दूरदराज के शहरों के बीच चलने वाली ट्रेनों में सफर करने वाले मुसाफिरों को अब डिब्बों में गंदगी की समस्या से दो-चार नहीं होना पड़ेगा। चालीस घंटे से अधिक का समय लेने वाले लंबे रेल मार्गों पर भारतीय रेल ने कोचों की स्वच्छता, रखरखाव और ऑन-बोर्ड सेवाओं को दुरुस्त करने की व्यापक योजना लागू की है। यात्रा के अंतिम पड़ाव तक बोगियां साफ-सुथरी रहें, इसके लिए संबंधित रेल मंडलों को पूरे सफर की पल-पल निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
चलती गाड़ी में हाउसकीपिंग सेवाओं का दायरा बढ़ा
लंबे सफर के दौरान अक्सर डिब्बों और प्रसाधनों में गंदगी जमा होने लगती है। इस परेशानी को खत्म करने के लिए ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस (OBHS) की कार्यप्रणाली को कड़ा बनाया गया है। अब गाड़ियों के चलने के दौरान केवल फर्श बुहारने तक काम सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रसाधन कक्षों की लगातार धुलाई, टूट-फूट से जुड़े छोटे-मोटे मरम्मत कार्य और बायो-टॉयलेट की नियमित देखरेख भी सुनिश्चित की जाएगी।
लंबे मार्गों की गाड़ियां और रखरखाव का ढांचा
पूर्व मध्य रेल के क्षेत्राधिकार से शुरू होने वाली या वहां से होकर गुजरने वाली कई प्रमुख गाड़ियां चालीस घंटे से ज्यादा का सफर तय करती हैं। इन लंबी दूरी की सेवाओं में अवध आसाम एक्सप्रेस (15909/10), अहमदाबाद-सहरसा-अहमदाबाद एक्सप्रेस (19483/84), दानापुर-एसएमवीबी बेंगलुरू-दानापुर एक्सप्रेस (22365/66), पुणे-सुपौल-पुणे एक्सप्रेस (11401/02), आम्रपाली एक्सप्रेस (15707/08), राजगीर-लोकमान्य तिलक टर्मिनल-राजगीर एक्सप्रेस (13201/02) और सहरसा-अमृतसर-सहरसा गरीब रथ एक्सप्रेस (12203/04) शामिल हैं।
इनमें से राजगीर-लोकमान्य तिलक टर्मिनल एक्सप्रेस तथा दानापुर-एसएमवीबी बेंगलुरू एक्सप्रेस के प्राथमिक रख-रखाव की सीधी जिम्मेदारी पूर्व मध्य रेल संभालता है। सूची की शेष गाड़ियों का प्राथमिक तकनीकी रखरखाव अन्य क्षेत्रीय रेल जोनों के जिम्मे है। व्यवस्था यह बनाई गई है कि जिन गाड़ियों का मुख्य रखरखाव दूसरे जोन करते हैं, उनकी सफाई व्यवस्था पर भी नजर रखी जाएगी। इसके लिए बरौनी और डीडीयू (पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) जैसे क्लीन ट्रेन स्टेशनों पर विशेष सफाई अभियान चलाने का खाका तैयार हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा दौर में पूर्व मध्य रेल कुल 159 रेलगाड़ियों का प्राइमरी मेंटेनेंस करता है, जबकि इसके नेटवर्क की 81 गाड़ियों में ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग की सुविधा बहाल है।
हर दो घंटे में कूड़ा उठान और बायो-टॉयलेट की पड़ताल
कचरा प्रबंधन को समयबद्ध करते हुए यह नियम तय किया गया है कि प्रत्येक दो घंटे के अंतराल पर चलती ट्रेन में कचरा इकट्ठा किया जाएगा। जमा किए गए इस कचरे को मनमाने तरीके से फेंकने के बजाय निर्धारित सीटीएस (क्लीन ट्रेन स्टेशन) और अधिकृत कचरा निस्तारण केंद्रों पर ही उतारा जाएगा, जहां नियमों के अनुरूप उसका निस्तारण होगा।
इसके समानांतर बायो-टॉयलेट की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए बेस डिपो स्तर के साथ-साथ रास्ते के चुनिंदा महत्वपूर्ण स्टेशनों पर भी सघन तकनीकी जांच की जाएगी। डिपो अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि यात्रियों से आने वाली शिकायतों का बिना देरी समाधान हो। व्यवस्था में लापरवाही न बरती जाए, इसलिए जवाबदेह अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के लिए साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित करना अनिवार्य किया गया है।


















