बीकानेर जिले की पश्चिमी सीमा से सटे खाजूवाला क्षेत्र में खेतों की प्यास बुझाने के लिए जारी गतिरोध अब राज्य के सत्ता केंद्र तक पहुंच चुका है। करीब पच्चीस दिनों से सड़कों पर डटे काश्तकारों की आवाज को लेकर जनप्रतिनिधियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल राजधानी जयपुर पहुंचा, जहां मुख्यमंत्री आवास में भजनलाल शर्मा के साथ उच्चस्तरीय चर्चा हुई। इस संवाद का मुख्य मकसद नहर के पानी के वितरण को लेकर उपजे असंतोष को शांत करना और खेतों तक समय पर पानी पहुंचाने की व्यवस्था बनाना रहा।
शीर्ष स्तर पर उठा काश्तकारों की परेशानी का मुद्दा
राजधानी में आयोजित इस उच्चस्तरीय मंथन में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने खेतों में खड़ी फसलों की जरूरतें और ग्रामीणों की नाराजगी का ब्योरा रखा। खाजूवाला के विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने इलाके की जमीनी हकीकत बयां करते हुए बताया कि पानी की कमी के चलते किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है। इस चर्चा के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी उपस्थित थे। इसके साथ ही विधायक ताराचंद सारस्वत, विधायक अंशुमान सिंह भाटी, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बिहारी विश्नोई तथा भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम पंचारिया ने भी शासन प्रमुख के समक्ष ग्रामीणों का पक्ष मजबूती से पेश किया।
केवल समस्याओं के उल्लेख तक सीमित न रहते हुए शासन ने त्वरित कदम उठाने के संकेत दिए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए नहर व्यवस्था और पानी की आपूर्ति के विवाद का व्यावहारिक हल तलाशने की जिम्मेदारी अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) शिखर अग्रवाल के कंधों पर डाली गई है।
नहर रेगुलेशन और पानी के बंटवारे को लेकर अड़े ग्रामीण
सीमावर्ती इलाके में खेती पूरी तरह नहरी तंत्र पर टिकी है। काश्तकारों की सबसे प्रमुख मांग यह है कि मौजूदा प्रणाली में बदलाव करते हुए चार में से दो समूहों में पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही छह महीने का एक स्पष्ट रेगुलेशन ढांचा निर्धारित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बुवाई और फसल पकने के दौरान अनिश्चितता की स्थिति न बने। ग्रामीणों का कहना है कि पर्याप्त मात्रा में पानी न मिलने से उत्पादन बुरी तरह गिर जाता है, जिसका सीधा असर उनके पूरे साल के जीवनयापन पर पड़ता है।
पानी के बंटवारे को लेकर खींचतान काफी पुरानी है। इससे पहले सितंबर के महीने में भी इस भूभाग के काश्तकारों ने अपने हक के लिए मोर्चा खोला था। उस दौरान अठावन प्रतिशत जल हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ इक्कीस सितंबर को घड़साना में व्यापक लामबंदी और शक्ति प्रदर्शन का ऐलान किया गया था। अब लगभग चार हफ्तों से लगातार जारी विरोध प्रदर्शन के बीच मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत होने से आंदोलनकारियों के बीच सकारात्मक परिणाम की आस बंधी है, हालांकि अंतिम नतीजे प्रशासनिक स्तर पर होने वाली आगामी कवायद पर निर्भर करेंगे।
कृषि परियोजनाओं के दावों के बीच परीक्षा में प्रशासन
राज्य प्रशासन लगातार यह दावा करता रहा है कि विभिन्न संभागों में जल प्रबंधन और सिंचाई तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए वृहद योजनाओं पर काम चल रहा है। जल से जुड़ी परियोजनाओं की हालिया समीक्षा में खुद शासन प्रमुख ने तय समय में दिक्कतों के निस्तारण और नहरी तंत्र को चुस्त-दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। अब खाजूवाला का यह आंदोलन स्थानीय स्तर से निकलकर सीधे सचिवालय और नीति निर्धारकों की मेज पर आ चुका है।
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद अब इलाके की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक स्तर पर रेगुलेशन में क्या फेरबदल किए जाते हैं। काश्तकारों का मानना है कि जब तक नहरों में तय फार्मूले के आधार पर नियमित पानी का प्रवाह शुरू नहीं होता, तब तक उनकी आजीविका पर मंडरा रहा खतरा टल नहीं सकता।




















