श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर देशभर में भगवान कृष्ण के धामों और मंदिरों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। राजस्थान के सिरोही जिले में स्थित कई ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल इस समय दीपोत्सव और फूलों की सजावट से जगमग हैं। इनमें से सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला स्थान मूंगथला गाँव में स्थित प्राचीन मधुसूदन मंदिर है। यह मंदिर न केवल अपनी स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है, बल्कि भगवान कृष्ण के मथुरा से द्वारिका जाते समय यहाँ विश्राम करने के पौराणिक संदर्भों के लिए भी प्रसिद्ध है। जन्माष्टमी के अवसर पर यहाँ राजस्थान के साथ-साथ गुजरात और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं।
मंत्रों की शक्ति से आकाश से उतरा रहस्यमयी द्वार
मधुसूदन मंदिर परिसर के मुख्य बाहरी हिस्से में एक बेहद सुंदर और प्राचीन द्वार स्थापित है। इस प्रवेश द्वार की बनावट और पत्थरों पर उकेरी गई देव प्रतिमाएँ इसकी प्राचीनता का प्रमाण देती हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह द्वार स्वयं भगवान कृष्ण के काल का माना जाता है। मूंगथला गाँव के निवासी आनंद माली बताते हैं कि जब भगवान कृष्ण मथुरा छोड़ कर द्वारिका की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब उन्होंने कुछ समय के लिए इस पवित्र भूमि पर विश्राम किया था। उस समय यहाँ साधना कर रहे ऋषि-मुनियों ने अपनी तपोबल और वैदिक मंत्रों की शक्ति से इस द्वार को सीधे आकाश से धरती पर अवतरित किया था। तब से लेकर आज तक यह ऐतिहासिक द्वार मंदिर परिसर की शोभा बढ़ा रहा है और दर्शन के लिए आने वाले हर भक्त के लिए एक विशेष आकर्षण बना हुआ है।
काले पत्थर की प्रतिमा और 700 साल पुराना इतिहास
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान कृष्ण की काले पत्थर से निर्मित लगभग 3 फीट ऊँची प्रतिमा विराजमान है। यहाँ प्रभु अपने मधुसूदन रूप में पूजे जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, असुरों का संहार करने के कारण भगवान कृष्ण का यह नाम मधुसूदन पड़ा था। वर्तमान मंदिर की मुख्य इमारत लगभग 700 वर्ष पुरानी मानी जाती है, जिसे समय-समय पर जीर्णोद्धार करके संरक्षित रखा गया है। जन्माष्टमी के भव्य उत्सव के अतिरिक्त प्रत्येक एकादशी तिथि पर भी यहाँ भगवान का अलौकिक शृंगार किया जाता है। मंदिर में बाल स्वरूप ठाकुर जी के लिए एक सुंदर झूला भी लगाया गया है, जहाँ भक्त उन्हें भाव-विभोर होकर झुलाते हैं।
विष्णु मंदिरों की श्रृंखला और कलात्मक गुंबद
स्थापत्य कला की दृष्टि से मधुसूदन मंदिर अत्यंत समृद्ध है। इसके मुख्य पांडाल का गुंबद बेहद बारीक और नक्काशीदार कारीगरी से सजा हुआ है, जिसे देखकर प्राचीन भारतीय शिल्पकला का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्य मंदिर के चारों ओर छोटे-छोटे अन्य देव मंदिर भी बने हुए हैं जो इसके धार्मिक महत्व को और बढ़ाते हैं। इसके अतिरिक्त, सिरोही का यह क्षेत्र प्राचीन विष्णु मंदिरों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में भी जाना जाता है। इस मंदिर के आसपास गिरवर का पाटनारायण मंदिर, चंदेला स्थित आंबावेरी धाम और उमरनी का ऋषिकेश मंदिर जैसे कई पौराणिक विष्णु मंदिर मौजूद हैं, जो इस पूरे क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण धार्मिक गलियारे के रूप में स्थापित करते हैं।



















