देश की गौरवशाली वस्त्र परंपरा और स्वदेशी कारीगरी से युवा पीढ़ी का परिचय कराने के उद्देश्य से जोधपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी में एक विशेष कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य केंद्र पारंपरिक हथकरघा संस्कृति और आधुनिक फैशन के बीच की दूरी को पाटना था, ताकि छात्र जमीनी स्तर पर कारीगरों के अनुभवों से सीख सकें। इस अवसर पर देश के दस्तकारों की मेहनत को नजदीक से जानने का मौका मिला और आधुनिक दौर में स्वदेशी वस्त्रों के महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
बाड़मेर के बुनकर का लाइव प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान सबसे खास पल तब आया जब बाड़मेर से पहुंचे मंझे हुए बुनकर भुराराम ने मंच पर लाइव चरखा चलाकर दिखाया। उन्होंने कच्चे सूत से मजबूत धागा तैयार करने की पूरी तकनीक को बेहद बारीकी से समझाया। आधुनिक मशीनों की चकाचौंध से दूर युवा विद्यार्थियों के लिए हाथ से धागा बनाने की यह पारंपरिक प्रक्रिया किसी अछूते अनुभव से कम नहीं थी। इस जीवंत प्रदर्शन के जरिए छात्र यह समझ पाए कि एक अदद खादी वस्त्र के पीछे कितनी मेहनत, एकाग्रता और पीढ़ियों का हुनर छिपा होता है।
युवा डिजाइनरों के लिए प्रेरणा
निफ्ट जोधपुर के निदेशक प्रोफेसर जीएचएस प्रसाद ने इस संबंध में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ऐसे रचनात्मक आयोजनों से छात्रों को तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ भी मिलती है। उन्होंने बताया कि जब युवा डिजाइनर धागा बनने से लेकर कपड़ा तैयार होने तक की प्रक्रिया को अपनी आंखों से देखते हैं, तो वे इसके प्राकृतिक गुणों को बेहतर ढंग से पहचान पाते हैं। इस तरह के आयोजनों से फैशन और टेक्सटाइल के छात्र भविष्य के प्रोजेक्ट्स में खादी को नए और आकर्षक रूप में ढालने के लिए प्रेरित होते हैं।
प्रतियोगिताओं और सम्मान का दौर
इस महोत्सव के तहत केवल प्रदर्शन तक ही चीजें सीमित नहीं रहीं, बल्कि स्वदेशी उत्पादों और खादी के प्रचार को लेकर कई रोचक प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया था। इनमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया ताकि उनमें भारतीय पारंपरिक कला के प्रति रुझान बढ़े। इस पूरे आयोजन का अंततः उद्देश्य यही था कि स्थानीय कारीगरों के कौशल को सहेजा जाए और आधुनिक फैशन जगत में खादी को उसकी असली पहचान दिलाई जा सके।























