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थार में आधी रात कुदरत का कहर: बाड़मेर की सड़कों पर बहा पानी, जैसलमेर के तालाब हुए लबालबराजस्थान
17 जून 2026, 9:28 am (45 दिन पहले)· 4

थार में आधी रात कुदरत का कहर: बाड़मेर की सड़कों पर बहा पानी, जैसलमेर के तालाब हुए लबालब

राजस्थान के सरहदी जिलों बाड़मेर और जैसलमेर में देर रात तेज आंधी के बाद मूसलाधार बारिश हुई, जिससे रेगिस्तान पानी-पानी हो गया, भीषण गर्मी से राहत मिली पर कई जगह पेड़ और बिजली के पोल गिर गए।

राजस्थान के पश्चिमी छोर पर बसे रेगिस्तानी जिलों बाड़मेर और जैसलमेर के लोग देर रात उस वक्त चौंक उठे, जब सूखे धोरों पर अचानक मौसम ने पूरी तरह पलटी मार दी। पहले रात के सन्नाटे को चीरती हुई धूल भरी तेज आंधी का बवंडर उठा और कुछ ही देर में बादल इस कदर गरजे कि झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया। आधी रात को टूटी इस बरसात ने तपते हुए मरूस्थल को भिगोकर रख दिया।

मौसम विभाग के मुताबिक यह आकस्मिक बदलाव कोई संयोग नहीं था। स्थानीय स्तर पर बने मजबूत चक्रवाती परिसंचरण और अरब सागर की ओर से लगातार आ रही नम हवाओं के मेल ने दोनों जिलों में अचानक यह तेज बारिश करा दी। कई दिनों से सूरज की जिस तीखी तपन ने लोगों को बेहाल कर रखा था, वह पल भर में ठंडी पड़ गई और पूरे इलाके की फिजा में ठंडक घुल गई।

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शहरों का बदला नजारा, सड़कों पर चली पानी की चादर

चंद घंटों की इस आक्रामक बारिश ने बाड़मेर और जैसलमेर का चेहरा ही बदल दिया। बाड़मेर शहर की प्रमुख सड़कें देखते ही देखते जलमग्न होकर लबालब हो गईं। निचले इलाकों और मुख्य मार्गों पर पानी की मोटी चादर बहती हुई साफ नजर आई, जबकि कई चौराहों पर तेज बहाव के कारण देर रात आवागमन पूरी तरह ठप पड़ गया।

दूसरी ओर स्वर्ण नगरी जैसलमेर और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों पर इंद्रदेव कुछ ज्यादा ही मेहरबान रहे। यहां के स्थानीय और ऐतिहासिक तालाबों में बरसाती पानी की भारी आवक हुई। तालाबों के लबालब भर जाने का सीधा फायदा यह होगा कि आने वाले शुष्क महीनों में पानी का संकट काफी हद तक टल जाएगा।

भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत

थार के इस इलाके में लोग पिछले लंबे समय से रिकॉर्ड तोड़ पारे और असहनीय उमस की मार झेल रहे थे। दोपहर के वक्त झुलसाने वाली लू लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर देती थी। ऐसे माहौल में देर रात की इस झमाझम बारिश ने दोनों जिलों के निवासियों को राहत की बड़ी सांस दी। तापमान में आई अचानक भारी गिरावट से ग्रामीण अंचलों तक का मौसम खुशनुमा और सुहावना हो गया। रात के समय घरों में चल रहे एसी और कूलर बंद हो गए और लोगों ने लंबे अरसे बाद ठंडी हवाओं के बीच चैन की नींद ली।

आंधी का तांडव, पेड़ और बिजली के पोल जमींदोज

राहत के इस मौसम के साथ आंधी ने नुकसान भी कम नहीं पहुंचाया। जैसलमेर और बाड़मेर के कई हिस्सों में तेज हवाओं के झोंकों से पुराने और प्राचीन पेड़ जड़ से उखड़ गए तथा बिजली के पोल जमीन पर आ गिरे। खंभे गिरने के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात से ही विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई, जिसे दोबारा चालू करने के लिए डिस्कॉम की टीमें सुबह से जुटी हुई हैं।

पशुपालकों में जगी हरी घास की उम्मीद

इस उठापटक के बीच ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों के चेहरे पर नई उम्मीद की चमक है। थार के ग्रामीणों का मानना है कि पिछली तूफानी बारिश के बाद हुई इस ताजा बारिश से अब बीहड़ों और चरागाहों में अच्छी हरी घास उगने की पूरी संभावना बन गई है। हरी घास उग आने से मवेशियों के लिए चारे का संकट खत्म हो जाएगा और पशुपालकों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।

सवाल-जवाब

बाड़मेर और जैसलमेर में अचानक बारिश क्यों हुई?
मौसम विभाग के अनुसार स्थानीय स्तर पर बने मजबूत चक्रवाती परिसंचरण और अरब सागर से आ रही नम हवाओं के कारण दोनों जिलों में यह आकस्मिक तेज बारिश हुई।
बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान क्या हुआ?
तेज आंधी के कारण कई जगह पुराने पेड़ उखड़ गए और बिजली के पोल गिर गए, जिससे कई ग्रामीण इलाकों में देर रात से बिजली आपूर्ति ठप है।
जैसलमेर के तालाबों को इससे क्या फायदा हुआ?
जैसलमेर और उसके ग्रामीण इलाकों के स्थानीय और ऐतिहासिक तालाबों में भारी पानी की आवक हुई, जिससे आने वाले शुष्क महीनों में पानी का संकट कम होगा।
पशुपालकों को इस बारिश से क्या उम्मीद है?
ग्रामीणों का मानना है कि इस ताजा बारिश से बीहड़ों और चरागाहों में हरी घास उगेगी, जिससे मवेशियों के चारे का संकट खत्म होगा और आर्थिक राहत मिलेगी।
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