पाली में कबाड़ का नाम सुनते ही आमतौर पर कचरे और रद्दी की छवि मन में आती है, लेकिन राजस्थान के पाली शहर से पर्यावरण संरक्षण और कला का एक अनूठा संगम सामने आया है। शहर के जाने-माने शहीद उद्यान में नगर निगम ने बेकार हो चुके वाहनों के स्पेयर पार्ट्स का इस्तेमाल करके एक बेहद सुंदर और आकर्षक 'वेस्ट टू बेस्ट' मिनी म्यूजियम विकसित किया है। इस उद्यान के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर अंदर रखी गई हर एक अद्भुत कलाकृति को कबाड़ बन चुके वाहनों के पुर्जों से गढ़ा गया है, जिसे देखने वाले हर शख्स की आंखें खुली की खुली रह जाती हैं।
इस अनोखे म्यूजियम में आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा केंद्र बिंदु राष्ट्रीय पक्षी मोर है, जिसे गाड़ियों के कचरे से बेहद बारीकी और खूबसूरती के साथ उकेरा गया है। मैकेनिकों द्वारा बेकार समझकर कबाड़ में फेंक दिए जाने वाले पुराने ब्रेक शू का इस्तेमाल इस मोर के धड़ और चेहरे को आकार देने के लिए किया गया है। इसके साथ ही, मोर के भव्य और फैले हुए पंखों को सजाने के लिए पुरानी क्लच प्लेटों का बेहद करीने से उपयोग किया गया है, जो पहली नजर में बिल्कुल असली पक्षी जैसा भ्रम पैदा करता है।
वाहनों के पुर्जों से सजा भारत का नक्शा और अन्य रचनाएं
पर्यावरण के प्रति जागरूकता और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की इस सराहनीय पहल के तहत केवल मोर तक ही काम सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि यहां कई अन्य मनमोहक संरचनाएं भी तैयार की गई हैं। वाहनों के छोटे तथा बड़े पहियों और गियर्स को आपस में बहुत ही व्यवस्थित ढंग से जोड़कर विशाल भारत का मानचित्र तैयार किया गया है, जिसके साथ ही एक विशेष लॉकेट पर 'INDIA' भी लिखा हुआ सुशोभित है। इसके अतिरिक्त, छोटे बच्चों और युवाओं का ध्यान खींचने के लिए कार के पुराने रिम और टायरों को आपस में फिक्स करके लूडो का एक विशाल पासा भी बनाया गया है। वहीं दूसरी तरफ, संगीत प्रेमियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए लोहे की पट्टियों और बेकार पड़े स्पेयर पार्ट्स की मदद से एक स्टाइलिश गिटार का ढांचा भी बेहद कलात्मक तरीके से गढ़ा गया है।
प्रवेश द्वार पर ही दिखती है नायाब कारीगरी
शहीद उद्यान के मुख्य गेट पर लगाया गया स्वागत बोर्ड भी किसी आम बोर्ड की तरह नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से वेस्ट मटेरियल और गाड़ियों से निकले लोहे के कतरनों और टुकड़ों से ही तैयार किया गया है। पाली नगर निगम के इस रचनात्मक प्रयास से शहरवासियों में पर्यावरण के प्रति चेतना तो तेजी से बढ़ ही रही है, साथ ही यह उद्यान अब देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण का केंद्र बन चुका है। कबाड़ के इस नायाब और बेहतरीन उपयोग ने एक बार फिर से इस बात को साबित कर दिखाया है कि अगर सही सोच और कलात्मक नजरिया हो, तो किसी भी बेकार वस्तु को एक बेहद खूबसूरत और उपयोगी रूप दिया जा सकता है।





















