राजस्थान के अजमेर जिले में लगने वाले विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेले में इस बार व्यवस्थाओं को बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा बदलाव किया गया है। मेले में आने वाले पशुपालकों को अब मैदान पर लंबी लाइनों में खड़े होने और बार-बार होने वाली घोषणाओं की परेशानी से पूरी तरह मुक्ति मिलेगी। पशुपालन विभाग ने यह तय किया है कि इस बार सभी प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने वाले मवेशियों तथा घोड़ों का पंजीकरण प्रतियोगिता शुरू होने से ठीक दो दिन पहले ही पूरा कर लिया जाएगा। पुष्कर आने वाले पशुपालकों की मदद के लिए विभिन्न प्रवेश मार्गों पर टेंट लगाए जा रहे हैं और विशेष सहायता डेस्क बनाकर प्रशिक्षित टीमों को तैनात किया जा रहा है।
पशुपालन विभाग की ओर से मिलने वाली जानकारी के अनुसार, इस बार मेले में गिर प्रदर्शनी के तहत गायों की विभिन्न उन्नत किस्मों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इनमें मुख्य तौर पर गिर गाय, गिर क्रॉस, जर्सी क्रॉस और एचएफ यानी होलस्टीन फ्रीजियन क्रॉस जैसी नस्लें शामिल की गई हैं। नस्ल सुधार के साथ-साथ दूध देने की क्षमता परखने के लिए विशेष स्पर्धाएं भी कराई जाएंगी, जिनके जरिए सबसे अधिक दूध देने वाली गिर और एचएफ गायों का चयन कर पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। गायों से जुड़ी तमाम प्रतियोगिताओं का आयोजन पशु वेटरनरी अस्पताल के नजदीक तय किए गए स्थान पर संपन्न होगा। इसके अलावा, नए मेला मैदान में तैयार किए जा रहे विशेष डेजर्ट पॉइंट पर घोड़ों की सभी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी, जहां आने वाले पर्यटकों और दर्शकों के बैठने के लिए शानदार दर्शक दीर्घा तैयार की जा रही है।
पिछले साल आयोजित मेलों में घोड़ों की एंट्री बहुत ज्यादा होने और मौके पर ही रजिस्ट्रेशन करने के कारण मूल्यांकन की प्रक्रिया काफी रात तक चलती रही थी। हालात ऐसे बन गए थे कि कृत्रिम लाइटों की रोशनी में देर रात तक विजेताओं का फैसला करना पड़ा था। इस बार इस तरह की परेशानियों से बचने के लिए अश्वपालकों और पशुपालकों के वास्ते नए निर्देश जारी किए गए हैं। पशुपालकों से कहा गया है कि वे पुष्कर पहुंचते ही सहायता डेस्क या चेक पोस्ट टेंटों पर अपनी घोड़ा चिट्ठी और जरूरी विवरण दर्ज कराएं। फॉर्म में यह बात साफ लिखनी होगी कि पशु को केवल बेचने के लिए लाया गया है या वह किसी प्रतियोगिता में भी भाग लेगा।
प्रक्रिया दो दिन पहले पूरी होने से यह फायदा मिलेगा कि मुकाबला शुरू होने से चौबीस घंटे पहले ही आयोजकों के पास हर वर्ग में शामिल जानवरों की पुख्ता सूची आ जाएगी। इससे मैदान में माइक पर नाम पुकारकर पशुपालकों को ढूंढने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। पहले से तैयार की गई सूची के क्रम के अनुसार ही जजिंग का काम आगे बढ़ेगा और पूरी कोशिश रहेगी कि सूरज ढलने से पहले ही सभी स्पर्धाओं के नतीजे घोषित कर दिए जाएं।



















