राजस्थान के टोंक जिले में स्थित टोडारायसिंह कस्बे के निवासियों के लिए सोमवार की सुबह एक बहुत बड़ा खौफ लेकर आई। जंगल के प्राकृतिक आवास से भटककर एक पांच साल का तेंदुआ अचानक घनी आबादी वाले इलाके में प्रवेश कर गया। इस विशाल और खतरनाक जंगली जानवर की मौजूदगी से पूरे शहरी क्षेत्र में भारी हड़कंप मच गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तरफ भागने लगे। यह पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में भी रिकॉर्ड हो गई, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि अनजान माहौल में फंसने के बाद जानवर कितना डरा हुआ और आक्रामक हो चुका था। अक्सर खाने या पानी की तलाश में वन्यजीव शहरों का रुख कर लेते हैं और यह घटना भी उसी का एक खौफनाक उदाहरण बन गई।
सुबह-सुबह शुरू हुआ दहशत का लंबा दौर
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह खौफनाक घटनाक्रम सुबह करीब छह बजे शुरू हुआ। सबसे पहले इस भटकते हुए तेंदुए को पीपली चौराहे के नजदीक स्थित एक व्यावसायिक गोदाम के पास घूमते हुए देखा गया। जैसे-जैसे दिन चढ़ने लगा और उजाला बढ़ा, कस्बे में आम लोगों की दैनिक आवाजाही भी शुरू हो गई। इंसानी हलचल और बढ़ते हुए शोरगुल से घबराकर यह जंगली जानवर सुरक्षित पनाह की तलाश में कोली मोहल्ले की तरफ तेजी से भाग निकला। वहां जाकर वह एक पुराने और लगभग खंडहर हो चुके मकान में छिप गया। इस घटना की खबर पूरे कस्बे में आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में तमाशबीन वहां जमा होने लगे, जिससे स्थिति और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गई और जानवर का तनाव बढ़ता चला गया।
बचाव की शुरुआती कोशिश और पहला हमला
जानवर के एक रिहायशी और आबादी वाले हिस्से में घुसने की खबर तुरंत स्थानीय वन विभाग की टीम को दी गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सूचना मिलते ही वन मित्र राकेश सैनी जमीनी हालात का जायजा लेने के लिए सबसे पहले मौके पर पहुंचे। वह मकान के बाहर से हालात को समझने और भीड़ को दूर करने की कोशिश कर ही रहे थे कि तभी खंडहर में अंधेरे के बीच छिपे बैठे तेंदुए ने अचानक उनके ऊपर पीछे से जोरदार हमला कर दिया। इस अप्रत्याशित और तेज झपट्टे में राकेश सैनी बुरी तरह घायल होकर गिर पड़े। इंसानों से घिरने के बाद जानवर वहां से भी तेजी से भाग निकला और मकानों की छतों के ऊपर से दौड़ता हुआ आगे बढ़ने लगा, जिससे नीचे संकरी सड़कों पर खड़े स्थानीय लोगों में भारी चीख-पुकार और दहशत फैल गई।
शराब की दुकान में घुसा हिंसक जानवर
छतों और छज्जों के रास्ते अपना सफर तय करते हुए सुबह करीब आठ बजकर चालीस मिनट पर यह तेंदुआ कस्बे के भीड़भाड़ वाले गणपति प्लाजा इलाके में पहुंच गया। वहां स्थित जय श्री ओम बन्ना वाइंस नामक शराब की दुकान का बाहरी शटर खुला हुआ था और जानवर सीधे उसी खुली हुई जगह के अंदर घुस गया। उस समय दुकान के भीतर मौजूद सेल्समैन संजय गुर्जर अपनी सुबह की नियमित साफ-सफाई के काम में पूरी तरह से व्यस्त थे। तेंदुए ने बिना कोई मौका दिए संजय पर सीधा और जानलेवा हमला कर दिया। अपनी जान को भारी खतरे में देख संजय ने भी पूरी हिम्मत और सूझबूझ जुटाई। उन्होंने जानवर से कड़ा संघर्ष किया और किसी तरह खुद को खरोंचों से बचाते हुए दुकान से बाहर निकलने में कामयाबी हासिल कर ली। इसी अफरातफरी के दौरान दुकान के ठीक बाहर बैठे एक अन्य व्यक्ति फतेहलाल कोली पर भी इस खूंखार जानवर ने अपना अगला झपट्टा मारा और उन्हें भी लहूलुहान कर दिया।
तीनों घायलों का तुरंत हुआ अस्पताल में इलाज
हमले की इस पूरी श्रृंखला के तुरंत बाद तीनों घायलों को फौरन इलाज के लिए कस्बे के पास स्थित उप जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उनकी स्थिति की जांच की और खून रोकने का प्रयास किया। सेल्समैन संजय गुर्जर के शरीर पर आए घाव काफी गहरे और चिंताजनक थे। इसलिए उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर और गहन इलाज के लिए टोंक के मुख्य जिला अस्पताल में रेफर कर दिया। वहीं वन मित्र राकेश सैनी और बाहर बैठे फतेहलाल कोली की चोटें तुलनात्मक रूप से कम गंभीर पाई गईं। इसके चलते अस्पताल प्रशासन ने उन्हें जरूरी प्राथमिक उपचार और दवाइयां देने के बाद उसी दिन घर जाने की छुट्टी दे दी।
पांच घंटे तक चला चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन
लगातार तीन लोगों को अपना शिकार बनाने के बाद वह डरा हुआ तेंदुआ दुकान के भीतर रखी एक बड़ी लोहे की अलमारी के पीछे जाकर दुबक गया। इस बड़े खतरे को भांपते हुए बाहर मौजूद कुछ निडर लोगों ने तुरंत फुर्ती दिखाई और दुकान का भारी शटर बाहर की तरफ से मजबूती से नीचे गिरा दिया। इसके बाद शराब की दुकान के अनुज्ञाधारी मनोज गुर्जर को घटना की जानकारी देकर वहां बुलाया गया। उनकी उपस्थिति में वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने शटर के ताले काटकर बचाव अभियान की औपचारिक शुरुआत की। घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीएफओ वीरेंद्र कृष्ण, आरएफएस अधिकारी अनुराग महर्षि, रेंजर मोहनलाल सैनी, वनपाल सूर्य देव सिंह, पुलिस उपाधीक्षक आशीष कुमार और स्थानीय थाना प्रभारी मुकेश कुमार अपने पूरे पुलिस जाप्ते के साथ मुस्तैद खड़े रहे।
कस्बे में कौतूहलवश जुटी हजारों लोगों की बेकाबू भीड़ को काबू में रखने के लिए पुलिस प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी। एहतियात के तौर पर पूरे गणपति प्लाजा क्षेत्र को एक पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए अंत में राजधानी जयपुर से बुलाए गए वरिष्ठ वन्य जीव पशु चिकित्सक डॉ अशोक कुमार तंवर और उनकी विशेष वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू टीम ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दुकान के भीतर के अंधेरे में जानवर की सही स्थिति का अंदाजा लगाया और फिर एक सटीक निशाना लगाते हुए तेंदुए को बेहोश करने के लिए ट्रैंक्विलाइज गन का इस्तेमाल किया। दवा का असर होने में कुछ समय लगा। सुबह से शुरू हुई करीब पांच घंटे की इस लंबी और थका देने वाली जद्दोजहद के बाद अंततः उस बेहोश जानवर को एक मजबूत और सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया गया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के सफल होने के बाद ही कस्बे के प्रशासन और आम लोगों ने एक बड़ी राहत की सांस ली।



















