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भरतपुर में दीपावली की अनोखी रौनक, पारंपरिक खिलौना मिठाई की मांग तेजराजस्थान
24 अक्तू॰ 2026, 3:04 pm (5 घंटे पहले)· 1

भरतपुर में दीपावली की अनोखी रौनक, पारंपरिक खिलौना मिठाई की मांग तेज

भरतपुर में दीपावली के पावन अवसर पर पारंपरिक खिलौना मिठाई की मांग काफी बढ़ गई है। लकड़ी के सांचों से बनने वाली रंग-बिरंगी और आकर्षक आकृतियों वाली यह मिठाई त्योहार की विशेष पहचान और पूजा का अहम हिस्सा मानी जाती है।

भरतपुर में दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में चहल-पहल काफी तेज हो गई है। घरों में जहां एक ओर साफ-सफाई और सजावट का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर खास पकवानों और मिठाइयों की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। इस बीच, दीपावली के मौके पर विशेष रूप से तैयार की जाने वाली पारंपरिक खिलौना मिठाई भी बाजारों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगी है। तरह-तरह के रंगों और आकर्षक आकृतियों वाली यह मिठाई इस पर्व की एक खास पहचान के रूप में देखी जाती है।

पारंपरिक तरीके से तैयार होती है यह खास मिठाई

इस खिलौना मिठाई की सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण प्रक्रिया है, जिसे आज भी पूरी तरह से पारंपरिक तरीकों से अंजाम दिया जाता है। इसे तैयार करने के लिए विशेष लकड़ी के सांचों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी मदद से इसे विभिन्न प्रकार के आकार और कलाकृतियां दी जाती हैं। इन सांचों के अंदर मिठाई के मिश्रण को भरकर मनचाहा स्वरूप गढ़ा जाता है। इसके बाद इसे सुंदर और जीवंत रंगों से सजाया जाता है, जिससे यह देखने में बिल्कुल किसी खिलौने की तरह प्रतीत होती है। यही मुख्य कारण है कि लोग इसे खिलौना मिठाई के नाम से पुकारते हैं।

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बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी में रहता है आकर्षण

इस मिठाई में कई तरह की अनूठी आकृतियां देखने को मिलती हैं। इसके शानदार रंग और अनोखे डिजाइन बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। दीपावली के शुभ अवसर पर लोग इसे खरीदकर अपने घरों में लाते हैं और लक्ष्मी पूजन की मुख्य सामग्री के साथ इसे शामिल करते हैं। कई परिवारों में तो पीढ़ियों से इस खास मिठाई को दीपावली की एक अनिवार्य परंपरा के रूप में अपनाया जाता रहा है, जो इसके सांस्कृतिक महत्व को और अधिक बढ़ा देता है।

बदलते दौर में भी कायम है इस मिठाई का क्रेज

खिलौना मिठाई का दायरा केवल इसके स्वाद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह त्योहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के साथ भी गहराई से जुड़ी हुई है। आज के समय में बाजारों के भीतर मिठाइयों की अनगिनत और आधुनिक किस्में उपलब्ध हैं, इसके बावजूद इस पारंपरिक मिठाई का अलग ही आकर्षण और रुतबा बना हुआ है। इसकी रंग-बिरंगी बनावट और लकड़ी के सांचों से गढ़े जाने की प्राचीन विधि इसे अन्य सभी मिठाइयों से बिल्कुल अलग पहचान दिलाती है।

कारीगरों और दुकानदारों ने तेज की अपनी तैयारियां

जैसे-जैसे दीपावली का पर्व करीब आ रहा है, वैसे-वैसे इस मिठाई को बनाने वाले कारीगरों और स्थानीय दुकानदारों ने भी अपनी तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। त्योहार के इन दिनों में इसकी बिक्री और मांग में भारी उछाल आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में यह पारंपरिक खिलौना मिठाई एक बार फिर से दीपावली की खुशियों, उमंग और पारंपरिक मिठास में चार चांद लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार है और बाजार की रौनक बढ़ा रही है।

सवाल-जवाब

खिलौना मिठाई को किस तरह से तैयार किया जाता है?
इस मिठाई को विशेष लकड़ी के सांचों में मिश्रण डालकर मनचाहा आकार दिया जाता है और फिर रंगों से सजाया जाता है।
इस मिठाई का उपयोग मुख्य रूप से किस अवसर पर होता है?
इस मिठाई का उपयोग मुख्य रूप से दीपावली के त्योहार और लक्ष्मी पूजन के दौरान किया जाता है।
खिलौना मिठाई लोगों के बीच क्यों लोकप्रिय है?
इसकी रंग-बिरंगी और आकर्षक आकृतियां बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।
क्या आधुनिक मिठाइयों के आने के बाद भी इसकी मांग है?
हां, बाजारों में कई नई किस्में उपलब्ध होने के बावजूद इस पारंपरिक मिठाई का अलग आकर्षण और मांग बनी हुई है।
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टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·2 घंटे पहले

बचपन की यादें ताजा हो गईं! लकड़ी के सांचों से बनने वाली इन रंग-बिरंगी मिठाइयों का स्वाद और दिखना दोनों ही अलग मज़ा देते हैं। क्या आज के समय में भी ये सांचे बनाने वाले कारीगर उतनी ही आसानी से मिल जाते हैं?

Ravikash Gupta@ravikash·3 घंटे पहले

लकड़ी के सांचों से बनने वाली ये खिलौना मिठाई देखकर बचपन की याद आ गई। आजकल सब कुछ मशीनों से बनता है, पर हाथ से बने इन सांचों का मज़ा ही अलग है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 घंटे पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही कहा आपने! लकड़ी के सांचों वाली इस मिठाई की बात ही कुछ और है, बचपन की यादें ताज़ा हो गईं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 घंटे पहले

लकड़ी के सांचों से बनने वाली ये मिठाई देखकर बचपन की याद आ गई।

Rohan Verma@rohan-verma·3 घंटे पहले

करण भाई, सच कहा आपने! क्या अब भी ये मिठाइयां सिर्फ गुड़-चीनी से बनती हैं या इसमें कुछ और मिलाते हैं?

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