राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित गांवगुड़ा क्षेत्र के समीप मौकाड़ा गांव में एक घर के पास बनी दीवार से अत्यंत विषैले रसल वाइपर को सुरक्षित बाहर निकाला गया। दीवार की दरारों में छिपे इस आक्रामक जीव को देखते ही स्थानीय ग्रामीणों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई। स्थानीय बोलचाल में चित्ती के नाम से पहचाना जाने वाला यह जीव भारत के सर्वाधिक घातक सांपों में गिना जाता है। सूचना मिलने के तुरंत बाद वन्यजीव प्रेमी नवीन गहलोत आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचे और अत्यंत सावधानी के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
जिले में आठ वर्षों के भीतर केवल तीसरा रेस्क्यू
नवीन गहलोत के अनुसार राजसमंद जिले की विशेष भौगोलिक बनावट और पर्यावरण के चलते यहां रसल वाइपर की उपस्थिति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है। पिछले लगभग आठ वर्षों के रिकॉर्ड को देखा जाए तो जिले भर में इस प्रजाति का यह महज तीसरा आधिकारिक रेस्क्यू दर्ज किया गया है। घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र के इतने करीब इस खतरनाक जीव का मिलना ग्रामीणों और विशेषज्ञों दोनों के लिए चौंकाने वाला था। रेस्क्यू प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत सांप को आबादी से दूर एक सुरक्षित प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया ताकि इंसानों और वन्यजीव दोनों की हिफाजत बनी रहे।
शारीरिक संरचना और पहचान के प्रमुख लक्षण
देश के चार सबसे विषैले सांपों यानी 'बिग फोर' की सूची में रसल वाइपर को प्रमुख स्थान प्राप्त है। इसकी भारी और मजबूत शारीरिक संरचना पहली नजर में किसी अजगर की तरह प्रतीत होती है। इसी बाहरी समानता के चक्कर में कई बार लोग भ्रमित हो जाते हैं और इसे अजगर का छोटा बच्चा समझकर इसके नजदीक जाने का गंभीर जोखिम उठा लेते हैं।
इसकी त्वचा पर गहरे भूरे रंग के गोल अथवा अंडाकार निशानों की तीन समानांतर कतारें बनी होती हैं, जो देखने में किसी जंजीर जैसी आकृति बनाती हैं। शरीर पर मौजूद इन्हीं विशेष चितकबरे निशानों के चलते देहाती इलाकों में लोग इसे 'चित्ती' सांप कहकर पुकारते हैं। इसके अलावा इसका सिर स्पष्ट रूप से तिकोने आकार का होता है, जो इसकी एक प्रमुख जैविक पहचान है।
हीमोटॉक्सिक जहर का प्रभाव और अत्यधिक आक्रामकता
रसल वाइपर का विष हीमोटॉक्सिक प्रकृति का होता है, जो शिकार के सीधे रक्त संचार तंत्र पर जानलेवा हमला करता है। इसके संपर्क में आते ही शरीर की लाल रक्त कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं। दंश लगने के बाद खून में थक्के जमने की प्रक्रिया असामान्य हो जाती है, गंभीर आंतरिक रक्तस्राव शुरू होता है और मरीज की किडनी फेल होने की सर्वाधिक आशंका बनी रहती है।
किसी भी खतरे का आभास होते ही यह सांप एक कसी हुई कुंडली मारकर बैठ जाता है और चेतावनी के तौर पर प्रेशर कुकर की सीटी जैसी तीखी आवाज में फुफकार छोड़ता है। उकसावे की स्थिति में यह बिजली जैसी फुर्ती से छलांग लगाकर हमला करने की असाधारण क्षमता रखता है, जिससे बचाव के लिए तुरंत अत्यधिक दूरी बनाना आवश्यक हो जाता है।


















