राजस्थान के पाली जिले में स्थित जवाई इलाका दुनिया भर में अपनी अनूठी लेपर्ड सफारी और प्राकृतिक छटा के लिए अपनी एक अलग पहचान रखता है। वन्यजीव प्रेमियों के बीच इसे मिनी अफ्रीका के नाम से भी जाना जाता है, जहां तेंदुए और इंसानों का आपसी मेलजोल दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। इस खूबसूरत जगह का दीदार करने के लिए आम सैलानियों के अलावा देश-विदेश के बड़े उद्योगपति, फिल्मी सितारे और वीआईपी मेहमान भी लगातार पहुंचते हैं। बांध की कच्ची पाल पर खड़े होकर अरावली की पहाड़ियों के बीच डूबते सूरज का नजारा देखना हर सैलानी के सफर का मुख्य आकर्षण होता है।
पर्यटन सीजन की आहट के बीच बदहाल रास्ते
अक्टूबर का महीना आते ही इस क्षेत्र में पर्यटन का सबसे व्यस्त और मुख्य सीजन पूरी तरह गुलजार होने वाला है। आने वाले हफ्तों में रोजाना हजारों की तादाद में घरेलू और विदेशी पर्यटकों के यहां आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। स्थिति यह है कि स्थानीय होटलों, रिसॉर्ट्स और सफारी गाड़ियों की बुकिंग पहले ही पूरी तरह फुल हो चुकी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि क्या दूर-दूर से आने वाले इन मेहमानों का स्वागत जवाई बांध की कच्ची पाल पर फैली कटीली झाड़ियों और टूटे रास्तों से किया जाएगा।
कच्ची पाल पर हादसों का मंडराता खतरा
जवाई बांध की यह कच्ची पाल पहले से ही काफी तंग है और उस पर दोनों किनारों पर उगी बबूल की घनी झाड़ियों ने इसे और भी खतरनाक बना दिया है। संकरे मोड़ों पर विपरीत दिशाओं से आने वाले वाहन बिल्कुल नजर नहीं आते हैं, जिससे चालकों को भारी परेशानी होती है। इन नुकीले कांटों से बचने की कोशिश में कई बार गाड़ियां बांध के ढलान या नीचे की तरफ फिसलने का खतरा पैदा हो जाता है। सबसे गंभीर जोखिम खुली सफारी जीपों में सफर कर रहे पर्यटकों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर रहता है, क्योंकि रास्ते में फैली कटीली टहनियां सीधे उनके चेहरे और आंखों पर लग सकती हैं, जिससे कपड़े फटने और गाड़ियों पर खरोंच आने की घटनाएं आम हो चुकी हैं।
प्रशासनिक लापरवाही पर उठते गंभीर सवाल
जल संसाधन विभाग और पाली जिले के प्रशासन की इस गंभीर अनदेखी ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसा लगता है कि जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे के होने का इंतजार कर रहे हैं, तभी वे झाड़ियों की कटाई और रास्ते की मरम्मत के प्रति पूरी तरह उदासीन बने हुए हैं। यदि पर्यटन सत्र की शुरुआत से पहले इस मार्ग को दुरुस्त नहीं किया गया, तो सैलानियों को निराशा हाथ लगेगी। इस तरह की व्यवस्थाओं से देश-विदेश में राजस्थान के पर्यटन की छवि को भी भारी नुकसान पहुंच सकता है।


















