राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने टोंक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर किसी कक्षा का विद्यार्थी 80 में से 40 अंक तक नहीं पहुंच पाता, तो उस कक्षा के शिक्षक को जवाब देना होगा। ऐसे शिक्षक की सालाना सैलरी बढ़ोतरी यानी इन्क्रीमेंट रोकी जा सकती है। इसके अलावा उसे किसी दूरदराज क्षेत्र में तबादले का सामना भी करना पड़ सकता है। हालांकि दिलावर ने यह भी कहा कि सरकार का मकसद शिक्षकों को दबाव में रखना नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का वास्तविक स्तर सुधारना है।
केवल पास-फेल नहीं, असली सीख की होगी परख
दिलावर ने कहा कि बरसों से परीक्षा परिणाम का प्रतिशत ही सफलता का पैमाना मानी जाती रही है, जबकि पढ़ाई की असली गुणवत्ता पर किसी का ध्यान नहीं गया। उन्होंने एक खास उदाहरण दिया। 80 में से महज 13 अंक पाने वाले विद्यार्थी को भी पास बता दिया जाता है और कुछ शिक्षक 100 प्रतिशत रिजल्ट का दावा ठोककर गर्व से इसे अपनी उपलब्धि बताते हैं। लेकिन 13 अंक लाने वाला बच्चा सीखने के मामले में बेहद कमजोर होता है। मंत्री ने कहा कि अब केवल आंकड़ों की जगह विद्यार्थियों के वास्तविक प्रदर्शन और उनके ज्ञान के स्तर पर ध्यान देना जरूरी हो गया है।
शिक्षकों की नाराजगी पर दिलावर का खुलासा
मदन दिलावर ने माना कि उनके कई फैसलों से सरकारी शिक्षक नाखुश हैं। उन्होंने कहा, "शिक्षक सोचते हैं कि मैं हर दिन कोई नया नियम लेकर आ जाता हूं। कभी स्कूल में मोबाइल पर रोक लगाई, कभी विद्यार्थियों के न्यूनतम अंक तय किए और कभी शराब या गुटखा खाकर स्कूल आने वालों की सूची बनवाने के निर्देश दिए।" उन्होंने साफ कहा कि ये सभी कदम शिक्षा तंत्र को सुधारने की मंशा से उठाए गए हैं और आगे भी जब जरूरत पड़ेगी, विद्यार्थियों के भले के लिए जरूरी निर्णय लिए जाते रहेंगे।
तीन साल में 14वें से चौथे पायदान पर पहुंचा राजस्थान
दिलावर ने बताया कि पिछले तीन साल में राजस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई है। राज्य की शिक्षा रैंकिंग जो कभी देश में 14वें नंबर पर थी, वह अब सुधरकर चौथे स्थान पर आ गई है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव सरकार की शिक्षा सुधार नीतियों और शिक्षकों की लगन की वजह से आया है।
मेरिट सूची में सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को दी टक्कर
मंत्री दिलावर ने दावा किया कि पहली बार राजस्थान के सरकारी स्कूलों के बच्चे मेरिट सूची में जगह बनाने में कामयाब हुए हैं। उन्होंने कहा कि लाखों रुपये फीस वसूलने वाले कई नामी निजी स्कूल भी अब सरकारी स्कूलों से पीछे रह गए हैं। उनका कहना था कि वह दौर समाप्त हो गया जब माना जाता था कि निजी स्कूल ही बढ़िया पढ़ाई का एकमात्र जरिया हैं। आज सरकारी स्कूल भी पूरी तरह सक्षम हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बच्चों को अच्छी पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा भी मिले। दिलावर ने कहा कि वह इस सुधार की पूरी जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं।













