राजस्थान के पाली जिले में स्थित जवाई अपनी अनूठी भौगोलिक बनावट और वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण के लिए दुनिया भर में मशहूर हो चुका है। शरद ऋतु की आहट के साथ ही इस पूरे इलाके का मिजाज अचानक बदल जाता है। अक्टूबर के पहले हफ्ते से लेकर 31 दिसंबर यानी नए साल की पूर्व संध्या तक यहां का सबसे व्यस्त पर्यटन काल माना जाता है। इस दौरान भारत समेत दुनिया भर के उद्योगपति, फिल्म जगत के दिग्गज, राजघराने के सदस्य और साधन संपन्न सैलानी यहां डेरा डालने लगते हैं। नतीजतन, यहां के शीर्ष हॉस्पिटैलिटी रिसॉर्ट्स और ग्लैम्पिंग साइट्स के दाम अप्रत्याशित ऊंचाइयों पर जा पहुंचते हैं, जहां सिर्फ एक रात गुजारने के लिए कई लाख रुपये तक चुकाने पड़ते हैं।
मानव और वन्यजीवों का अनोखा तालमेल
जवाई की सबसे बड़ी खासियत यहां की विशालकाय ग्रेनाइट चट्टानें, प्राकृतिक गुफाएं और उनके आसपास बहती नदी का शांत परिवेश है। इस इलाके में सैलानियों को किसी चिड़ियाघर या चारदीवारी के बिना खुले वातावरण में घूमते हुए तेंदुओं के दीदार होते हैं। यह धरती पर उन चुनिंदा जगहों में से एक है, जहां स्थानीय ग्रामीण और शिकारी जानवर सदियों से बिना किसी टकराव के शांतिपूर्ण तरीके से एक साथ रह रहे हैं। मारवाड़ और बिलावड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, देहाती जीवनशैली और पथरीले टीलों की खूबसूरती इसे वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों और शांति की तलाश करने वाले रईसों के लिए पहली पसंद बना देती है।
सीजन शुरू होते ही आसमान छूती कीमतें
शरद ऋतु का आगमन होते ही जवाई में प्रवास करने के लिए मारामारी शुरू हो जाती है। स्थिति यह बनती है कि बेहतरीन संपत्तियों में कमरे हासिल करने के लिए लोग महीनों पहले ही बुकिंग करवा लेते हैं। इस दौरान मिलने वाली सुविधाएं किसी शाही महल से कम नहीं होतीं। खुले जंगलों और पहाड़ियों के बीच बने इन विला और टेंटों में निजी स्विमिंग पूल, विश्वस्तरीय खानपान और जेडब्लू मैरियट तथा ताज जैसे बड़े ब्रांडों के स्तर का आतिथ्य परोसा जाता है। जिस तरह अक्टूबर से राजस्थान के पर्वतीय स्थल माउंट आबू में पर्यटकों की भीड़ के कारण होटलों के दाम अचानक चढ़ने लगते हैं और क्रिसमस से न्यू ईयर तक चरम पर पहुंचते हैं, ठीक वही आलम जवाई में भी दिखता है, जहां के रिसॉर्ट्स देश के सबसे महंगे हॉलिडे डेस्टिनेशंस को पछाड़ देते हैं।
रिसॉर्ट्स के प्रति रात के भारी भरकम टैरिफ
जवाई के अल्ट्रा-लग्जरी प्रवास विकल्पों की बात करें तो सुजान जवाई का नाम सबसे ऊपर आता है। इस विख्यात कैंप में एक रात ठहरने का शुरुआती किराया 1 लाख 9 हजार रुपये है, जो सुइट और विशेष सुविधाओं के आधार पर 2 लाख 60 हजार रुपये प्रति रात तक पहुंच जाता है। इसी तरह ब्रिज पोला जवाई लग्जरी जंगल कैंप में भी अक्टूबर के आते ही दरों में भारी उछाल दर्ज किया जाता है। व्यक्तिगत पूल और आधुनिक सुविधाओं से लैस इस ठिकाने पर रात बिताने का बेस रेट 1 लाख 9 हजार रुपये तय है, जो आम बजट वाले यात्रियों की पहुंच से काफी बाहर है।
इसके अलावा अन्य बड़े ब्रांड्स भी यहां खासे महंगे साबित होते हैं। स्टोरी बाय आईटीसी होटल्स जवाई में एक रात का खर्च लगभग 94 हजार रुपये बैठता है। वहीं पारंपरिक विरासत और सफारी का मिलाजुला अहसास कराने वाले बिजापुर लॉज जवाई में एक रात का बिल तकरीबन 87 हजार रुपये तक आता है। वालोरा रिट्रीट जवाई में ठहरने के इच्छुक मेहमानों को प्रति रात करीब 70 हजार रुपये वहन करने पड़ते हैं। क्षेत्र के अन्य सामान्य प्रीमियम होटलों में, जहां आम दिनों में 25 हजार रुपये से कमरे मिल जाते हैं, वे भी इस पीक सीजन में कई गुना महंगे हो जाते हैं।
यात्रा की योजना और अग्रिम तैयारी
अगर कोई पर्यटक सर्दियों के इन महीनों में पत्थरों की छांव में तेंदुओं की मौजूदगी और राजसी आतिथ्य का आनंद लेना चाहता है, तो उसे अपनी योजना समय रहते बनानी होगी। साल के इन आखिरी तीन महीनों में सीमित कमरों और बेहद ऊंची मांग के चलते मौके पर बुकिंग मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इसलिए अपनी पसंदीदा जगह पर सुकून से छुट्टियां बिताने के लिए काफी पहले से आरक्षण कराना ही एकमात्र सुरक्षित रास्ता है।






















