राजस्थान के ऐतिहासिक जिले चित्तौड़गढ़ में शारदीय नवरात्र का उल्लास अपने चरम पर दिखाई दिया, जहां जिले भर के प्रमुख शक्तिपीठों और देवी धामों में तड़के से ही श्रद्धालुओं का भारी तांता लग गया। सुबह की पहली किरण फूटने के साथ ही मंदिरों के कपाट खुलते ही जयकारों का उद्घोष शुरू हो गया, जो देर शाम तक लगातार गूंजता रहा। छुट्टी का दिन होने की वजह से आम दिनों के मुकाबले श्रद्धालुओं की उपस्थिति कहीं अधिक दर्ज की गई, जिससे पूरा क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया।
चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित कालिका माता मंदिर में पैदल पहुंचे श्रद्धालु
चित्तौड़गढ़ दुर्ग की ऐतिहासिक परिधि में स्थापित कालिका माता मंदिर में भक्तों की आस्था का विशेष दृश्य देखने को मिला। बड़ी तादाद में श्रद्धालु कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके माता के दरबार में शीश नवाने पहुंचे। मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर गर्भगृह के अंदर तक भक्तों की लंबी-लंबी कतारें दिखाई दीं। घंटों तक कतारबद्ध रहने के बावजूद श्रद्धालु अत्यंत धैर्य के साथ अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हुए निरंतर जयघोष करते रहे। भीड़ के इस बड़े दबाव को देखते हुए स्थानीय पुलिस बल और मंदिर प्रशासन ने सुगम व सुरक्षित दर्शन सुनिश्चित कराने के लिए व्यापक बंदोबस्त संभाले।
जोगणिया माता, आवरी माता और अन्य शक्तिपीठों में भी भव्य नजारा
धार्मिक उत्सव की यह रौनक केवल दुर्ग तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि जिले के अन्य ख्यातिप्राप्त शक्तिपीठों में भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। जोगणिया माता, आवरी माता, झातला माता, बायण माता और सगरा माता धामों में सुबह से ही भक्तों का प्रवाह बना रहा। इन सभी पावन स्थलों पर श्रद्धालुओं ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की। माता रानी को चुनरी अर्पित करने, दीप प्रज्वलित करने और अपने परिजनों के लिए सुख, शांति तथा समृद्धि की मंगल कामना करने का क्रम दिनभर चलता रहा।
प्रशासन और मंदिर समितियों के विशेष सुरक्षा व नागरिक प्रबंध
नवरात्र उत्सव और अवकाश का संयोग होने के चलते चित्तौड़गढ़ जिले के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ बाहरी क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचे। अत्यधिक भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए सभी प्रमुख शक्तिपीठों पर कड़े सुरक्षा प्रबंध लागू किए गए थे। मंदिर कमेटियों और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कतार व्यवस्था, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और धूप से राहत दिलाने के लिए छायादार टेंट का बंदोबस्त किया। विशेष स्वयंसेवकों की तैनाती के साथ देर शाम तक दर्शन का यह सिलसिला सुचारू रूप से चलता रहा और शहरी क्षेत्रों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक पूरा माहौल मां दुर्गा की भक्ति के रंग में रंगा रहा।















