जोधपुर में गणेश उत्सव के समापन अवसर पर झीलों और जलाशयों के संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। शहर के प्राकृतिक जलभंडारों में मूर्तियों के विसर्जन से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखते हुए सेक्टर 16 हाउसिंग बोर्ड स्थित दशहरा मैदान में एक मानव निर्मित जलाशय तैयार किया गया है। स्थानीय निकाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मिलकर यह व्यवस्था की है ताकि भक्त अपनी परंपराओं का निर्वाह बिना प्रकृति को नुकसान पहुंचाए कर सकें।
कायलाना झील की सुरक्षा और सफाई की मुहिम
शहर की प्रमुख कायलाना झील को स्वच्छ रखने के लिए बीते लगभग 120 दिनों से एक सघन सफाई अभियान चलाया जा रहा है। इस लंबी अवधि के दौरान स्वयंसेवकों और टीमों ने झील के पानी से भारी तादाद में प्लास्टिक की थैलियां, पुराने कपड़े और कचरा बाहर निकाला है। इतने हफ्तों की कड़ी मेहनत के बाद पानी में किसी भी तरह की गंदगी दोबारा न फैले, इसी कारण विसर्जन के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों का रुख न करने का संदेश दिया जा रहा है। समिति का मानना है कि जल धरोहरों की हिफाजत केवल सरकारी तंत्र के भरोसे नहीं हो सकती, बल्कि इसमें हर नागरिक की सीधी भागीदारी जरूरी है।
वस्त्र, प्लास्टिक और पूजन सामग्री के पुनर्चक्रण की योजना
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता और नगर निगम के ब्रांड एंबेसडर पंडित जीवराज श्रीमाली के मार्गदर्शन में इस पूरे अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। विसर्जन स्थल पर विशेष प्रबंध किए गए हैं ताकि प्रतिमाओं के ऊपर चढ़ाई गई चुनरी, कपड़े, धागे और सजावट में प्रयुक्त प्लास्टिक को अलग से इकट्ठा किया जा सके। इस सामग्री को छांटने के बाद पुनर्चक्रण और पुनः उपयोग की प्रक्रिया में भेजा जाएगा, जिससे कचरा जमा न हो।
समिति की ओर से आमजन से मिट्टी की मूर्तियों को अपनाने का आग्रह किया जा रहा है। हालांकि, प्लास्टर ऑफ पेरिस या रासायनिक रंगों से तैयार प्रतिमाओं को भी इसी कृत्रिम कुंड में विसर्जित करने की अनुमति दी गई है, ताकि रासायनिक जहर प्राकृतिक झीलों के पानी में घुलकर जलीय जीवन को नष्ट न करे।
सफाई अभियान से जुड़े सामाजिक संगठन
पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन की इस पूरी व्यवस्था को सफल बनाने के लिए कई सामाजिक संस्थाएं एकजुट हुई हैं। नगर निगम के साथ मिलकर उत्थान ग्रुप फाउंडेशन, ग्रीन एनवायरमेंट सोसाइटी, गुरुद्वारा गुरु सिंह सभा, रॉबिनहुड आर्मी, महादेव व्यायामशाला और नंदनवन मयूर सेवा समिति मैदानी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। इन संस्थाओं के कार्यकर्ता विसर्जन स्थल पर व्यवस्था संभालने और श्रद्धालुओं को जागरूक करने में जुटे हैं, जिससे भक्ति भाव के साथ पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश की जा सके।
























