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राजस्थान में फिर सक्रिय होगा मानसून, 12 सितंबर से राजधानी सहित कई इलाकों में तेज हवाओं और बौछारों के आसारराजस्थान
9 सित॰ 2026, 5:20 am (1 घंटे पहले)· 3

राजस्थान में फिर सक्रिय होगा मानसून, 12 सितंबर से राजधानी सहित कई इलाकों में तेज हवाओं और बौछारों के आसार

बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए कम दबाव के क्षेत्र के कारण राजस्थान में मौसम का मिजाज बदलने वाला है। 12 सितंबर से जयपुर, कोटा और उदयपुर सहित पूर्वी व पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गर्जन की संभावना है।

राजस्थान में सुस्त पड़े मानसून के बीच मौसम विभाग ने राहत की खबर दी है। पिछले कुछ दिनों से जारी शुष्क मौसम और तापमान में मामूली बढ़ोतरी के बाद अब राज्य में बारिश की गतिविधियां एक बार फिर जोर पकड़ने वाली हैं। बंगाल की खाड़ी के पास बनने वाले एक नए मौसमी तंत्र के प्रभाव से प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के मौसम में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। 12 सितंबर से राज्य के एक बड़े हिस्से में मेघगर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ बौछारें पड़ने का नया दौर शुरू होने की पूरी संभावना जताई गई है।

पूर्वी राजस्थान में बारिश की वापसी और नया कम दबाव का क्षेत्र

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 11 सितंबर को बंगाल की खाड़ी से सटे उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी उड़ीसा तट के आसपास एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने के प्रबल आसार हैं। इस नए तंत्र का सीधा असर भारत के मैदानी इलाकों के साथ-साथ राजस्थान के मौसम पर भी पड़ेगा। इससे पहले उत्तर प्रदेश के ऊपर सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र अब पूरी तरह से कमजोर पड़ चुका है और मानसून की ट्रफ रेखा अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर दिशा की ओर खिसक गई है। फिलहाल राज्य के ज्यादातर इलाकों में पश्चिमी हवाएं चल रही हैं, लेकिन 11 सितंबर से पूर्वी राजस्थान के जिलों में बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे बढ़ने लगेंगी।

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जयपुर, दौसा और करौली में अलर्ट तथा तापमान का अनुमान

राजधानी जयपुर और इसके आसपास स्थित दौसा तथा करौली जिलों के लिए मौसम विभाग ने 11 और 12 सितंबर के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। जयपुर में आने वाले 24 घंटों के भीतर बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और मौसम में आंशिक परिवर्तन देखा जाएगा। 12 सितंबर से शहर में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम श्रेणी की वर्षा हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज झोंकेदार हवाएं चलने की आशंका है। वर्षा और हवाओं के प्रभाव से अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे पिछले कुछ समय से परेशान कर रही उमस और गर्मी से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

कोटा और उदयपुर संभाग के जिलों में येलो अलर्ट

हाड़ौती और मेवाड़ क्षेत्र में भी बारिश का असर साफ दिखाई देगा। कोटा, झालावाड़, बूंदी और बारां जिलों में 11 सितंबर से ही आसमान में बिजली चमकने और बादलों की गर्जना की चेतावनी दी गई है। 12 सितंबर को कोटा तथा उदयपुर संभाग के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए सावधान रहने की हिदायत दी है। इन जिलों में वर्षा के समय 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने और वज्रपात होने का जोखिम बना रहेगा।

बीकानेर और जोधपुर समेत पश्चिमी जिलों का हाल

थार के मरुस्थलीय इलाकों यानी पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में 11 सितंबर तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क और साफ बना रहेगा। हालांकि 12 सितंबर से हवा के रुख में बदलाव के साथ बीकानेर और जोधपुर संभाग में कहीं-कहीं बादलों की गड़गड़ाहट के साथ हल्की वर्षा की परिस्थितियां बन सकती हैं। इस दौरान दिन के समय हल्की उमस का अहसास होगा और तापमान में मामूली उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन 12 सितंबर के बाद पश्चिमी इलाकों में भी बारिश से राहत मिलने के संकेत हैं।

सवाल-जवाब

राजस्थान में बारिश का नया दौर कब से शुरू हो रहा है?
मौसम विभाग के अनुसार 12 सितंबर से राज्य के कई जिलों में बारिश का नया दौर शुरू होने की पूरी संभावना है।
जयपुर में 12 सितंबर को मौसम कैसा रहेगा?
जयपुर में 12 सितंबर से गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने और 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।
किन संभागों में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है?
मौसम विभाग ने कोटा और उदयपुर संभाग के जिलों के लिए बिजली चमकने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी के साथ येलो अलर्ट जारी किया है।
पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर में कब बारिश होगी?
बीकानेर और जोधपुर संभाग में 11 सितंबर तक मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहेगा, जिसके बाद 12 सितंबर से हल्की बारिश की संभावना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

मौसम का यह बदलाव केवल राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि जलभराव, वज्रपात और तेज हवाओं से जनजीवन व सार्वजनिक सुरक्षा पर भी सीधा असर डालेगा। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को संभावित हादसों से निपटने के लिए संवेदनशील इलाकों में अभी से सतर्कता बढ़ानी होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

मानसून के इस नए तंत्र से भले ही गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन मौसम विभाग की चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं और वज्रपात के खतरे के बीच जिला प्रशासन व आपदा प्रबंधन को पूरी तरह मुस्तैद रहना होगा, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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