जयपुर में तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पीएम-सेतु योजना एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकती है। इस महत्वाकांक्षी योजना पर कुल साठ हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रावधान तय किया गया है, जिसके माध्यम से देश के एक हजार सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को पूरी तरह से अपग्रेड किया जाएगा। इस बड़े बदलाव का मुख्य उद्देश्य केवल शिक्षण संस्थानों की इमारतों का रंग-रोगन करना या केवल ढांचागत सुधार करना भर नहीं है, बल्कि उन्हें आज के आधुनिक उद्योगों की बदलती जरूरतों के मुताबिक पूरी तरह तैयार करना है। इस पहल के धरातल पर उतरने से राज्य के युवाओं को अत्याधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण लेने के लिए उन्नत लैब, आधुनिक उपकरण और उद्योग की मांग के अनुकूल प्रशिक्षण सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।
साठ हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट से तैयार होगा आधुनिक नेटवर्क
इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए निर्धारित साठ हजार करोड़ रुपये के वित्तीय ढांचे में अलग-अलग साझेदारों की भूमिका तय की गई है। इसमें केंद्र सरकार की तरफ से तीस हजार करोड़ रुपये, राज्य सरकारों द्वारा बीस हजार करोड़ रुपये और खुद उद्योग जगत की तरफ से दस हजार करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण योगदान दिया जाएगा। इस योजना के दायरे में एक हजार सरकारी आईटीआई को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा, जिन्हें दो श्रेणियों यानी दो सौ हब और आठ सौ स्पोक संस्थानों के रूप में व्यवस्थित किया जाएगा। इस अनोखे ढांचे के माध्यम से मुख्य प्रशिक्षण केंद्रों को अत्याधुनिक सुविधाओं से पूरी तरह लैस किया जाएगा और साथ ही अन्य छोटे संस्थानों को भी उनके साथ जोड़ा जाएगा। इससे तकनीकी संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम होंगे शामिल
पारंपरिक पढ़ाई के दिनों को पीछे छोड़ते हुए इस अपग्रेडेशन के बाद युवाओं को बिल्कुल भविष्य की तकनीकों से जुड़े आधुनिक पाठ्यक्रमों की शिक्षा दी जाएगी। इन नए कोर्सेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी, फाइभ जी नेटवर्क, इलेक्ट्रिक व्हीकल, साइबर सुरक्षा, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी और कंस्ट्रक्शन ऑटोमेशन जैसे कुल बत्तीस से अधिक अत्याधुनिक पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं। इन सभी क्षेत्रों के लिए उन्नत उपकरणों और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग की व्यवस्था करना इस पूरे कौशल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बेहद अहम हिस्सा रहेगा। इससे छात्र केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें वास्तविक तकनीकी कार्यों का जमीनी और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का पूरा अवसर मिल सकेगा।
प्रशिक्षकों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए वैश्विक स्तर का विशेष प्रशिक्षण
केवल छात्रों पर ही नहीं, बल्कि उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों और प्रशिक्षकों की क्षमता को निखारने पर भी इस योजना के तहत विशेष जोर दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत पांच राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों को वैश्विक साझेदारियों के जरिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि प्रशिक्षण की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर लाया जा सके। इसका सीधा फायदा राजस्थान के आईटीआई प्रशिक्षकों को भी मिलेगा, जिन्हें वैश्विक स्तर की आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और नई तकनीकों से सीखने का मौका मिलेगा। जब शिक्षकों की तकनीकी दक्षता में सुधार होगा, तो वे संस्थानों में पढ़ने वाले युवाओं को और भी बेहतर और आधुनिक प्रशिक्षण देने में पूरी तरह सफल हो सकेंगे।
उद्योग जगत की मांग के अनुरूप तैयार होगा कुशल युवा कार्यबल
राजस्थान राज्य में पीएम-सेतु योजना के सफल और प्रभावी क्रियान्वयन से कौशल विकास और औद्योगिक प्रगति के बीच एक मजबूत और जरूरी तालमेल स्थापित होने की पूरी उम्मीद है। आधुनिक और उन्नत सुविधाओं से लैस होने के बाद ये संस्थान उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार बिल्कुल सटीक और कुशल कार्यबल तैयार करने में अधिक सक्षम बन जाएंगे। इससे न सिर्फ स्थानीय उद्योगों को अपनी जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षित कर्मचारी मिल सकेंगे, बल्कि युवाओं की रोजगार पाने की क्षमता में भी जबरदस्त इजाफा होगा। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि यह योजना राजस्थान के तकनीकी शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाकर युवाओं को भविष्य की हर चुनौती के लिए पूरी तरह तैयार करने का काम करेगी।





















