राजस्थान के अलवर जिले के अंतर्गत आने वाले सीकरी थाना क्षेत्र के झंझार गांव में भूमि के स्वामित्व को लेकर एक ही परिवार के दो धड़ों के बीच खूनी संघर्ष का मामला सामने आया है। विजयादशमी के पावन पर्व पर हुई इस हिंसक झड़प में दोनों तरफ से लाठियों और फरसियों का इस्तेमाल किया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल पांच लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। घायलों में एक पक्ष से दो और दूसरे पक्ष से तीन लोग शामिल हैं, जिन्हें तुरंत चिकित्सीय सहायता के लिए अलवर के राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय में दाखिल कराया गया।
गंभीर रूप से घायल हुए लोग
इस खूनी संघर्ष के दौरान सत्तर वर्षीय जीवनलाल के पैर पर फरसी से एक अत्यंत गंभीर प्रहार किया गया, जिससे उनका पैर लगभग कटकर अलग होने की स्थिति में आ गया है। इसके अलावा, पूनम नामक महिला भी इस झड़प में बुरी तरह घायल हुई हैं। भूमि के मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्षों के बीच काफी समय से रंजिश चली आ रही थी, जिसके कारण यह खूनी संघर्ष हुआ। हालांकि, इस पूरे विवाद की असली जड़ और मारपीट के दौरान घटी घटनाओं का वास्तविक घटनाक्रम पुलिस की विस्तृत जांच के पूरा होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगा।
आपसी हमलों की पूरी पृष्ठभूमि
घायल पक्ष के राजेंद्र ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि भूमि के बंटवारे या हक को लेकर परिवार के दूसरे लोगों के साथ उनका पुराना विवाद चल रहा था। इसी रंजिश के चलते दूसरे पक्ष के लोगों ने अचानक उन पर हमला बोल दिया। राजेंद्र के अनुसार, रोहतास, विजेंद्र, राकेश, मानसिंह, जगदीश और मंगल समेत कई अन्य लोग एकजुट होकर आए और उनके पास लाठियां व फरसियां थीं। इस अचानक हुए हमले में जीवनलाल और पूनम गंभीर रूप से आहत हुए, जिनमें जीवनलाल के पैर पर फरसी के वार से गहरा घाव बन गया। दूसरी तरफ के लोगों में सरोज, राकेश और जगदीश भी इस संघर्ष में चोटिल हुए हैं। उन्हें भी उपचार के लिए राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय पहुंचाया गया, जिससे घायलों की कुल संख्या पांच हो गई। फिलहाल जमीन पर अपने अधिकार को लेकर दोनों परिवार अपनी-अपनी दलीलें दे रहे हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वास्तव में यह विवाद किस बिंदु पर शुरू हुआ था और इसमें किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही।
अस्पताल परिसर में भी गरमाया माहौल
गांव में खूनी संघर्ष होने के बाद स्थिति तब और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब दोनों पक्षों के घायल लोग इलाज के लिए अलवर के राजीव गांधी सामान्य चिकित्सालय के प्रांगण में पहुंचे। ट्रॉमा वार्ड के बिल्कुल सामने दोनों गुटों के लोग एक बार फिर आमने-सामने आ गए, जिसके बाद उनके बीच तीखी नोकझोंक और कहासुनी शुरू हो गई। चिकित्सालय परिसर के भीतर दोबारा उपजी इस तनातनी को देखकर वहां मौजूद अन्य लोगों और तीमारदारों में भी खलबली मच गई। यह वाकया उस समय हुआ जब एंबुलेंस से मरीजों को ठीक से उतारा भी नहीं गया था, जिससे अस्पताल के भीतर हिंसा भड़कने का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। हालात को हाथ से निकलते देख तुरंत पुलिस ने बीच-बचाव किया और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
पुलिस जांच के बाद सामने आएंगे सभी तथ्य
एक ही परिवार के भीतर भूमि को लेकर उपजे विवाद ने जिस प्रकार हिंसक रूप लिया और पांच लोगों को अस्पताल पहुंचा दिया, उससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। ग्रामीण स्तर पर हुई इस मारपीट के बाद अस्पताल परिसर में जिस प्रकार तनाव का माहौल बना, उसने प्रशासनिक और पुलिस तंत्र की चिंताएं बढ़ा दी हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले को अपने संज्ञान में ले लिया है। अब पुलिस की गहन जांच के बाद ही जमीन के असली मालिकाना हक, हमले की शुरुआत करने वाले मुख्य आरोपियों और इस खूनी संघर्ष में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका पर से पर्दा उठ सकेगा। फिलहाल सभी घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है और पुलिस प्रशासनिक अमला हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रहा है।























