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राजस्थान के नायला गांव और व्हाइट हाउस के 26 साल पुराने रक्षाबंधन बंधन का अंत, बिल क्लिंटन की भारतीय बहन मोहिनी देवी का निधनराजस्थान
28 अग॰ 2026, 11:12 am (2 घंटे पहले)· 2

राजस्थान के नायला गांव और व्हाइट हाउस के 26 साल पुराने रक्षाबंधन बंधन का अंत, बिल क्लिंटन की भारतीय बहन मोहिनी देवी का निधन

जयपुर के पास नायला गांव की मोहिनी देवी का मार्च 2026 में निधन हो गया। इसके साथ ही पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को पिछले 26 वर्षों से नियमित रूप से राखी भेजने का ऐतिहासिक सिलसिला हमेशा के लिए थम गया।

राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित छोटे से कस्बे नायला और अमेरिकी सत्ता के केंद्र के बीच ढाई दशक से चला आ रहा एक अनूठा रिश्ता अब यादों का हिस्सा बन गया है। गांव की महिलाओं और बुजुर्गों के बीच 'बुआजी' के नाम से मशहूर मोहिनी देवी का मार्च 2026 में निधन हो गया। उनके देहावसान के साथ ही अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन को पिछले 26 वर्षों से नियमित रूप से रक्षासूत्र भेजने की अटूट परंपरा पर हमेशा के लिए विराम लग गया है।

राजनयिक दौरे से हुई अटूट रिश्ते की शुरुआत

नायला गांव और वाशिंगटन के बीच इस दिल छू लेने वाले रिश्ते की शुरुआत मार्च 2000 में हुई थी। तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन अपने भारत दौरे के समय जयपुर के पास स्थित नायला गांव पहुंचे थे। मोहिनी देवी अपने पति के देहांत के बाद अपने मायके नायला में ही जीवन यापन कर रही थीं और पूरा गांव उनका बहुत आदर करता था। विदेशी मेहमान का स्वागत करने के लिए गांव वालों ने सर्वसम्मति से मोहिनी देवी को चुना। उन्होंने भारतीय रीति-रिवाज के अनुसार बिल क्लिंटन की कलाई पर रक्षाबंधन का धागा बांधकर उनका स्वागत किया। इस ऐतिहासिक पल ने कूटनीति के दायरे से परे दो अलग-अलग संस्कृतियों और महाद्वीपों को एक पवित्र भाई-बहन के धागे से जोड़ दिया।

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दूतावास के रास्ते व्हाइट हाउस पहुंचती थी राखी

सालों पहले बना यह पावन रिश्ता महज एक औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मोहिनी देवी ने इसे 26 वर्षों तक पूरी आत्मीयता से निभाया। वे हर साल रक्षाबंधन के अवसर पर बिल क्लिंटन, उनकी पत्नी हिलेरी क्लिंटन और उनके परिवार के लिए अपने हाथों से विशेष राखियां तैयार करती थीं। इन राखियों को नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के माध्यम से वाशिंगटन में व्हाइट हाउस तक सुरक्षित पहुंचाया जाता था। क्लिंटन भी इस रिश्ते की गरिमा को बखूबी समझते थे। वे हर साल उन्हें धन्यवाद पत्र भेजते थे और साथ ही व्हाइट हाउस के खास प्रतीक चिन्ह वाले उपहार जैसे बैग, पेन और बैज मोहिनी देवी के लिए नायला भिजवाते थे।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान और हिलेरी के लिए पूजा

एक साधारण भारतीय ग्रामीण महिला और दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्राध्यक्ष के बीच का यह अनूठा संबंध जल्द ही वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में आ गया। 'न्यूयॉर्क टाइम्स' समेत कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय अखबारों ने इस भावुक कहानी को प्रमुखता से स्थान दिया। इसके बाद जयपुर आने वाले कई अमेरिकी नागरिक, प्रशासनिक अधिकारी और पर्यटक मोहिनी देवी से मिलने उनके घर नायला जाने लगे। मोहिनी देवी का क्लिंटन परिवार के प्रति स्नेह कितना गहरा था, इसका प्रमाण 2016 में देखने को मिला। जब हिलेरी क्लिंटन ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में दावेदारी ठोकी, तो अपनी 'भाभी' की जीत की कामना करते हुए मोहिनी देवी ने गांव के स्थानीय मंदिर में विशेष अनुष्ठान और पूजा-अर्चना करवाई थी।

यादों की कतरनें और व्हाइट हाउस के अनमोल उपहार

समय बीतने के साथ पत्राचार की गति भले ही धीमी हुई, लेकिन अपने अमेरिकी भाई के प्रति मोहिनी देवी के दिल में प्रेम कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने पिछले साल यानी 2025 तक नियमित रूप से क्लिंटन को राखी भेजने का सिलसिला जारी रखा। उनके सबसे बड़े बेटे शंकरलाल गुप्ता बताते हैं कि भले ही मां के दो सगे भाई थे, लेकिन क्लिंटन के लिए उनका स्नेह किसी भी तरह से पारिवारिक भाइयों से कम नहीं था। वे हमेशा इस बात पर गर्व व्यक्त करती थीं कि उनका एक भाई अमेरिका का राष्ट्रपति रहा है। मार्च 2026 में उनके निधन के बाद आज भी उनके घर में रखे व्हाइट हाउस के उपहार और पुराने समाचार पत्रों की कतरनें उस अमर कहानी की गवाही दे रही हैं, जिसने राजस्थान के एक छोटे से गांव को सीधे अमेरिकी नेतृत्व से जोड़ दिया था।

सवाल-जवाब

मोहिनी देवी और बिल क्लिंटन के बीच राखी का रिश्ता कब शुरू हुआ था?
यह रिश्ता मार्च 2000 में शुरू हुआ था जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन जयपुर के नायला गांव के दौरे पर आए थे।
मोहिनी देवी बिल क्लिंटन को राखी कैसे भेजती थीं?
वे हर साल रक्षाबंधन पर विशेष राखियां नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास के माध्यम से वाशिंगटन के व्हाइट हाउस भेजती थीं।
बिल क्लिंटन की तरफ से क्या जवाब या उपहार मिलते थे?
बिल क्लिंटन उन्हें धन्यवाद पत्र भेजते थे और साथ ही व्हाइट हाउस के प्रतीक चिन्ह वाले उपहार जैसे बैग, पेन और बैज भिजवाते थे।
मोहिनी देवी का निधन कब हुआ?
मोहिनी देवी का निधन मार्च 2026 में हुआ, जिसके साथ ही यह 26 साल पुराना परंपरा का सिलसिला थम गया।
2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान मोहिनी देवी ने क्या किया था?
उन्होंने हिलेरी क्लिंटन की जीत के लिए नायला गांव के स्थानीय मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करवाए थे।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

मोहिनी देवी और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के बीच ढाई दशक से अधिक चला यह अनोखा रक्षाबंधन संबंध केवल व्यक्तिगत स्नेह तक सीमित नहीं था, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सांस्कृतिक कूटनीति का एक अनूठा और मानवीय चेहरा प्रस्तुत करता था। एक ग्रामीण महिला द्वारा शुरू की गई यह परंपरा दर्शाती है कि कैसे सादगी और मानवीय भावनाएं भू-राजनीतिक सीमाओं और राजधानियों के बीच की दूरियों को पाट सकती हैं। उनके निधन से कूटनीति के इस अनौपचारिक और भावुक अध्याय का एक ऐतिहासिक युग समाप्त हो गया है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

यह घटना हमें सिखाती है कि जमीनी स्तर पर जन-संपर्क किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय संबंधों की औपचारिक दीवारों को भेदकर अमिट छाप छोड़ सकता है। हालांकि अब यह परंपरा थम चुकी है, लेकिन यह मामला इस बात का जीवंत उदाहरण है कि कैसे ग्रामीण भारत की सांस्कृतिक पहचान वैश्विक मंचों पर स्थायी जन-कूटनीति की नींव बन सकती है। भविष्य में इस तरह के अनूठे मानवीय सेतुओं का दस्तावेजीकरण और संरक्षण बेहद जरूरी होगा ताकि कूटनीति के इतिहास में ऐसे अध्याय जीवित रहें।

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