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राजस्थान में गरबा उत्सवों से पहले विश्व हिंदू परिषद की एंट्री, पंडालों में पहचान पत्र जांचने की मांग उठाईराजस्थान
6 अक्तू॰ 2026, 9:47 pm (1 घंटे पहले)· 0

राजस्थान में गरबा उत्सवों से पहले विश्व हिंदू परिषद की एंट्री, पंडालों में पहचान पत्र जांचने की मांग उठाई

विश्व हिंदू परिषद ने जयपुर में प्रशासन से गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने और पहचान पत्र जांचने की अपील की है, जिससे त्योहार से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा तेज हो गई है।

शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है, और इसके साथ ही राजस्थान के शहरों तथा कस्बों में पारंपरिक डांडिया और गरबा उत्सवों की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। इसी बीच विश्व हिंदू परिषद ने जयपुर में गरबा पंडालों में प्रवेश नियमों को लेकर एक बड़ा मुद्दा उठा दिया है। संगठन के प्रांत अध्यक्ष सुभद्र पापड़ीवाल ने सार्वजनिक तौर पर मांग रखी है कि इन धार्मिक आयोजनों में गैर-हिंदुओं अथवा अन्य धर्मों के लोगों को प्रवेश न दिया जाए। उनका कहना है कि गरबा केवल नाच-गाने या मौज-मस्ती का साधन नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से देवी दुर्गा की भक्ति और नवरात्र की पवित्र आस्था से जुड़ा एक धार्मिक अनुष्ठान है। इसलिए पंडालों के मुख्य द्वारों पर सख्त निगरानी और पहचान की प्रक्रिया अनिवार्य होनी चाहिए।

प्रवेश द्वारों पर पहचान पत्रों की अनिवार्य जांच की मांग

विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष सुभद्र पापड़ीवाल ने प्रशासनिक अमले से सहयोग की उम्मीद जताते हुए कहा कि आयोजन स्थलों पर आने वाले हर व्यक्ति के पहचान पत्र की गहन पड़ताल होनी चाहिए। उनके अनुसार प्रशासन को ऐसे व्यक्तियों को पंडालों के भीतर जाने से रोकना चाहिए जो दूसरे धर्मों से ताल्लुक रखते हैं। संगठन का मानना है कि यदि प्रवेश के समय ही आईडी कार्ड देखने का पुख्ता प्रबंध कर दिया जाए, तो गरबा आयोजकों को कार्यक्रम के दौरान या बाद में किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति या विवाद का सामना नहीं करना पड़ेगा। पापड़ीवाल ने साफ किया कि संगठन सरकारी तंत्र के साथ टकराव की स्थिति नहीं चाहता, बल्कि व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए समय रहते सहयोग की उम्मीद करता है। उन्होंने आग्रह किया कि 11 अक्टूबर को नवरात्र पर्व शुरू होने से पहले ही स्थानीय प्रशासन को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए।

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धार्मिक मान्यताओं और आस्था के अंतर पर उठाया सवाल

अन्य धर्मों के व्यक्तियों के गरबा कार्यक्रमों में शामिल होने पर सवाल खड़े करते हुए सुभद्र पापड़ीवाल ने तर्क दिया कि संबंधित मजहब में किसी अन्य देवी-देवता की पूजा-अर्चना या भक्ति में विश्वास करना शिर्क के दायरे में आता है। ऐसे में जब उनकी अपनी धार्मिक मान्यताएं इसकी इजाजत नहीं देतीं, तो फिर उनका हिंदू देवी की आराधना वाले गरबा पंडालों में पहुंचना समझ से परे है। इसी आधार पर विश्व हिंदू परिषद का रुख है कि उत्सव में सम्मिलित होने वाले प्रत्येक श्रद्धालु या दर्शक की धार्मिक पहचान पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए। संगठन ने गरबा समितियों और आयोजकों से भी सचेत रहने की अपील की है, ताकि वे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रवेश बिंदुओं पर सुचारु जांच प्रणाली तैयार कर सकें। यह विवाद सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी पहले से गरबा आयोजनों के दौरान पहचान पत्रों की जांच और गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर व्यापक चर्चाएं होती रही हैं। उदाहरण के तौर पर महाराष्ट्र में भी इस वर्ष गरबा उत्सवों से पूर्व विश्व हिंदू परिषद की ओर से ठीक इसी प्रकार पहचान पत्रों की जांच और गैर-हिंदुओं के दाखिले पर रोक लगाने की मांग सामने रखी जा चुकी है।

कानून हाथ में न लेने का आश्वासन और प्रशासन को चेतावनी

सुभद्र पापड़ीवाल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि विश्व हिंदू परिषद का इरादा किसी भी सूरत में कानून को अपने हाथ में लेने का नहीं है। उन्होंने कहा कि शांति व्यवस्था या कानून-व्यवस्था को बिगाड़ना संगठन का उद्देश्य बिल्कुल नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने जिला प्रशासन को आगाह करते हुए कहा कि यदि संदिग्ध या गैर-धार्मिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को पंडालों में आने से नहीं रोका गया और बाद में कोई सामाजिक तनाव या असंतोष पैदा हुआ, तो उसकी पूरी जवाबदेही स्थानीय प्रशासन की होगी। इस प्रकार विश्व हिंदू परिषद ने एक ओर जहां व्यवस्था में सहयोग का प्रस्ताव रखा है, वहीं दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर कड़ा रुख भी स्पष्ट कर दिया है। संगठन की अपेक्षा है कि नवरात्र के दौरान किसी भी टकराव या विवाद की नौबत आने से पहले ही संबंधित विभाग आवश्यक सुरक्षात्मक कदम उठा लें।

11 अक्टूबर से सजेंगे पंडाल और सुरक्षा का व्यापक खाका

इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं, जिसके बाद पूरे राजस्थान भर में बड़े पैमाने पर डांडिया और गरबा पंडाल सजेंगे। राज्य के प्रमुख शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक कई भव्य पंडाल तैयार किए जाते हैं, जहां हर रात हजारों की संख्या में लोग परिवार सहित पहुंचते हैं। भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए आगामी दिनों में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए सुरक्षा का प्रबंधन सबसे बड़ी प्राथमिकता रहेगा। विभिन्न इलाकों में आयोजकों और स्थानीय अधिकारियों की बैठकों के जरिए प्रवेश नियंत्रण, पहचान जांच, पार्किंग व्यवस्था, महिला सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए जा सकते हैं। विश्व हिंदू परिषद की ओर से उठाए गए इस कदम के बाद अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और राजस्थान पुलिस के रुख पर टिकी हैं कि वे गरबा आयोजनों में प्रवेश नियमों को लेकर क्या रणनीति अपनाते हैं।

सवाल-जवाब

जयपुर में विश्व हिंदू परिषद ने गरबा पंडालों को लेकर क्या मांग रखी है?
संगठन ने मांग की है कि गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश रोका जाए और आने वाले सभी लोगों के पहचान पत्र अनिवार्य रूप से जांचे जाएं।
विश्व हिंदू परिषद के अनुसार गरबा आयोजन का मूल उद्देश्य क्या है?
विहिप का कहना है कि गरबा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह शारदीय नवरात्र के दौरान देवी दुर्गा की भक्ति और धार्मिक आस्था से जुड़ा उत्सव है।
इस वर्ष शारदीय नवरात्र किस तारीख से शुरू हो रहे हैं?
इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे हैं, जिसके साथ ही राजस्थान भर में डांडिया और गरबा कार्यक्रम शुरू होंगे।
पहचान पत्र जांच की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने किस अन्य राज्य का उदाहरण दिया है?
संगठन ने महाराष्ट्र का उल्लेख किया है, जहां इस साल गरबा उत्सवों से पहले पहचान पत्र जांचने और गैर-हिंदुओं के प्रवेश को सीमित करने की मांग उठाई गई थी।
यदि प्रशासन ने यह मांग नहीं मानी तो विहिप का क्या रुख है?
विहिप ने स्पष्ट किया है कि वह कानून हाथ में नहीं लेगी, लेकिन यदि बाद में कोई सामाजिक तनाव उत्पन्न होता है तो उसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 मिनट पहले

सुभद्र पापड़ीवाल जी का तर्क थोड़ा अजीब लगा कि दूसरे धर्मों में 'शर्क' माना जाता है, इसलिए वे गरबा में नहीं आ सकते। भाई, नाचने-गाने और आस्था को हर बार ऐसे जोड़ना ज़रूरी नहीं है, लोग अक्सर सिर्फ़ घूमने और त्योहार का मज़ा लेने जाते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·27 मिनट पहले

अर्जुन भाई, बात सिर्फ नाचने की नहीं है, आयोजक इसे धार्मिक अनुष्ठान मान रहे हैं। जब नियम कड़े होंगे तभी तो विवाद टलेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 मिनट पहले

पहचान पत्र की जाँच से पंडालों में सुरक्षा तो शायद ठीक हो जाए, पर इस तरह की रोक-टोक से पूरा माहौल खराब होता है और असली मज़ा किरकिरा हो जाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·48 मिनट पहले

करण भाई, यूपी में भी ऐसे मामलों पर पुलिस को पहले ही अलर्ट रहना पड़ता है, वरना छोटी सी बात पर त्योहार का माहौल बिगड़ते देर नहीं लगती।

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