राजस्थान के नागौर जिले के माडपुरा गांव में पंचायत चुनाव की मतगणना के दौरान एक ऐसा रोचक वाकया सामने आया है, जो हर तरफ चर्चा का विषय बन गया है। यहां सरपंच पद के चुनाव के लिए मतों की गिनती चल रही थी, तभी एक प्रत्याशी की जीत की अफवाह तेजी से फैल गई। इस झूठी खबर के आधार पर समर्थकों ने बिना परिणाम का इंतजार किए आधी रात को ही जश्न मनाना शुरू कर दिया।
रात साढ़े ग्यारह बजे शुरू हुआ था जश्न
रात करीब 11:30 बजे माडपुरा गांव में यह खबर उड़ी कि मगी देवी प्रजापत ने सरपंच का चुनाव जीत लिया है। यह सूचना मिलते ही उनके समर्थकों में भारी उत्साह फैल गया। किसी ने भी यह तस्दीक करने की जहमत नहीं उठाई कि चुनाव अधिकारी की तरफ से अंतिम परिणाम की घोषणा अभी बाकी है। समर्थकों ने इस अफवाह को ही सच मान लिया और ढोल-नगाड़े मंगवाकर गांव में विजय जुलूस निकाल दिया। इस जुलूस में मगी देवी के पति मोहब्बत राम भी अपने समर्थकों के साथ शामिल हुए। गलियों में जश्न का माहौल बन गया और लोग ढोल की थाप पर नाचने लगे तथा जीत के नारे लगाने लगे। समर्थकों को पूरा यकीन हो चुका था कि उन्होंने चुनाव में बाजी जीत ली है।
तीन घंटे बाद आया आधिकारिक परिणाम
जश्न का यह दौर लगभग तीन घंटे तक लगातार चलता रहा। ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच समर्थक अपनी जीत का जश्न मना रहे थे, लेकिन असली चुनावी आंकड़े आने अभी बाकी थे। रात करीब 2:30 बजे जब मतगणना की प्रक्रिया पूरी हुई और निर्वाचन अधिकारी की तरफ से आधिकारिक परिणाम घोषित किया गया, तो पूरी स्थिति अचानक से पलट गई। जिस मगी देवी की जीत पर रात को जश्न मनाया जा रहा था, वे असल में चुनाव हार चुकी थीं। उनकी प्रतिद्वंद्वी रूपी बाई ने कुल 1,581 वोट हासिल किए, जबकि मगी देवी प्रजापत को 1,412 वोट ही मिल पाए। रूपी बाई ने 169 वोटों के अंतर से यह मुकाबला अपने नाम कर लिया था।
खुशी और जश्न मायूसी में बदला
आधिकारिक परिणाम सामने आते ही माडपुरा गांव में माहौल पूरी तरह बदल गया। कुछ ही घंटे पहले तक जो लोग ढोल की धुन पर जश्न मना रहे थे, उन्हें अचानक निराशा हाथ लगी। यह अनोखी घटना पूरे नागौर जिले में चर्चा का केंद्र बन गई है। पंचायत चुनावों में जीत के बाद समर्थकों का जश्न मनाना आम बात है, लेकिन बिना आधिकारिक पुष्टि के जश्न मनाना और फिर नतीजे आने पर हार का सामना करना इस चुनाव की सबसे बड़ी चर्चा बन गया है। यह पूरा वाकया इस बात की मिसाल पेश करता है कि चुनाव में असली फैसला केवल अंतिम और आधिकारिक परिणामों की घोषणा के बाद ही पुख्ता माना जाना चाहिए।



















