भादवा महीने की शुरुआत के साथ ही राजस्थान में लोकदेवता बाबा रामदेव के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति का दौर शुरू हो जाता है। इस दौरान देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु जैसलमेर के प्रसिद्ध रामदेवरा धाम में मत्था टेकने के लिए लंबी यात्रा तय करके पहुंचते हैं। हालांकि, व्यस्तता या अन्य कारणों से जो लोग जैसलमेर की इतनी लंबी दूरी तय नहीं कर पाते हैं, उनके लिए आस्था का एक नजदीकी और बेहद महत्वपूर्ण केंद्र मौजूद है। अजमेर जिले से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खुंडियास गांव में ऐसा ही पवित्र धाम बना हुआ है, जिसे पूरे क्षेत्र में मिनी रामदेवरा के नाम से जाना जाता है।
आस्था का केंद्र है आश्वासन मूर्ति
इस ऐतिहासिक मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित बाबा रामदेव की आश्वासन मूर्ति है। यह विशेष प्रतिमा श्रद्धालुओं के मन में अटूट विश्वास और भक्तिभाव जगाती है। यहां आने वाले भक्त अपनी तमाम मनोकामनाओं और मन्नतों को लेकर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। मंदिर परिसर का शांत और आध्यात्मिक वातावरण आगंतुकों को मानसिक शांति के साथ-साथ लोकदेवता का विशेष आशीर्वाद भी प्रदान करता है, जिससे उनकी सभी चिंताएं दूर हो जाती हैं।
भक्त भोजराज गुर्जर से जुड़ा है इतिहास
मंदिर के पुजारियों के अनुसार, इस स्थान के प्राकट्य और स्थापना के पीछे एक बहुत पुरानी और दिलचस्प कथा जुड़ी हुई है। बूंदी क्षेत्र के देवपुरा गांव के रहने वाले भोजराज गुर्जर लोकदेवता बाबा रामदेव के परम भक्त हुआ करते थे। उनकी बाबा में इतनी अगाध श्रद्धा थी कि वे हर साल बूंदी से जैसलमेर स्थित रामदेवरा तक की पूरी यात्रा दंडवत प्रणाम करते हुए तय करते थे। उनकी यह कठिन साधना और अटूट भक्ति कई वर्षों तक लगातार चलती रही।
भक्त भोजराज की इस सच्ची निष्ठा और समर्पण से प्रसन्न होकर अंततः बाबा रामदेव ने उन्हें इसी खुंडियास नामक स्थान पर अपने दर्शन दिए थे। इस दिव्य अनुभव के बाद भक्त भोजराज ने अन्य श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के सहयोग से इसी पावन भूमि पर इस भव्य मंदिर का निर्माण कार्य करवाया था, जो आज के समय में लाखों आस्थावानों की अटूट श्रद्धा का बड़ा ठिकाना बन चुका है।
विशेष महत्व रखती है यहां की मिट्टी
इस मंदिर की परंपराओं में यहां की स्थानीय मिट्टी का बहुत ऊंचा स्थान माना गया है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि परिसर की मिट्टी को आम मिट्टी न समझकर साक्षात प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। भक्त इस मिट्टी को बड़े आदर के साथ खाते हैं और अपने शरीर पर भी लगाते हैं। लोगों का यह दृढ़ विश्वास है कि इस धाम में सच्चे हृदय और पवित्र मन से की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती है और भक्तों को जीवन के तमाम दुखों तथा परेशानियों से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है।
इस प्रकार पहुंच सकते हैं इस धाम तक
यदि आप भी इस मिनी रामदेवरा के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो यहां पहुंचना बेहद सुगम है। यह प्रसिद्ध धाम अजमेर शहर से सड़क मार्ग के जरिए लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर अजमेर और नागौर की सीमा के पास स्थित है। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार निजी वाहनों, टैक्सियों या फिर स्थानीय सार्वजनिक परिवहन के साधनों का उपयोग करके आसानी से इस स्थान पर पहुंच सकते हैं और बाबा रामदेव के दर्शन का लाभ उठा सकते हैं।



















