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जोधपुर में झीलों को दूषित होने से रोकने के लिए बना कृत्रिम कुंड, गणेश विसर्जन पर खास इंतजामराजस्थान
23 सित॰ 2026, 10:46 pm (3 घंटे पहले)· 0

जोधपुर में झीलों को दूषित होने से रोकने के लिए बना कृत्रिम कुंड, गणेश विसर्जन पर खास इंतजाम

जोधपुर में कायलाना झील जैसे जलस्रोतों को साफ रखने के मकसद से हाउसिंग बोर्ड के दशहरा मैदान में विशेष कृत्रिम तालाब तैयार किया गया है। श्रद्धालुओं से मूर्तियों के वस्त्र और प्लास्टिक सामग्री अलग सौंपने की अपील की गई है।

जोधपुर में गणेश उत्सव के समापन अवसर पर झीलों और जलाशयों के संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। शहर के प्राकृतिक जलभंडारों में मूर्तियों के विसर्जन से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए सेक्टर 16 हाउसिंग बोर्ड स्थित दशहरा मैदान में एक मानव निर्मित जलाशय तैयार किया गया है। स्थानीय निकाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मिलकर यह व्यवस्था की है ताकि भक्त अपनी परंपराओं का निर्वाह बिना प्रकृति को नुकसान पहुंचाए कर सकें।

कायलाना झील की सुरक्षा और सफाई की मुहिम

शहर की प्रमुख कायलाना झील को स्वच्छ रखने के लिए बीते लगभग 120 दिनों से एक सघन सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इस लंबी अवधि के दौरान स्वयंसेवकों और टीमों ने झील के पानी से भारी तादाद में प्लास्टिक की थैलियां, पुराने कपड़े और कचरा बाहर निकाला है। इतने हफ्तों की कड़ी मेहनत के बाद पानी में किसी भी तरह की गंदगी दोबारा न फैले, इसी कारण विसर्जन के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों का रुख न करने का संदेश दिया जा रहा है। समिति का मानना है कि जल धरोहरों की हिफाजत केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं हो सकती, बल्कि इसमें हर नागरिक की सीधी भागीदारी जरूरी है।

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वस्त्र, प्लास्टिक और पूजन सामग्री के पुनर्चक्रण की योजना

पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता और नगर निगम के ब्रांड एंबेसडर पंडित जीवराज श्रीमाली के मार्गदर्शन में इस पूरे अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। विसर्जन स्थल पर विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि प्रतिमाओं के ऊपर चढ़ाई गई चुनरी, कपड़े, धागे और सजावट में प्रयुक्त प्लास्टिक को अलग से इकट्ठा किया जा सके। इस सामग्री को छांटने के बाद पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग की प्रक्रिया में भेजा जाएगा, जिससे कचरा जमा न हो।

समिति की ओर से आमजन से मिट्टी की मूर्तियों को अपनाने का आग्रह किया जा रहा है। हालांकि, प्लास्टर ऑफ पेरिस या रासायनिक रंगों से तैयार प्रतिमाओं को भी इसी कृत्रिम कुंड में विसर्जित करने की अनुमति दी गई है, ताकि रासायनिक जहर प्राकृतिक झीलों के पानी में घुलकर जलीय जीवन को नष्ट न करे।

सफाई अभियान से जुड़े सामाजिक संगठन

पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन की इस पूरी व्यवस्था को सफल बनाने के लिए कई सामाजिक संस्थाएं एकजुट हुई हैं। नगर निगम के साथ मिलकर उत्थान ग्रुप फाउंडेशन, ग्रीन एनवायरमेंट सोसाइटी, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, रॉबिनहुड आर्मी, महादेव व्यायामशाला और नंदनवन मयूर सेवा समिति मैदानी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इन संस्थाओं के कार्यकर्ता विसर्जन स्थल पर व्यवस्था संभालने और श्रद्धालुओं को जागरूक करने में जुटे हैं, जिससे भक्ति भाव के साथ पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश की जा सके।

सवाल-जवाब

जोधपुर में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब कहां तैयार किया गया है?
यह कृत्रिम तालाब सेक्टर 16 हाउसिंग बोर्ड स्थित दशहरा मैदान में तैयार किया गया है।
कायलाना झील में कितने दिनों से सफाई अभियान चलाया जा रहा है?
कायलाना झील की स्वच्छता के लिए बीते करीब 120 दिनों से लगातार सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
प्रतिमाओं के साथ आने वाले कपड़ों और प्लास्टिक का क्या किया जाएगा?
विसर्जन स्थल पर इन सामग्रियों को अलग से एकत्र कर पुनर्चक्रण और दोबारा उपयोग के लिए भेजा जाएगा।
क्या कृत्रिम तालाब में पीओपी से बनी मूर्तियों का विसर्जन किया जा सकता है?
हां, प्राकृतिक जलस्रोतों को सुरक्षित रखने के लिए पीओपी और रासायनिक रंगों वाली मूर्तियों को भी इस कृत्रिम तालाब में स्वीकार किया जाएगा।
इस अभियान में नगर निगम के अलावा कौन-कौन से संगठन सहयोग दे रहे हैं?
इस अभियान में उत्थान ग्रुप फाउंडेशन, ग्रीन एनवायरमेंट सोसाइटी, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, रॉबिनहुड आर्मी, महादेव व्यायामशाला और नंदनवन मयूर सेवा समिति सहयोग कर रही हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 घंटे पहले

कृत्रिम कुंड बनाना अच्छी बात है, पर लोग सच में वहाँ जाएंगे या परंपरा के नाम पर सीधे झील में ही मूर्ति विसर्जन करेंगे, इस पर थोड़ा शक है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 घंटे पहले

पिछले साल कायलाना झील के पास गया था, तब पानी में तैरता कचरा देखकर बहुत बुरा लगा था। जोधपुर में यह कृत्रिम कुंड बनाने की पहल वाकई बहुत अच्छी है, कम से कम हमारी झीलें गंदी होने से तो बचेंगी।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अ अर्जुन जी, बात बिल्कुल सही है। क्या आपको लगता है कि लोग सचमुच इस कृत्रिम कुंड का इस्तेमाल करेंगे या मूर्ति विसर्जन के लिए पुरानी जगहों पर ही जाएंगे?

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 घंटे पहले

कायलाना झील को साफ करने में सौ दिन से ज्यादा की मेहनत लगी है, यह जानकर अच्छा लगा। लोग वाकई में पर्यावरण को लेकर जागरूक हो रहे हैं। बस एक बात समझ नहीं आई कि क्या प्रशासन ने शहर के बाकी हिस्सों में भी ऐसे कृत्रिम कुंड बनाए हैं या सिर्फ इसी एक जगह पर?

Rohan Verma@rohan-verma·2 घंटे पहले

करण भाई, जागरूकता की बात ठीक है पर सिर्फ एक कृत्रिम कुंड से क्या होगा? शहर इतना बड़ा है, बाकी लोग इतनी दूर थोड़ी जाएंगे।

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