झारखंड की राजधानी रांची में आयोजित की जा रही 78वीं राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग प्रतियोगिता में राजस्थान के बीकानेर के साइकिलिस्ट हरिप्रकाश सींवर ने असाधारण खेल कौशल का प्रदर्शन किया है. देशभर के विभिन्न राज्यों से आए शीर्ष खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए हरिप्रकाश ने जूनियर वर्ग में अब तक दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक अपने नाम कर लिए हैं. राष्ट्रीय पटल पर हासिल की गई इस कामयाबी से बीकानेर जिले के साथ-साथ पूरे राजस्थान के खेल जगत में उत्साह की लहर दौड़ गई है.
व्यक्तिगत परस्यूट में 3 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर जीता स्वर्ण
इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन 31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक रांची के खेल मैदान पर किया जा रहा है. जूनियर वर्ग के मुकाबलों में हरिप्रकाश सींवर की सबसे प्रमुख उपलब्धि व्यक्तिगत परस्यूट स्पर्धा में सामने आई. इस कड़े मुकाबले में उन्होंने निर्धारित दूरी को मात्र 3 मिनट 37 सेकंड में पूरा करते हुए पहला स्थान हासिल किया और स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया.
ट्रैक साइकिलिंग की स्पर्धाओं में वेलोड्रोम पर तेज रफ्तार के साथ-साथ शरीर का संतुलन, सटीक पेडलिंग और निरंतर ताकत बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है. सेकंड के सौवें हिस्से से तय होने वाले इन मुकाबलों में मानसिक दृढ़ता भी उतनी ही जरूरी होती है. हरिप्रकाश ने इस स्पर्धा में शुरुआत से ही अपनी गति और लय पर नियंत्रण बनाए रखा और 3 मिनट 37 सेकंड का शानदार समय दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया. इसके अतिरिक्त अन्य स्पर्धाओं में भी बेहतरीन प्रदर्शन जारी रखते हुए वे अब तक कुल दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीत चुके हैं.
कोच श्रवण कुमार भाम्भू ने बताया सालों के कठोर अभ्यास का परिणाम
हरिप्रकाश की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर उनके कोच श्रवण कुमार भाम्भू ने गहरी प्रसन्नता व्यक्त की है. कोच के अनुसार, यह सफलता किसी एक दिन या कुछ हफ्तों के प्रयास से नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे कई वर्षों का कठोर अनुशासन, कड़ा शारीरिक श्रम और निरंतर किया गया अभ्यास शामिल है.
कोच का कहना है कि साइकिलिंग जैसे तकनीकी और स्टेमिना-आधारित खेल में आगे बढ़ने के लिए केवल स्वाभाविक प्रतिभा होना पर्याप्त नहीं होता. इसके लिए प्रतिदिन वेलोड्रोम और सड़कों पर पसीना बहाना पड़ता है, खानपान और फिटनेस का कठोर ध्यान रखना होता है और अपनी तकनीकी कमियों को लगातार सुधारना पड़ता है. बड़े मुकाबलों के दबाव में शांत रहकर पेडल की गति बनाए रखना ही एक अच्छे साइकिलिस्ट की पहचान होती है. हरिप्रकाश ने इन सभी मानकों पर लंबे समय तक काम किया, जिसके परिणामस्वरूप वे राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष स्थान हासिल करने में सफल रहे.
स्थानीय खेल जगत में जश्न का माहौल और युवाओं के लिए प्रेरणा
हरिप्रकाश द्वारा राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग चैंपियनशिप में तीन पदक जीतने की सूचना मिलते ही बीकानेर में खेल प्रेमियों और साथी खिलाड़ियों ने एक-दूसरे को बधाई देकर खुशी जताई. खेल संगठनों और स्थानीय खिलाड़ियों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए इसे जिले के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया.
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि हरिप्रकाश की यह सफलता राजस्थान के युवा खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन बनेगी. सीमित संसाधनों के बावजूद अगर निरंतर समर्पण और सही मार्गदर्शन में तैयारी की जाए, तो राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगिताओं में भी पोडियम तक पहुंचा जा सकता है. रांची में चल रही 78वीं राष्ट्रीय ट्रैक साइकिलिंग प्रतियोगिता 4 नवंबर तक जारी रहेगी, जहां हरिप्रकाश की इस उपलब्धि ने राजस्थान को खेल मानचित्र पर एक बार फिर गर्व की अनुभूति कराई है.
























