राजस्थान में चल रहे नगर निकाय चुनाव 2026 के बीच भारतीय जनता पार्टी द्वारा मुस्लिम चेहरों को टिकट दिए जाने का मामला काफी सुर्खियों में आ गया है। आम तौर पर लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारने से परहेज करने वाली पार्टी ने इस बार स्थानीय निकाय चुनावों में अल्पसंख्यक समुदाय तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश की है। जयपुर नगर निगम चुनाव के तहत पार्टी ने अल्पसंख्यक समुदाय के कुल आठ लोगों को पार्षद पद का टिकट सौंपा है। शहर के अंदरुनी हिस्सों के कई ऐसे वार्ड हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की तादाद और उनकी भूमिका काफी असरदार मानी जाती है। ऐसे में बीजेपी के इस रणनीतिक कदम को लेकर राजनीतिक गलियारों में यह बहस छिड़ गई है कि यह महज एक इत्तेफाक है या फिर पार्टी की सोची-समझी और गहरी रणनीति का हिस्सा है।
जयपुर नगर निगम में सीटों का गणित और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
जयपुर नगर निगम में कुल 150 सीटें हैं और पार्टी ने इनमें से आठ सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को चुनावी रण में उतारा है। पार्टी के भीतर सक्रिय मुस्लिम कार्यकर्ताओं के बीच इस फैसले से काफी उत्साह देखा जा रहा है। लंबे अर्से से बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चे से जुड़े कार्यकर्ता लगातार टिकटों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग उठाते रहे हैं। अब स्थानीय निकाय चुनावों में मिले इन टिकटों को वे पार्टी द्वारा मुस्लिम आबादी के बीच अपनी पैठ और जनाधार बढ़ाने के एक बड़े प्रयास के रूप में देख रहे हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे ज़मीनी स्तर पर पार्टी की छवि में सकारात्मक बदलाव आएगा और स्थानीय चुनावों में इसका लाभ मिल सकेगा।
परकोटे के इलाके से फखरुद्दीन जैकी ने दाखिल किया नामांकन
जयपुर के ऐतिहासिक परकोटा इलाके के एक वार्ड से बीजेपी के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल करने वाले फखरुद्दीन जैकी इस फैसले से खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं। जैकी काफी लंबे समय से पार्टी संगठन के साथ मिलकर पूरी निष्ठा से काम करते आ रहे हैं, लेकिन उन्हें खुद भी इस बात की ज्यादा उम्मीद नहीं थी कि पार्टी उन पर भरोसा जताएगी। जब संगठन ने उन्हें अपना प्रत्याशी घोषित किया तो उन्होंने इसे अपने ऊपर जताए गए पार्टी के भरोसे की बड़ी मिसाल माना। फखरुद्दीन जैकी का कहना है कि पार्टी ने पहली बार मुस्लिम समुदाय के लोगों पर सीधा विश्वास जताते हुए पार्षद का टिकट दिया है। अब उनकी मुख्य कोशिश यही रहेगी कि वह पार्टी की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे उतरें और इस चुनावी मुकाबले में जीत का परचम लहराएं।
हवा महल विधानसभा क्षेत्र पर विशेष राजनीतिक नजर
जयपुर में बीजेपी की तरफ से जिन-जिन मुस्लिम चेहरों को मैदान में उतारा गया है, उनमें सबसे ज्यादा टिकट हवा महल विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले वार्डों से दिए गए हैं। हवा महल सीट से बीजेपी के फायरब्रांड हिंदुवादी नेता बालमुकुंद आचार्य विधायक के रूप में कार्यरत हैं। इसी इलाके के कई वार्ड ऐसे हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की भारी संख्या चुनावी नतीजों का रुख पूरी तरह से बदल सकती है। यही वजह है कि यहां मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने का मामला विशेष रूप से चर्चा का विषय बना हुआ है। बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चे से जुड़े नेता सादिक खान का इस बारे में कहना है कि मुस्लिम कार्यकर्ताओं को एक लंबे अरसे के बाद उनकी उम्मीदों से बढ़कर टिकट मिले हैं। पार्टी के अंदरूनी हलकों में इसे मुस्लिम आबादी के बीच पार्टी का आधार मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
पूरे राजस्थान में मुस्लिम भागीदारी का बढ़ता दायरा
यह राजनीतिक तस्वीर केवल जयपुर शहर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा पूरे राज्य में फैला हुआ है। राजस्थान में इस बार कुल 309 स्थानीय निकायों के लिए चुनाव हो रहे हैं और बीजेपी की तरफ से मुस्लिम समुदाय को टिकट दिए जाने की भागीदारी भी अच्छी खासी संख्या में सामने आ रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि राजस्थान के कई बड़े और छोटे शहरों में मुस्लिम मतदाता चुनावी परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित करने की मजबूत स्थिति में हैं। राज्य की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी बताई जाती है। वहीं जयपुर और जोधपुर समेत कई अन्य प्रमुख शहरों में मुस्लिम बहुल वार्डों की संख्या काफी ज्यादा है। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका के इन चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए इन वार्डों के समर्थन की दरकार बेहद अहम हो जाती है।
कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया और आरोपों का दौर
बीजेपी के इस नए राजनीतिक दांव को लेकर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने तीखे सवाल खड़े किए हैं और तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रताप सिंह खाचरियावास ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी मुस्लिम समुदाय को लेकर दोहरी और अवसरवादी नीति अपना रही है और वह सिर्फ चुनाव जीतने के स्वार्थ के लिए इस समुदाय का इस्तेमाल कर रही है। खाचरियावास ने तर्क दिया कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान बीजेपी ने एक भी मुस्लिम व्यक्ति को टिकट देना मुनासिब नहीं समझा और इससे इस पूरे समुदाय का स्पष्ट अपमान हुआ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी के प्रमुख नेताओं की ओर से लगातार सांप्रदायिक बयानबाजी की जाती रही है, लेकिन अब जब नगर निकाय चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं की राजनीतिक ताकत साफ नजर आ रही है तब उन्हें टिकट बांटे जा रहे हैं। कांग्रेस नेता ने बीजेपी के इस कदम को पूरी तरह से एक दिखावा करार दिया है। उनके मुताबिक अब बीजेपी को यह बात अच्छी तरह समझ आ चुकी है कि केवल हिंदू-मुस्लिम के नाम पर ज्यादा लंबे वक्त तक राजनीति नहीं की जा सकती है।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान से जुड़ी चर्चाएं
बीजेपी द्वारा मुस्लिम चेहरों को टिकट दिए जाने के इस पूरे फैसले की चर्चा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया दिए गए एक चर्चित बयान के साथ भी जोड़कर देखी जा रही है। प्राप्त जानकारियों के मुताबिक न्यूयॉर्क में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि हिंदुस्तान में एक भी मुस्लिम न रहने की बात करने वाला कभी सच्चा हिंदू नहीं हो सकता। इसी वैचारिक बयान के ठीक दो दिन बाद जयपुर में मुस्लिम समुदाय के आठ लोगों को बीजेपी की तरफ से नगर निगम चुनाव में टिकट मिलने की घोषणा होने से इस पूरे राजनीतिक मुद्दे पर चर्चाएं और अधिक तेज हो गई हैं। हालांकि बीजेपी संगठन की तरफ से टिकट वितरण के इस फैसले को लेकर जमीनी समीकरणों और स्थानीय विकास की जरूरतों का हवाला दिया जा रहा है।



















