राजस्थान में होने वाले आगामी पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने जमीनी स्तर पर रणनीतिक लामबंदी तेज कर दी है। इसी कड़ी में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ बुधवार के दिन टोंक प्रवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने जिला कार्यालय में पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस सांगठनिक मंथन के दौरान उन्होंने राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को घर-घर पहुंचाने तथा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल करने के निर्देश दिए। इस बैठक में टोंक जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान, पूर्व सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया, राज्य कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी तथा पूर्व विधायक अजीत सिंह मेहता सहित कई प्रमुख नेता मंच पर उपस्थित रहे।
कांग्रेस में आंतरिक कलह और डोटासरा पर तीखा कटाक्ष
कार्यकर्ताओं की बैठक संपन्न होने के उपरांत संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बीजेपी प्रदेश प्रमुख ने विपक्षी दल कांग्रेस की कार्यशैली और उसके शीर्ष नेतृत्व पर कड़ा प्रहार किया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि संगठन में जारी वर्तमान गतिरोध की मुख्य धुरी वही हैं। राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा, “डोटासरा बिना फुटबॉल के ही पार्टी में फुटबॉल खेल रहे हैं।” इसके साथ ही उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि वे जमीनी हकीकत से दूर होकर निराधार कल्पनाओं में खोए हुए हैं।
गहलोत बनाम पायलट का पुराना मनमुटाव
विपक्षी खेमे में वरिष्ठ नेताओं के आपसी संबंधों पर चर्चा करते हुए राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच के पुराने तनाव का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादाओं का हवाला देते हुए रेखांकित किया कि सार्वजनिक जीवन में भाषा की गरिमा सर्वोपरि होनी चाहिए। राठौड़ ने याद दिलाया कि सत्ता में रहते हुए गहलोत ने अपने ही सहयोगी पायलट के लिए अशोभनीय शब्दावली का प्रयोग किया था। राठौड़ ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक रूप से कहे गए वे शब्द आज भी दोनों नेताओं के दिलों में एक गहरी टीस बनकर मौजूद हैं, जिसे कोई भी राजनेता सहजता से विस्मृत नहीं कर सकता।
मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों की रूपरेखा
प्रदेश सरकार के प्रशासनिक ढांचे और संभावित संगठनात्मक नियुक्तियों के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने संवैधानिक स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने दो-टूक कहा कि मंत्रिमंडल में किसी भी प्रकार का विस्तार अथवा फेरबदल करना पूरी तरह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। यदि शासन प्रमुख संगठन से सहयोग अथवा नामों की अपेक्षा करेंगे, तो संगठन स्तर पर विमर्श किया जा सकता है। बोर्डों तथा निगमों में राजनीतिक नियुक्तियों के विषय पर उन्होंने स्थिति साफ करते हुए कहा कि वर्तमान समय में संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकता आगामी चुनावों में विजय पताका फहराना है। चुनावी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होने के पश्चात निष्ठावान कार्यकर्ताओं को समुचित प्रशासनिक दायित्व सौंपे जाएंगे।
निकाय चुनाव और संस्थागत आरोपों पर दोहरे मापदंड
शहरी निकाय चुनाव परिणामों और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों का राठौड़ ने पुरजोर खंडन किया। उन्होंने विपक्षी दल पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब नतीजे पक्ष में आते हैं तो वे अपनी पीठ थपथपाते हैं, परंतु पराजय मिलते ही संवैधानिक संस्थाओं अथवा EVM की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने लगते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि सत्ता पक्ष ने मशीनरी का दुरुपयोग किया होता, तो कांग्रेस को मिलने वाले मतों का अनुपात इतना निकट न रहता। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसा कि कांग्रेस नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे कब तक केवल एक परिवार अथवा गांधी नाम की आड़ में अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता तलाशते रहेंगे।
स्थानीय संगठन की एकजुटता और भावी रणनीति
बैठक में उपस्थित टोंक बीजेपी जिलाध्यक्ष चंद्रवीर सिंह चौहान ने भी स्थानीय स्तर पर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की स्थानीय इकाई पूरी तरह एकजुट है और किसी भी प्रकार के आंतरिक मतभेद की बात निराधार है। चौहान ने जानकारी दी कि हालिया निकाय चुनावों के दौरान टोंक क्षेत्र में कांग्रेस को मिली बढ़त के तकनीकी और स्थानीय कारणों का गहराई से विश्लेषण किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आगामी पंचायत चुनावों में टिकटों का आवंटन पूरी तरह पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर होगा, ताकि जमीनी पकड़ रखने वाले कार्यकर्ताओं को आगे लाकर पार्टी को ऐतिहासिक विजय दिलाई जा सके।



















