जीवन में जब विपरीत परिस्थितियां आती हैं, तो कई बार इंसान पूरी तरह टूट जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो मुश्किलों को अपनी सफलता की सीढ़ी बना लेते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी जयपुर के एक युवा किसान और उद्यमी संदीप कुमार मीणा की है, जिन्होंने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर में हार मानने के बजाय खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। आज उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि पांच बकरियों से शुरू हुआ यह छोटा सा काम आज एक सफल ब्रांड बन चुका है और उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर 18 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
मुश्किल दौर और स्टार्टअप की शुरुआत
जयपुर के पास जोबनेर कस्बे के डूंगरीकलां गांव के रहने वाले संदीप कुमार मीणा एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके जीवन में एक समय सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन कोरोना काल के दौरान उनके पिता का असामयिक निधन हो गया और साथ ही उनकी प्राइवेट नौकरी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे। इस दोहरी मार ने उनके जीवन को एक बिल्कुल नया मोड़ दे दिया। वर्ष 2022 में उन्होंने अपने घर के बाड़े से ही मात्र पांच बकरियों के साथ अपने इस अनूठे सफर की आधारशिला रखी।
पढ़ाई की योजना और गोटवेदा का आइडिया
संदीप कुमार मीणा ने वेटरनरी में दो साल का डिप्लोमा प्राप्त किया था और कुछ महीनों तक नौकरी भी की थी। इसके बाद वह एग्रीकल्चर में बीएससी की डिग्री हासिल करना चाहते थे, लेकिन चार साल का लंबा समय और परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई की योजना को बदला और घर से ही काम करने का निर्णय लिया। कोरोना महामारी के उस दौर में दूध की लगातार बढ़ती हुई मांग को भांपते हुए उन्हें इस व्यवसाय का विचार आया। इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक इस क्षेत्र के कामकाज और बाजार की नब्ज को समझा और फिर बिल्कुल जमीनी स्तर से इसकी शुरुआत कर दी।
बकरियों की नस्ल और चारे का खास इंतजाम
वर्तमान में संदीप के पास जयपुर की स्थानीय रजिस्टर्ड नस्ल गुर्जर और सिरोही की कई बकरियां हैं। उन्होंने चराई की व्यवस्था के अनुसार ही बकरियों के पालन की रूपरेखा तैयार की है। अपने इस स्टार्टअप की शुरुआत के दौरान ही उन्होंने बकरियों के चारे और भोजन के लिए अपने यहां 100 अरडू के पौधे भी लगाए थे। इन पेड़ों की पत्तियों को बकरियां बेहद चाव से खाती हैं, जिससे उनके शरीर में दूध का उत्पादन भी बढ़ता है। इस प्रकार संदीप बकरी पालन के साथ-साथ इन पेड़ों के जरिए अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रहे हैं।
उत्पाद की खासियत और बाजार में मांग
संदीप के इस स्टार्टअप की सबसे बड़ी खूबी यह है कि बकरी का दूध मुख्य रूप से उन बच्चों के लिए लिया जाता है जिन्हें सामान्य तौर पर गाय या भैंस के दूध से एलर्जी की समस्या होती है। बकरी का दूध पचने में बेहद हल्का होता है और यह मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में काफी मददगार साबित होता है। यही वजह है कि डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों के समय भी चिकित्सक मरीजों को बकरी का दूध पीने की सलाह देते हैं। लोगों की इन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संदीप ने केवल सादा दूध ही नहीं बल्कि उससे जुड़े कई अन्य मूल्य वर्धित उत्पाद भी तैयार करना शुरू किए, जिनकी आज बाजार में भारी मांग बनी रहती है।
सड़क किनारे स्टॉल से लेकर ई-कॉमर्स तक का सफर
संदीप कुमार मीणा ने अपने इस काम की शुरुआत भले ही बहुत छोटे स्तर पर की हो, लेकिन अपने दूध और उससे बने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने जयपुर में चित्रकूट स्टेडियम के पास एक छोटी सी दूध की स्टॉल लगाई। शुरुआती दिनों में उन्होंने 250 रुपये प्रति लीटर की दर से अपना दूध बेचना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्हें शुरुआती ग्राहक मिलने लगे और बाजार का व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ। हालांकि शुरुआत में दूध महंगा होने के कारण इसकी मांग कुछ कम जरूर रही, लेकिन संदीप ने बिना विचलित हुए लगातार अपने काम पर फोकस बनाए रखा।
उत्पादन का दायरा और गोटवेदा का विस्तार
संदीप मीणा आज एक बकरी से रोजाना औसतन एक से डेढ़ लीटर दूध प्राप्त कर रहे हैं, जिससे उनके पास प्रतिदिन लगभग 70 से 80 लीटर दूध का कुल उत्पादन होता है। उनके इस सफर से अब क्षेत्र के कई अन्य किसान भी जुड़ चुके हैं। गोटवेदा अब केवल एक दूध बेचने वाला ब्रांड नहीं रहा, बल्कि एक संपूर्ण और सफल स्टार्टअप बन चुका है। संदीप अब दूध उत्पादन और उत्पाद निर्माण के अलावा ग्रामीण इलाकों में पशुपालन करने वाले किसानों को पशु चिकित्सा सेवाएं भी उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा वह बकरियों और भेड़ों की खरीद-बिक्री में मदद, किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, सहायता, ऋण दिलाने में सहयोग, बीमा और एआई सेवाएं भी प्रदान कर रहे हैं।
प्रोसेसिंग यूनिट और आधुनिक उत्पाद
ऑनलाइन बाजार की नब्ज को भली-भांति समझते हुए संदीप ने दूध से पाउडर, शुद्ध घी, पनीर और विशेष साबुन जैसे उत्पाद तैयार करना शुरू किया है। इन उत्पादों की स्थानीय ऑफलाइन बाजारों के साथ-साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर भी जबरदस्त डिमांड रहती है। बकरियों के पालन और दूध के प्रसंस्करण के लिए संदीप ने अपनी खुद की एक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर रखी है, जहां वे 500 लीटर दूध से बल्क में पाउडर तैयार करवाते हैं जिसकी रोजाना 25 से 30 लीटर तक बिक्री हो जाती है। इसके अलावा वे हर महीने करीब 300 साबुन बनाते हैं जिनकी कीमत 30 रुपये रखी गई है। साबुन के अलावा वे दो लीटर दूध से 300 ग्राम पनीर भी तैयार करते हैं।
















