीं किया कि पार्टी संगठन के भीतर नाराजगी किन विशिष्ट मुद्दों या नीतियों को लेकर थी, लेकिन उनके इस वक्तव्य ने अंदरूनी खींचतान को सीधे तौर पर उजागर कर दिया है.
भविष्य की राजनीतिक दिशा पर रहेंगी निगाहें
झाबर सिंह खर्रा वर्तमान में प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवासन मंत्री पद का दायित्व संभाल रहे हैं. ऐसे में उनके गृह जिले सीकर की श्रीमाधोपुर पंचायत समिति के इस वार्ड में होने वाले चुनाव परिणाम पर पूरे जिले की नजरें टिकी रहेंगी. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्षेत्र के मतदाता मंत्री के पुत्र की इस निर्दलीय उम्मीदवारी को किस तरह स्वीकार करते हैं और इसका असर चुनावी गणित पर कितना गहरा पड़ता है. फिलहाल पर्चा दाखिल होने के साथ ही वार्ड 19 का मुकाबला प्रदेश भर में चर्चा का केंद्र बन गया है.



















