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झारखंड के बेतला में खुला अनोखा महुआ कैफे, पारंपरिक फूलों से बन रहे चॉकलेट और प्रोटीन बारझारखंड
20 अक्तू॰ 2026, 11:11 am (2 घंटे पहले)· 2

झारखंड के बेतला में खुला अनोखा महुआ कैफे, पारंपरिक फूलों से बन रहे चॉकलेट और प्रोटीन बार

पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला इलाके में एक खास महुआ कैफे शुरू किया गया है, जहां पारंपरिक महुआ फूलों से चाय, चॉकलेट, लड्डू और प्रोटीन बार जैसे आधुनिक खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

झारखंड के जंगलों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाले महुआ के फूलों की छवि अब तेजी से बदल रही है। आम तौर पर इसे केवल शराब निर्माण से जोड़ा जाता रहा है, लेकिन अब पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले बेतला क्षेत्र में इसकी एक नई तस्वीर सामने आई है। स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़ने की पहल के तहत यहां एक विशेष महुआ कैफे की स्थापना की गई है। इस कैफे के माध्यम से महुआ के फूलों का इस्तेमाल करके कई तरह के लजीज और पौष्टिक खाद्य उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जो पर्यटकों और स्थानीय लोगों को खासा आकर्षित कर रहे हैं।

झारखंड की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा

आदिवासी बहुल राज्य झारखंड की सभ्यता में महुआ का स्थान बेहद खास रहा है। इस क्षेत्र के घने जंगलों और पहाड़ों में महुआ के पेड़ प्राकृतिक रूप से उगते हैं। यहां की स्थानीय आबादी सदियों से इन फूलों का उपयोग विभिन्न पारंपरिक तरीकों से करती आई है। इसके बावजूद आम जनमानस में महुआ को लेकर एक संकीर्ण सोच बनी हुई थी, जिसके तहत इसे केवल शराब बनाने का एक माध्यम माना जाता था। इसी रूढ़िवादी धारणा को तोड़ने और इस बहुमूल्य वानस्पतिक संसाधन की असली क्षमता को दुनिया के सामने लाने के लिए नए विकल्पों पर काम किया जा रहा है।

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अमीषा कुमारी के संचालन में चल रहा कैफे

बेतला में संचालित इस अनूठे महुआ कैफे की जिम्मेदारी बरवाडीह की रहने वाली अमीषा कुमारी संभाल रही हैं। उनके प्रयासों से यह कैफे महुआ आधारित उत्पादों के प्रचार-प्रसार का मुख्य केंद्र बन गया है। यहां आने वाले सैलानी न सिर्फ महुआ के नए रूपों का लुत्फ उठा रहे हैं, बल्कि इसके औषधीय और पौष्टिक गुणों से भी रूबरू हो रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य महुआ को केवल पारंपरिक दायरे से बाहर निकालकर एक आधुनिक फूड ब्रांड के रूप में स्थापित करना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सके।

चाय से लेकर डार्क चॉकलेट तक का सफर

इस कैफे के मेनू में शामिल वस्तुएं काफी अनोखी और विविधता से भरी हुई हैं। यहां की सबसे बड़ी यूएसपी महुआ मिल्क टी है, जिसे महुआ के फूलों को पानी में उबालकर, उसमें दूध, चीनी और इलायची डालकर बेहद करीने से तैयार किया जाता है। इसके अलावा, ग्राहकों के लिए नारियल महुआ लड्डू, प्रीमियम महुआ डार्क चॉकलेट, महुआ पॉप्स, महुआ प्रोटीन बार और महुआ प्रोटीन सीड्स भी बेचे जा रहे हैं। इतना ही नहीं, घर पर इन व्यंजनों को आजमाने के शौकीनों के लिए महुआ सिरप भी उपलब्ध कराया गया है, जिसकी मदद से लोग आसानी से विभिन्न प्रकार के व्यंजन बना सकते हैं।

किफायती दाम और समय सारणी

महुआ कैफे में मिलने वाले इन तमाम उत्पादों की कीमतें आम आदमी की पहुंच के भीतर रखी गई हैं। यहां उपलब्ध खाद्य पदार्थों के दाम 30 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 500 रुपये तक जाते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए यह कैफे हर दिन सुबह छह बजे से लेकर शाम को 6:30 बजे तक अपनी सेवाएं देता है। कैफे में आने वाले ग्राहकों की मांग और उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए ताजे उत्पाद परोसे जाते हैं, जिससे हर आगंतुक को एक बेहतरीन अनुभव मिल सके।

सोच बदलने की दिशा में एक अहम कदम

कैफे का संचालन संभाल रही अमीषा कुमारी बताती हैं कि समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी महुआ को सिर्फ मादक पदार्थों से जोड़कर देखता है। उनका मुख्य उद्देश्य लोगों की इस मानसिकता को बदलना है ताकि वे इसके अन्य पौष्टिक और स्वादिष्ट उपयोगों को भी अपना सकें। बेतला की यह अनूठी पहल महुआ की पुरानी पहचान को नए व्यावसायिक अवसरों के साथ पिरोने का काम कर रही है। इससे न केवल पलामू के प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग हो रहा है, बल्कि महुआ आधारित उत्पादों के प्रति लोगों का नजरिया भी सकारात्मक हो रहा है।

सवाल-जवाब

महुआ कैफे की शुरुआत कहाँ की गई है?
महुआ कैफे की शुरुआत झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले बेतला क्षेत्र में की गई है।
इस कैफे का संचालन कौन कर रहा है?
बेतला में स्थित इस महुआ कैफे का संचालन बरवाडीह की रहने वाली अमीषा कुमारी कर रही हैं।
महुआ कैफे में कौन-से मुख्य उत्पाद मिलते हैं?
यहाँ महुआ मिल्क टी, नारियल महुआ लड्डू, महुआ डार्क चॉकलेट, महुआ पॉप्स, प्रोटीन बार और सिरप जैसे उत्पाद मिलते हैं।
कैफे में उत्पादों की कीमत कितनी है?
महुआ कैफे में उपलब्ध उत्पादों की कीमत लगभग 30 रुपये से लेकर 500 रुपये तक तय की गई है।
यह कैफे प्रतिदिन किस समय तक खुला रहता है?
यह कैफे सुबह छह बजे से शुरू होकर शाम को 6:30 बजे तक खुला रहता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·24 मिनट पहले

बेतला पार्क में घूमते हुए एक बार महुआ की महक ने मेरा ध्यान खींचा था। अब वहां चाय और चॉकलेट बनते देखना बहुत अच्छा लगा, खासकर जब इसे स्थानीय लोग ही चला रहे हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·47 मिनट पहले

महुआ का चॉकलेट और प्रोटीन बार वाला आइडिया वाकई दिलचस्प है, खासकर तब जब इसे सिर्फ शराब से जोड़कर देखा जाता था। क्या बेतला के इस कैफे के बाद झारखंड के दूसरे जंगलों में भी ऐसे स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा?

Ravikash Gupta@ravikash·46 मिनट पहले

अर्जुन जी, महुआ के ऐसे स्टार्टअप्स को लोकल इकोनॉमी में बड़ा बूस्ट मिल सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

महुआ को हमेशा गलत नजरिए से देखा गया है, जबकि इसके औषधीय गुण गजब के हैं। झारखंड के इस बेतला कैफे ने बढ़िया रास्ता निकाला है। डार्क चॉकलेट और प्रोटीन बार का आइडिया सुनकर ही मुंह में पानी आ गया, अब बस जाकर ट्राई करना बाकी है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करन भाई, बात तो सही है। महुआ की चाय और चॉकलेट का आइडिया सच में ज़ोरदार है, अगली बार उधर जाना हुआ तो ज़रूर रुकेंगे।

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