दीपावली के पावन पर्व की श्रृंखला में रूप चौदस यानी नरक चतुर्दशी का दिन महिलाओं के सौंदर्य और साज-सज्जा के लिए खास माना जाता है। इस अवसर पर सुबह से ही शहर के हर कोने में त्योहारी चमक और विशेष उत्साह का माहौल साफ नजर आ रहा है।
ब्यूटी पार्लर और सैलून में लगी कतारें
शैक्षणिक नगरी कोटा में रूप चौदस का यह उत्सव बेहद धूमधाम के साथ आयोजित किया जा रहा है। दिन निकलते ही शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित मेकअप स्टूडियो और सैलून में महिलाओं और युवतियों का पहुंचना शुरू हो गया था, और दोपहर होते-होते यह भीड़ और अधिक बढ़ गई। प्रमुख बाजारों और कॉलोनियों में संचालित इन संस्थानों में खासी चहल-पहल बनी हुई है।
पारंपरिक और आधुनिक सौंदर्य का संगम
दीपावली के इस विशेष अवसर पर महिलाएं अपने पारंपरिक पहनावे के साथ लुक को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए विशेष पैकेज बुक करवा रही हैं। संचालकों के अनुसार, फेशियल, हेयर ट्रीटमेंट, ब्लीच, थ्रेडिंग और मेकअप जैसी सेवाओं की भारी मांग बनी हुई है। हर कोई इस पावन अवसर पर सबसे अलग और सुंदर दिखने की चाहत के साथ पार्लरों का रुख कर रहा है, जिससे इस कारोबार से जुड़े लोगों में भी काफी खुशी है।
प्राचीन परंपराओं का निर्वहन
आधुनिक दौर के बीच कोटा के पारंपरिक परिवारों में आज भी इस पर्व के प्राचीन नियमों का पूरी निष्ठा से पालन किया जा रहा है। घरों में सुबह सवेरे उबटन लगाकर स्नान करने की पुरानी परंपरा को निभाया गया, जिसे त्वचा की सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। घरों की बुजुर्ग महिलाओं का ऐसा मानना है कि सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करने और उबटन का उपयोग करने से शरीर का रूप निखरता है तथा नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।
बाजारों में खरीदारों का उत्साह
केवल पार्लर ही नहीं बल्कि कोटा के मुख्य बाजार भी पूरी तरह गुलजार दिखाई दे रहे हैं। शाम को दीप प्रज्वलन और यमराज के निमित्त दीपक जलाने की परंपरा के वास्ते बाजारों में नए वस्त्रों, दीयों और पूजा सामग्री की दुकानों पर खरीदार उमड़ रहे हैं। रोशनी से जगमगाते माहौल ने पूरे शहर को एक नई ऊर्जा प्रदान की है और यह पर्व महिलाओं के लिए आत्मविश्वास का प्रतीक बन गया है।



















