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राजस्थान के राजसमंद में बसा 800 साल पुराना सीम माता मंदिर, मुगलकालीन इतिहास और सुनहरी पहाड़ी का है रहस्यराजस्थान
20 अक्तू॰ 2026, 11:34 am (1 घंटे पहले)· 3

राजस्थान के राजसमंद में बसा 800 साल पुराना सीम माता मंदिर, मुगलकालीन इतिहास और सुनहरी पहाड़ी का है रहस्य

राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित सीम माता का मंदिर लगभग 800 हजार साल पुराना ऐतिहासिक स्थल है, जो अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति और मुगलकाल से जुड़ी वीर गाथाओं के लिए जाना जाता है।

राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित अरावली की पहाड़ियों की गोद में बसा सीम माता का मंदिर अपनी प्राचीनता और अद्भुत मान्यताओं के कारण देश भर के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। देवगढ़ और आमेट की सीमा पर लगभग 1000 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस धार्मिक स्थल को मेवाड़ क्षेत्र की प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इस पवित्र स्थान का नाम पांच अलग-अलग गांवों की सीमाओं पर स्थित होने के कारण सीम माता पड़ा है। यहां आने वाले भक्तों को माता के दर्शन के लिए कुल सात मुश्किल पहाड़ियों को पार करना पड़ता है, जो उनकी अटूट श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है।

मुगलकाल के संघर्षों और चमत्कारों का इतिहास

इस मंदिर का इतिहास मुगलकाल के उस दौर से जुड़ा है जब रियासतों और राजाओं पर लगातार हमले हो रहे थे। इतिहास और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, कमेरी गांव के ठाकुर प्रताप सिंह चुण्डावत को माता ने अपने दर्शन दिए थे और संकट के समय उनकी रक्षा की थी। युद्ध के उस कालखंड में माता की ओर से ठाकुरों को प्रदान की गई तलवार आज भी मंदिर के भीतर सुरक्षित रखी हुई है, जो इस स्थान के गौरवशाली अतीत को दर्शाती है। उस समय के दौर में ठाकुर परिवारों ने सीम माता की पूजा-अर्चना करके अपनी रियासतों की रक्षा की थी।

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साल में एक दिन सोने की तरह चमकती है पहाड़ी

इस पावन धाम से जुड़ी कई ऐसी रहस्यमयी बातें हैं जो लोगों को हैरान करती हैं। पूरे साल में एक ऐसा दिन भी आता है जब सूर्य की रोशनी पड़ने पर यह पूरी पहाड़ी सोने की तरह सुनहरे रंग में चमकने लगती है। इस दुर्लभ और अद्भुत प्राकृतिक नजारे को देखने के लिए दूर-दराज से लोग यहां पहुंचते हैं। इसके अलावा, मंदिर के पुजारी भगवान लाल गुर्जर का परिवार पीढ़ियों से इस धाम की सेवा कर रहा है। उनकी दसवीं पीढ़ी वर्तमान में माता की पूजा-अर्चना और देखरेख की परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रही है।

अटूट आस्था और नवरात्र पर उमड़ती भीड़

अरावली की वादियों के बीच स्थित इस मंदिर में आज भी हजारों की संख्या में भक्त कठिन रास्तों और सात पहाड़ियों को पार करके पहुंचते हैं। नवरात्र के दिनों और अन्य विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। लोग माता के दरबार में माथा टेककर अपने परिवार के लिए सुख और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। यह स्थान धार्मिक महत्व के साथ-साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में मेवाड़ की पहचान को मजबूत करता है, जिसे स्थानीय लोग पूरी शिद्दत से सहेज रहे हैं।

सवाल-जवाब

सीम माता का मंदिर कहां स्थित है?
सीम माता का मंदिर राजस्थान के राजसमंद जिले में देवगढ़ और आमेट की सीमा पर अरावली की पहाड़ियों पर स्थित है।
इस मंदिर का नाम सीम माता क्यों पड़ा?
यह मंदिर पांच गांवों की सीमाओं पर स्थित है, जिसके कारण इस देवी का नाम सीम माता पड़ा।
मंदिर तक पहुंचने के लिए कितनी पहाड़ियों को पार करना पड़ता है?
इस पवित्र धाम तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कुल सात कठिन पहाड़ियों को पार करना पड़ता है।
सीम माता मंदिर का इतिहास किस काल से जुड़ा है?
इस मंदिर का इतिहास मुगलकाल से जुड़ा है जब रियासतों पर आक्रमण के दौरान कमेरी गांव के ठाकुर प्रताप सिंह चुण्डावत को माता के दर्शन हुए थे।
मंदिर की पहाड़ी से जुड़ी कौन सी अनोखी घटना प्रसिद्ध है?
साल में एक ऐसा दिन आता है जब सूर्य की रोशनी में यह पूरी पहाड़ी सोने जैसे सुनहरे रंग की दिखाई देती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·1 मिनट पहले

राजसमंद की इन पहाड़ियों का मुगलकाल वाला इतिहास और वो सोने की तरह चमकने वाली बात वाकई किसी पीरियड फिल्म के क्लाइमेक्स जैसी लगती है। अरावली की लोकेशन किसी भव्य ऐतिहासिक सेट से कम नहीं है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·25 मिनट पहले

सात पहाड़ियों को पार करके मंदिर जाना सच में किसी ट्रेक से कम नहीं होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·25 मिनट पहले

अर्जुन जी, ट्रेक तो ठीक है पर सात पहाड़ियों वाला सच थोड़ा बढ़ा-चढ़ाकर लगता है।

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

राजस्थान की पहाड़ियों में छिपे ऐसे इतिहास और मान्यताओं के बारे में पढ़कर अच्छा लगा। सात पहाड़ियों को पार करके माता के दर्शन करने जाना वाकई बहुत कठिन और सच्ची आस्था का काम है, और वो सोने की तरह चमकने वाला रहस्य तो गजब का है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·46 मिनट पहले

रोहन भाई, इतिहास और आस्था अपनी जगह है, पर साल में एक दिन पहाड़ी का सोने की तरह चमकना थोड़ा बढ़ा-चढ़ाकर नहीं लगता?

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