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गाय को ज्यादा हरा चारा खिलाना पड़ सकता है भारी, आफरा से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाहराजस्थान
24 अक्तू॰ 2026, 2:14 pm (1 घंटे पहले)· 0

गाय को ज्यादा हरा चारा खिलाना पड़ सकता है भारी, आफरा से बचाव के लिए डॉक्टर की सलाह

बीकानेर में पशु चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि गायों को जरूरत से ज्यादा हरा चारा खिलाने से उनके पेट में आफरा और गैस की गंभीर समस्या हो सकती है। ऐसे में पशुपालकों को खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

पशुओं की सेहत के लिए हरा चारा बहुत फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसकी अत्यधिक मात्रा गायों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। जरूरत से ज्यादा हरा चारा खाने पर गायों के पेट में आफरा जैसी गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। विशेषकर जब मवेशी एक साथ बहुत अधिक मात्रा में चारा गटक जाते हैं, तो उनके पेट में अत्यधिक गैस बनने लगती है और पेट फूलने लगता है। यदि इस स्थिति पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो पशु की हालत तेजी से बिगड़ सकती है और उसकी जान पर भी बन आ सकती है। ऐसे में पशुपालकों के लिए जरूरी है कि वे अपने मवेशियों के खानपान और उनके रोजमर्रा के व्यवहार पर कड़ी नजर रखें।

डॉक्टर ने दी खानपान नियंत्रित रखने की सलाह

बीकानेर के गोगागेट स्थित पॉलिक्लीनिक के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. जरनेल बिश्नोई ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि जब पर्याप्त मात्रा में हरा चारा उपलब्ध होता है, तो कई बार गायें आवश्यकता से अधिक खा लेती हैं। इसके परिणामस्वरुप उनके पेट में आफरा और पाचन से जुड़ी कई अन्य दिक्कतें सामने आने लगती हैं। आम तौर पर ग्रामीण और शहरी इलाकों के पशुपालकों के सामने इस तरह की समस्याएं अक्सर आती रहती हैं, इसलिए मवेशियों के आहार पर निरंतर निगरानी बनाए रखना बेहद आवश्यक हो जाता है।

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आफरा के लक्षण दिखते ही तुरंत लें डॉक्टर की मदद

डॉ. बिश्नोई का कहना है कि गाय में आफरा के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। इस बीमारी में पशु का पेट तेजी से फूलता है और उसकी शारीरिक स्थिति बहुत कम समय में गंभीर हो सकती है। हालात बिगड़ने पर पशु की जान जाने का भी खतरा बना रहता है, इसलिए पशुपालकों को बिना देर किए फौरन किसी योग्य पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए ताकि सही समय पर उचित इलाज मिल सके। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आफरा की स्थिति से निपटने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में हींग और मीठे सोडे जैसे घरेलू नुस्खों का चलन है। हालांकि इन चीजों का उपयोग पशु की शारीरिक स्थिति, उसके वजन और समस्या की गंभीरता को परखकर ही किया जाना चाहिए। बिना पशु चिकित्सक की देखरेख या सलाह के किसी भी घरेलू उपाय की मात्रा खुद तय करना हानिकारक हो सकता है।

मीठा सोडा देते समय बरतें विशेष सतर्कता

मीठा सोडा या अन्य कोई पदार्थ देते वक्त पशुपालकों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है। यदि कोई भी तरल या ठोस पदार्थ गलत तरीके से पशु को खिलाया या पिलाया जाता है, तो वह उसकी श्वसन नली यानी सांस की नली में जा सकता है। इससे मवेशी को गंभीर शारीरिक नुकसान तो पहुंचता ही है, साथ ही उसकी जान भी जा सकती है। यही वजह है कि पशुओं को जबरदस्ती पानी या कोई अन्य दवा पिलाने से हमेशा बचना चाहिए। आफरा से पीड़ित गाय की निगरानी लगातार करते रहना चाहिए। यदि गाय अत्यधिक बेचैनी महसूस कर रही है, उसका पेट लगातार फूल रहा है या उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही है, तो बिना वक्त गंवाए पेशेवर पशु चिकित्सा की मदद लेनी चाहिए। ऐसे समय में केवल घरेलू उपचारों के भरोसे बैठे रहना पशु के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

आहार में संतुलन रखना है सबसे बड़ा बचाव

पशुपालकों को अपनी गायों को हरा चारा खिलाते समय उचित संतुलन का हमेशा ध्यान रखना चाहिए। एक ही बार में बहुत सारा चारा इकट्ठा डालने के बजाय पशुओं के खानपान को नियमित रूप से संतुलित रखना समझदारी है। इसके अलावा मवेशियों के चारे में अचानक से किसी भी तरह का बदलाव करने से भी बचना चाहिए। गाय के उठने-बैठने के ढंग, उसकी भूख और पेट की बनावट में यदि कोई भी असामान्य परिवर्तन दिखाई दे, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। डॉ. बिश्नोई की यही सलाह है कि पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर हमेशा एहतियात बरतना चाहिए। आफरा जैसी समस्याओं में यदि शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और डॉक्टर से तुरंत इलाज करवा लिया जाए, तो किसी भी बड़ी अनहोनी और गंभीर स्थिति से आसानी से बचा जा सकता है।

सवाल-जवाब

गायों में आफरा की समस्या क्यों होती है?
गाय द्वारा जरूरत से ज्यादा हरा चारा एक साथ खा लेने के कारण पेट में अत्यधिक गैस बनने से आफरा की समस्या होती है।
डॉ. जरनेल बिश्नोई किस पद पर कार्यरत हैं?
डॉ. जरनेल बिश्नोई बीकानेर के गोगागेट स्थित पॉलिक्लीनिक में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं।
आफरा के लक्षण दिखने पर क्या करना चाहिए?
आफरा के लक्षण दिखते ही बिना देर किए तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
क्या मीठा सोडा देना सुरक्षित होता है?
बिना पशु चिकित्सक की सलाह और सही जानकारी के मीठा सोडा देना खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह सांस की नली में जा सकता है।
पशुपालकों को चारे को लेकर क्या सावधानी रखनी चाहिए?
पशुपालकों को हरा चारा खिलाते समय संतुलन रखना चाहिए और चारे में अचानक कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहिए।
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टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·10 मिनट पहले

अरे बाप रे, हरा चारा ज्यादा खिलाने से भी गायों की जान जोखिम में आ सकती है, यह तो आज ही पता चला! क्या सिर्फ गायों को ही यह आफरा की दिक्कत होती है या भैंसों और बकरियों के साथ भी ऐसा होता है?

Ravikash Gupta@ravikash·29 मिनट पहले

हरा चारा ज्यादा खाने से गायों को आफरा होना नई बात नहीं है, पर क्या इसके लिए कोई ऐसा तरीका है जिससे इन्हें खुद ही ज्यादा खाने से रोका जा सके?

Arjun Mehta@arjun-mehta·28 मिनट पहले

रविकेश जी, सही कहा आपने। गाँव में हमारे ताऊजी की गाय के साथ भी ऐसा ही हुआ था, तब डॉक्टर को जल्दी बुलाना पड़ा था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·51 मिनट पहले

हरा चारा ज्यादा खाने से गायों का पेट फूलने की समस्या तो समझ आ गई, पर क्या कोई ऐसा आसान तरीका है जिससे पशुपालक खेत में ही यह अंदाज़ा लगा सकें कि जानवर ने ज़रूरत से ज़्यादा खा लिया है?

Rohan Verma@rohan-verma·51 मिनट पहले

करण भाई, खेत में अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है क्योंकि मवेशी चरते वक्त खुद नहीं बताते। डॉक्टर की सलाह ही माननी चाहिए।

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