जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भारतीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी के शोध छात्रों के साथ आयोजित संवाद के दौरान केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने विदेशों में रह रही भारतीय प्रतिभाओं की स्वदेश वापसी को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक चुनौतियों पर खुलकर विचार साझा किए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट मानव संसाधन मौजूद है, लेकिन उन्हें वापस लाने के लिए बनने वाले वित्तीय कार्यक्रमों को देश के लोकतांत्रिक ढांचे और जवाबदेही के मानकों के अनुसार तैयार करना जरूरी है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था और नीतियों की आलोचना की चुनौती
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यदि सरकार विदेशों से शीर्ष प्रतिभाओं को वापस लाने के मकसद से बड़े पैमाने पर स्कॉलरशिप और फंडिंग योजनाएं शुरू करती है, तो उस पर सवाल उठाने वाले भी सामने आ जाते हैं। उन्होंने सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का नाम लेते हुए टिप्पणी की कि ऐसी पहल करने पर इस तरह के लोग सामने आकर आलोचना करने लगते हैं। पीयूष गोयल के अनुसार, ऐसे आलोचक यह तर्क देने लगते हैं कि छात्रों को फंड देना और स्कॉलरशिप देना सरकार का काम था, फिर कोई अपने स्तर पर ऐसा क्यों करे।
पीयूष गोयल ने छात्रों से कहा कि दुर्भाग्य से ऐसे तत्व सामने आकर काम में व्यवधान डालते हैं और दिमाग खराब करते हैं। इसी वजह से भारत सरकार को किसी भी नीति की रूपरेखा तैयार करते समय भारतीय लोकतंत्र के नजरिए और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग की आशंकाओं को पूरी संजीदगी से ध्यान में रखना पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीतिगत स्तर पर हर कदम की समीक्षा जनसमर्थन और पारदर्शिता की कसौटी पर होती है।
चीन के मॉडल और भारतीय लोकतंत्र में अंतर
कार्यक्रम के दौरान शोध छात्रों ने केंद्रीय मंत्री से पूछा कि क्या भारत भी चीन की तरह अपने विदेशी वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी जानकारों को वतन वापस बुलाने के लिए सरकार समर्थित योजनाएं लागू कर सकता है। इसके जवाब में पीयूष गोयल ने चीन की ओर से विदेशी प्रतिभाओं, विशेषकर चीनी मूल के शिक्षाविदों को वापस लाने के प्रयासों का उल्लेख किया। चीन इन पहलों के जरिए अपनी घरेलू नवाचार क्षमता को सुदृढ़ करने और प्रतिभाओं के पलायन की समस्या को नियंत्रित करने की कोशिश करता रहा है।
इस मॉडल का विश्लेषण करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चीन की पहल अपनी जगह अच्छी हो सकती है, लेकिन यहीं पर अधिनायकवादी व्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बीच का मूलभूत अंतर स्पष्ट हो जाता है। उन्होंने चीन की शासन प्रणाली की तुलना भारत के खुले तंत्र से करते हुए चुटकी ली कि चीन में सरकारी कार्यक्रमों के गलत इस्तेमाल के डर से लोग सहम जाते हैं और नियमों की अवहेलना करने पर गायब भी हो सकते हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि यदि भारत में ऐसी किसी व्यवस्था का दुरुपयोग हुआ, तो जवाबदेही के दबाव में मंत्री के रूप में उन्हें खुद गायब होना पड़ जाएगा।
वैश्विक प्रतिभाओं को स्वदेश लाने के लिए छात्रों से मांगे विचार
दुनिया भर में फैले कुशल पेशेवरों की क्षमता को स्वीकार करते हुए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने कहा कि आप विश्व के किसी भी हिस्से में चले जाएं, वहां बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली भारतीय अपनी सेवाएं दे रहे हैं। चुनौती इस बात की है कि इन असाधारण पेशेवरों को भारत कैसे वापस लाया जाए, जबकि साथ ही यह भी सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि किसी भी वित्तीय या नीतिगत प्रावधान का दुरुपयोग न हो।
पीयूष गोयल ने बर्लिन में मौजूद युवा शोधकर्ताओं से सरकार को व्यावहारिक सुझाव देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छात्र स्वयं नए विचार सोचें और सरकार के साथ साझा करें ताकि विदेशों में कार्यरत भारतीयों को स्वदेश लौटने के लिए प्रोत्साहित करने वाली पारदर्शी नीतियां बनाई जा सकें। उन्होंने सवाल किया कि प्रतिभाओं को आकर्षित करने और सभी को वापस देश की विकास यात्रा से जोड़ने के लिए सबसे प्रभावी तरीके क्या हो सकते हैं।
मातृभूमि से जुड़ाव और आधिकारिक यात्रा का संदर्भ
स्वदेश वापसी के निर्णय को केवल आर्थिक लाभ-हानि से परे बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह फैसला हमेशा केवल पैसों या वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं होता। उन्होंने विदेशी धरती पर काम कर रहे भारतीय युवाओं को अपनी जड़ों और मातृभूमि के प्रति भावनात्मक जिम्मेदारी की याद दिलाई। उन्होंने छात्रों से अपील की कि जीवन के किसी मोड़ पर उन्हें अपनी मातृभूमि के लिए भी सोचना चाहिए और देश को कुछ वापस देने का दृष्टिकोण रखना चाहिए।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 22 से 27 अक्टूबर तक जर्मनी और नीदरलैंड के आधिकारिक द्विपक्षीय दौरे पर हैं। इस यात्रा के दौरान उनके साथ लगभग 100 भारतीय व्यवसायों और स्टार्टअप्स का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नवाचार और व्यापारिक साझेदारियों को गति देना है।













