भरतपुर में दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में चहल-पहल काफी तेज हो गई है। घरों में जहां एक ओर साफ-सफाई और सजावट का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर खास पकवानों और मिठाइयों की तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। इस बीच, दीपावली के मौके पर विशेष रूप से तैयार की जाने वाली पारंपरिक खिलौना मिठाई भी बाजारों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगी है। तरह-तरह के रंगों और आकर्षक आकृतियों वाली यह मिठाई इस पर्व की एक खास पहचान के रूप में देखी जाती है।
पारंपरिक तरीके से तैयार होती है यह खास मिठाई
इस खिलौना मिठाई की सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण प्रक्रिया है, जिसे आज भी पूरी तरह से पारंपरिक तरीकों से अंजाम दिया जाता है। इसे तैयार करने के लिए विशेष लकड़ी के सांचों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनकी मदद से इसे विभिन्न प्रकार के आकार और कलाकृतियां दी जाती हैं। इन सांचों के अंदर मिठाई के मिश्रण को भरकर मनचाहा स्वरूप गढ़ा जाता है। इसके बाद इसे सुंदर और जीवंत रंगों से सजाया जाता है, जिससे यह देखने में बिल्कुल किसी खिलौने की तरह प्रतीत होती है। यही मुख्य कारण है कि लोग इसे खिलौना मिठाई के नाम से पुकारते हैं।
बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी में रहता है आकर्षण
इस मिठाई में कई तरह की अनूठी आकृतियां देखने को मिलती हैं। इसके शानदार रंग और अनोखे डिजाइन बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी अपनी ओर आकर्षित करते हैं। दीपावली के शुभ अवसर पर लोग इसे खरीदकर अपने घरों में लाते हैं और लक्ष्मी पूजन की मुख्य सामग्री के साथ इसे शामिल करते हैं। कई परिवारों में तो पीढ़ियों से इस खास मिठाई को दीपावली की एक अनिवार्य परंपरा के रूप में अपनाया जाता रहा है, जो इसके सांस्कृतिक महत्व को और अधिक बढ़ा देता है।
बदलते दौर में भी कायम है इस मिठाई का क्रेज
खिलौना मिठाई का दायरा केवल इसके स्वाद तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह त्योहार की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के साथ भी गहराई से जुड़ी हुई है। आज के समय में बाजारों के भीतर मिठाइयों की अनगिनत और आधुनिक किस्में उपलब्ध हैं, इसके बावजूद इस पारंपरिक मिठाई का अलग ही आकर्षण और रुतबा बना हुआ है। इसकी रंग-बिरंगी बनावट और लकड़ी के सांचों से गढ़े जाने की प्राचीन विधि इसे अन्य सभी मिठाइयों से बिल्कुल अलग पहचान दिलाती है।
कारीगरों और दुकानदारों ने तेज की अपनी तैयारियां
जैसे-जैसे दीपावली का पर्व करीब आ रहा है, वैसे-वैसे इस मिठाई को बनाने वाले कारीगरों और स्थानीय दुकानदारों ने भी अपनी तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। त्योहार के इन दिनों में इसकी बिक्री और मांग में भारी उछाल आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में यह पारंपरिक खिलौना मिठाई एक बार फिर से दीपावली की खुशियों, उमंग और पारंपरिक मिठास में चार चांद लगाने के लिए पूरी तरह से तैयार है और बाजार की रौनक बढ़ा रही है।





















