राजस्थान के सीकर जिले में नीमकाथाना इलाके के आगरी क्षेत्र स्थित ढाणी डूंगरी वाली में एक ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में 75 वर्षीय बुजुर्ग पाबूदान का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था और परिवारजन उनके अंतिम संस्कार की तैयारियों में व्यस्त थे। रिश्तेदार और ग्रामीण शोक जताने घर पहुंच ही रहे थे कि करीब एक घंटे बाद आई एक अन्य मनहूस खबर ने पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया। परिवार के 18 वर्षीय पोते महेंद्र सिंह की गणेश्वर स्थित गालव गंगा तीर्थ धाम के कुंड में डूबने से जान चली गई।
एक साथ उठीं दादा और पोते की अर्थियां
कुछ ही घंटों के अंतराल पर एक ही छत के नीचे परिवार की दो पीढ़ियों का साया उठ जाने से पूरे इलाके में गहरा शोक फैल गया। दोपहर के समय जब एक साथ 75 वर्षीय दादा पाबूदान और 18 वर्षीय पोते महेंद्र की अंतिम यात्रा निकली, तो वहां मौजूद हर ग्रामीण और रिश्तेदार की आंखें भर आईं। दोनों का अंतिम संस्कार एक ही स्थान पर एक साथ संपन्न किया गया।
स्कूल छोड़कर लौटते समय हुआ हादसा
आगरी क्षेत्र की ढाणी डूंगरी वाली निवासी गोकुल सिंह का 18 वर्षीय पुत्र महेंद्र सिंह सुबह करीब 6.30 बजे अपनी मोटरसाइकिल से अपने ताऊ के बेटे को स्कूल छोड़ने के लिए घर से निकला था। बच्चे को स्कूल छोड़ने के बाद वह लौटते समय करीब 8 बजे गणेश्वर स्थित गालव गंगा तीर्थ धाम के कुंड पर रुक गया। वहां वह कुंड की सीढ़ियों पर बैठकर स्नान कर रहा था, तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में समा गया। घटना के वक्त कुंड पर कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था।
अस्पताल में चिकित्सकों ने मृत घोषित किया
सुबह करीब 8.30 बजे जब कुछ स्थानीय युवक कुंड के पास पहुंचे, तो उन्हें पानी की गहराई में महेंद्र दिखाई दिया। युवकों ने तुरंत पानी में उतरकर उसे बाहर निकाला और उसके परिजनों को घटना की सूचना दी। मौके पर निजी डॉक्टरों को बुलाकर युवक को सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की गई, लेकिन गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे फौरन नीमकाथाना जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने जांच के उपरांत महेंद्र को मृत घोषित कर दिया।
आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था छात्र
महेंद्र सिंह नीमकाथाना से कोचिंग लेकर आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ था। उसके पिता गोकुल सिंह खेती-किसानी करते हैं। परिवार को उम्मीद थी कि होनहार बेटा इंजीनियर बनकर घर की जिम्मेदारियां संभालेगा और परिवार का नाम रोशन करेगा। हादसे के बाद मां दातार कंवर और पिता गोकुल सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ ही पलों में बुजुर्ग दादा और जवान बेटे को खोने का यह दर्दनाक मंजर परिवार के लिए कभी न भूलने वाला सदमा बन गया है।
गालव कुंड की सुरक्षा पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
इस हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने गालव गंगा तीर्थ के कुंड की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कड़ा आक्रोश जताया है। ग्रामीणों की मांग है कि कुंड की अत्यधिक गहराई को कम किया जाए और वहां जाली या सुरक्षा घेरा बनाकर पुख्ता इंतजाम किए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि बीते करीब 15 वर्षों के दौरान इस कुंड में डूबने से बच्चों, कांवड़ियों, श्रद्धालुओं और बारातियों समेत करीब 26 लोगों की अकाल मौत हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रत्येक हादसे के बाद सिर्फ चर्चाएं होती हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं।



















