राजस्थान के कोटा शहर में त्योहारों और शादियों के सीजन के दौरान महिलाओं के बीच खरीदारी का एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। शहर के बीचों-बीच स्थित स्वर्ण रजत मार्केट और न्यू क्लॉथ मार्केट एक-दूसरे के बेहद करीब हैं, जिसके कारण खरीदारों को अलग-अलग जगहों पर भटकने की जरूरत नहीं पड़ती है। एक तरफ जहां कपड़ों और साड़ियों की ढेरों वैरायटी मिलती है, वहीं दूसरी तरफ सोने-चांदी के आभूषणों के लिए भी ग्राहकों को पास ही बेहतरीन विकल्प मिल जाते हैं।
बड़ा सर्राफा के रूप में पहचान
करीब 25 से 30 साल पुराने स्वर्ण रजत मार्केट को स्थानीय स्तर पर बड़ा सर्राफा के नाम से भी जाना जाता है। इस व्यावसायिक परिसर में कुल 412 दुकानें हैं, जिनमें 206 दुकानें भूतल पर और इतनी ही दुकानें पहली मंजिल पर संचालित होती हैं। यहां आने वाले ग्राहकों को कुंदन, मीनाकारी के आभूषण, चेन, ईयररिंग्स और डायमंड रिंग समेत विभिन्न प्रकार के सोने-चांदी के गहने आसानी से मिल जाते हैं।
पीढ़ियों से संभल रहा कारोबार
इस स्वर्ण बाजार की एक बड़ी खासियत यह है कि यहां कई स्वर्णकार परिवारों की दूसरी और तीसरी पीढ़ी पूरी सक्रियता के साथ अपना पैतृक कारोबार संभाल रही है। दुकानदारों ने समय के साथ ग्राहकों की बदलती पसंद और उनके बजट का विशेष ध्यान रखते हुए बाजार में अपनी एक अलग और भरोसेमंद पहचान कायम की है। यही वजह है कि त्योहारों के दिनों में यहां ग्राहकों की आवाजाही काफी बढ़ जाती है।
साड़ियों का प्रमुख केंद्र
स्वर्ण रजत मार्केट के ठीक पास ही स्थित न्यू क्लॉथ मार्केट साड़ियों और कपड़ों की खरीद के लिए शहर में एक खास मुकाम रखता है। शादी-ब्याह के आयोजनों या करवा चौथ जैसे प्रमुख व्रतों के अवसर पर महिलाएं अपनी पसंद के नवीनतम डिजाइन और बजट के अनुकूल साड़ियां खरीदने के लिए इसी बाजार का रुख करती हैं। एक ही परिसर के नजदीक कपड़े और आभूषण दोनों उपलब्ध होने के कारण यह पूरा क्षेत्र खरीदारी का मुख्य केंद्र बन जाता है.
चौथ माता मंदिर की रौनक
खरीदारी के इस सफर के साथ-साथ इन बाजारों के पास स्थित चौथ माता मंदिर का धार्मिक महत्व भी इस जगह को खास बनाता है। करवा चौथ के पावन अवसर पर इस मंदिर में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ती है और विशेष रौनक देखने को मिलती है। महिलाएं अपने परिवार के सदस्यों के साथ यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करती हैं और दर्शन लाभ लेती हैं। इस दौरान मंदिर परिसर में लंबी-लंबी कतारें नजर आती हैं, जहां एक तरफ बाजारों में खरीदारी का दौर चलता है, तो दूसरी तरफ महिलाएं चौथ माता के दरबार में मत् टेककर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की मंगल कामना करती हैं।


















