राजस्थान के अलवर जिले में कृषि के पारंपरिक तौर-तरीकों से हटकर एक पूर्व सरकारी कर्मचारी ने नवाचार की मिसाल पेश की है. लक्ष्मणगढ़ तहसील अंतर्गत मलावाली गांव के निवासी रामकृष्ण मीणा ने अपने खेत में लगभग 300 चंदन के पौधे लगाकर एक सफल मॉडल खड़ा किया है. आम तौर पर रेतीले और शुष्क माने जाने वाले इस इलाके में अब चंदन के पेड़ तेजी से फल-फूल रहे हैं, जिसे देखने और समझने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से किसान लगातार उनके पास आ रहे हैं.
मिट्टी की वैज्ञानिक जांच और पौधों की खास तैयारी
इस अनूठी खेती की शुरुआत किसी जल्दबाजी में नहीं की गई, बल्कि इसके पीछे एक सुव्यवस्थित वैज्ञानिक रणनीति थी. रामकृष्ण मीणा ने सबसे पहले अपने खेत की मिट्टी का नमूना दिल्ली स्थित एक प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा. इसके उपरांत मिट्टी की विस्तृत रिपोर्ट और सैंपल को बेंगलुरु भेजा गया, ताकि वहां की जलवायु और तकनीक के अनुरूप इस विशिष्ट मिट्टी के अनुकूल पौधे विकसित किए जा सकें. जब बेंगलुरु में तैयार किए गए ये पौधे करीब 4 से 5 फीट की ऊंचाई तक पहुंच गए, तब उन्हें सावधानीपूर्वक राजस्थान लाया गया और खेत में रोपा गया. वैज्ञानिक देखभाल की बदौलत आज ये सभी पौधे खेत में पूरी मजबूती से विकसित हो रहे हैं.
रिटायरमेंट से पूर्व की रूपरेखा और डिजिटल माध्यमों का उपयोग
साल 2023 में सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने से काफी पहले ही रामकृष्ण मीणा ने इस नवाचार का खाका तैयार कर लिया था. उनका प्रमुख ध्येय पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ देने वाले और टिकाऊ विकल्प की तलाश करना था. चंदन उगाने की बारीकियों को समझने के लिए उन्होंने इंटरनेट का सहारा लिया, यूट्यूब पर वीडियो देखे और गूगल पर कृषि संबंधी शोध सामग्री का गहराई से अध्ययन किया. कृषि तकनीकों और पौधों की देखरेख के नियम समझने के पश्चात उन्होंने आंध्र प्रदेश से भी पौधे मंगवाए और अपने खेत में जमीनी प्रयोग शुरू किया. उनका मानना है कि सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि इसका सदुपयोग नई जानकारियां हासिल करने और पेशेवर हुनर सीखने के लिए किया जाना चाहिए.
हजारों किसानों के लिए प्रेरणा केंद्र बना मलावाली का खेत
रामकृष्ण के खेत में चंदन के पौधों की शानदार बढ़वार देखकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है. वह अब केवल अपने खेत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य किसानों को भी पौधरोपण, सिंचाई और उचित देखभाल से जुड़े तकनीकी परामर्श दे रहे हैं. उनके इस सफल प्रयोग से प्रभावित होकर राजगढ़, लक्ष्मणगढ़ और मालाखेड़ा के क्षेत्रों में सैकड़ों किसानों ने चंदन की रोपाई शुरू कर दी है. इन निकटवर्ती इलाकों में अब तक 10 हजार से अधिक चंदन के पौधे लगाए जा चुके हैं. मलावाली का यह खेत अब नए प्रयोग सीखने की पाठशाला बन चुका है, जिसने यह साबित कर दिया है कि सोच में बदलाव लाकर पारंपरिक खेती को नई दिशा दी जा सकती है.

















