राजस्थान के सीकर जिले में स्थित सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल खाटूश्यामजी में श्रद्धालुओं का तांता हर दिन लगा रहता है। इस पवित्र तीर्थ में आम जनमानस के साथ-साथ कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और हस्तियां भी निरंतर अपनी हाजिरी लगाते हैं। इसी कड़ी में राजस्थान विधानसभा सदस्य रविन्द्र सिंह भाटी ने खाटूश्यामजी पहुंचकर बाबा श्याम के दर्शन किए। उन्होंने मंदिर में शीश नवाकर विधि-विधान से विशेष अनुष्ठान संपन्न किया तथा पूरे राजस्थान की प्रगति, खुशहाली और सुख-समृद्धि की मंगलकामना की।
मंदिर कमेटी ने किया अभिनंदन और गर्भगृह में करवाई पूजा
धाम परिसर में आगमन के उपरांत श्री श्याम मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा विधायक रविन्द्र सिंह भाटी का भव्य स्वागत किया गया। मंदिर कमेटी के मंत्री मानवेंद्र सिंह चौहान स्वयं उन्हें मंदिर के मुख्य गर्भगृह तक ले गए, जहां उन्होंने पूरी विधि और परंपरा के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई। दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने पर ट्रस्ट की ओर से विधायक को बाबा श्याम का पावन स्मृति प्रतीक चिह्न भेंट किया गया। इसके अतिरिक्त उन्हें पारंपरिक श्याम दुपट्टा ओढ़ाकर आत्मीय सम्मान भी प्रदान किया गया। इस धार्मिक प्रवास के दौरान विधायक की गहरी श्रद्धा स्पष्ट नजर आई, और उन्होंने इस खास मौके पर गर्भगृह के सामने केक भी काटा।
वैश्विक स्तर पर श्याम भक्ति के प्रसार का किया उल्लेख
धार्मिक अनुष्ठान पूर्ण करने के बाद संवाददाताओं से रूबरू होते हुए रविन्द्र सिंह भाटी ने बाबा श्याम के प्रति अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि इस पवित्र धाम का महत्व अत्यंत अनूठा और अलौकिक है। उनके अनुसार, जो भी श्रद्धालु सच्चे हृदय और पूर्ण विश्वास के साथ इस चौखट पर दस्तक देता है, उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती। उन्होंने कहा कि वे स्वयं भी अपनी विशेष मन्नत और मनोकामना लेकर इस पावन दरबार में पहुंचे हैं।
विधायक ने इस तथ्य को भी रेखांकित किया कि बाबा श्याम का प्रभाव अब केवल राजस्थान या भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि विदेशों में भी उनकी भक्ति निरंतर फैल रही है। उन्होंने साझा किया कि विभिन्न देशों में आयोजित होने वाले श्याम कीर्तन आयोजनों में वे पूर्व में कई अवसरों पर स्वयं सहभागिता कर चुके हैं।
धार्मिक मान्यता और पौराणिक पृष्ठभूमि
सीकर का यह तीर्थ पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है। भारत के अलग-अलग राज्यों से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर नियमित रूप से यहां आते हैं। हाल के दिनों में राज्य मंत्री संजय शर्मा के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी यहां आकर बाबा श्याम के चरणों में नतमस्तक हो चुके हैं।
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल के दौरान महाबली भीम के पौत्र बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को अपने शीश का दान दे दिया था। बर्बरीक के इस अद्वितीय और महान त्याग से अत्यधिक प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें यह वरदान दिया था कि कलयुग के युग में वे स्वयं श्रीकृष्ण के ‘श्याम’ नाम से जाने और पूजे जाएंगे। इसके साथ ही वे हर संकटग्रस्त और पराजित व्यक्ति को संबल प्रदान कर उसका सहारा बनेंगे। यही ऐतिहासिक और पौराणिक कारण है जिसके चलते बाबा श्याम को ‘हारे का सहारा’ के रूप में स्मरण किया जाता है और यह धाम करोड़ों भक्तों के विश्वास का केंद्र बना हुआ है।


















