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उदयपुर में पारंपरिक गुजराती गरबा सीखने उमड़े 200 युवा, नवरात्रि पर दिखाएंगे हुनरराजस्थान
7 अक्तू॰ 2026, 6:06 am (20 मिनट पहले)· 0

उदयपुर में पारंपरिक गुजराती गरबा सीखने उमड़े 200 युवा, नवरात्रि पर दिखाएंगे हुनर

नवरात्रि से पहले उदयपुर में पारंपरिक गुजराती गरबा का विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया है, जहां 200 प्रतिभागी प्राचीन शैलियों की बारीकियां सीख रहे हैं.

शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व से पहले ही झीलों की नगरी उदयपुर में गरबा का उत्साह चरम पर पहुंच चुका है. आमतौर पर आधुनिक समय में युवा पीढ़ी बॉलीवुड धुनों और रीमिक्स गानों पर गरबा करना ज्यादा पसंद करती है, मगर इस बार उदयपुर के युवाओं में गुजरात की मूल और पारंपरिक गरबा शैली को सीखने की अनूठी ललक देखने को मिल रही है. सफेद परिधानों में सजे करीब 200 प्रतिभागी एक साथ ताल से ताल मिलाते हुए गरबा के जटिल फुटवर्क, हस्त मुद्राओं और प्राचीन लयबद्ध स्वरूप को आत्मसात करने में जुटे हुए हैं.

इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण यह है कि यहां प्रतिभागियों को सिर्फ चंद सामान्य स्टेप्स नहीं सिखाए जा रहे हैं, बल्कि गरबा के पीछे छिपी सदियों पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मंच पर उसके सटीक प्रस्तुतीकरण पर भी गहरा ध्यान दिया जा रहा है. राजस्थान के उदयपुर में पारंपरिक गुजराती गरबा की मूल संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘रास रसिया’ के बैनर तले इस प्रशिक्षण कार्यशाला की नींव रखी गई है. शहर के कोने-कोने से पहुंचे लोग पूरे समर्पण और उमंग के साथ इस विधा की हर छोटी-बड़ी बारीकी को सीख रहे हैं.

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प्रशिक्षण की कमान और तकनीकी बारीकियों पर जोर

इस बड़े पैमाने पर चल रहे प्रशिक्षण शिविर के कुशल संचालन की जिम्मेदारी कथक नृत्यांगना निमिषा भाटी के साथ प्रियांशी जोशी और निखिल सावरिया संभाल रहे हैं. यह तीनों प्रशिक्षक सभी प्रतिभागियों को गरबा की बुनियादी शुरुआत से लेकर एक विशाल समूह में एकरूपता के साथ प्रदर्शन करने के सभी गुर सिखा रहे हैं. शिविर के दौरान कदमों की सही गति, हाथों की सटीक भाव-भंगिमाएं, संगीत की थाप के साथ शरीर का लचीलापन और बड़े समूह में एक-दूसरे के बीच सटीक दूरी बनाए रखने जैसे तकनीकी पहलुओं पर भी लगातार मार्गदर्शन दिया जा रहा है.

दो ताली, तीन ताली, डोडिया और हींच जैसी प्राचीन शैलियों का रियाज

आयोजन से जुड़े प्रशिक्षकों का मानना है कि पारंपरिक गरबा दूर से देखने में जितना सहज और सरल प्रतीत होता है, वास्तविकता में उसे लयबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने के लिए उतने ही कड़े अनुशासन और निरंतर अभ्यास की दरकार होती है. इसी को आधार बनाकर शिविर में पारंपरिक दो ताली और तीन ताली गरबा के साथ-साथ डोडिया तथा हींच जैसी दुर्लभ और प्राचीन शैलियों का गहन अभ्यास कराया जा रहा है. इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के फुटवर्क, त्वरित बदलाव और समूह संरचनाओं के निर्माण की तकनीकें भी सिखाई जा रही हैं ताकि मुख्य उत्सव के दौरान प्रदर्शन में किसी प्रकार की त्रुटि न रहे.

युवाओं को लोक संस्कृति की जड़ों से जोड़ने का प्रयास

प्रतिभागियों के बीच सामूहिक तालमेल और लयबद्धता स्थापित करने के लिए उनसे एक ही गति में बार-बार अभ्यास कराया जाता है. वर्तमान दौर में गरबा के कई आधुनिक और व्यावसायिक रूप सामने आ चुके हैं, किंतु पारंपरिक गुजराती गरबा की गरिमा और विशिष्ट पहचान आज भी सर्वोपरि है. इसमें केवल शारीरिक गति ही शामिल नहीं होती, बल्कि इसमें शास्त्रीय संगीत, ताल, मानसिक अनुशासन और सामूहिक उत्सव का गहरा सामंजस्य निहित होता है. इस कार्यशाला का प्रमुख लक्ष्य युवा पीढ़ी को इसी मूल संस्कृति और उसकी आध्यात्मिक गहराई से जोड़ना है.

नवरंग नवरात्रि उत्सव में निशुल्क पास के साथ होगी भव्य प्रस्तुति

प्रशिक्षण सत्र का समापन होने के उपरांत ये सभी 200 प्रशिक्षित कलाकार नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले ‘नवरंग नवरात्रि’ उत्सव के मुख्य मंच पर अपनी सीखी हुई कला का भव्य प्रदर्शन करेंगे. आयोजकों ने घोषणा की है कि इस प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को ‘नवरंग नवरात्रि’ के प्रवेश पास पूर्णतः निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे. नौ दिनों तक चलने वाले इस पारंपरिक उत्सव में लोक कला की विविध और मनमोहक शैलियां मंच पर जीवंत होंगी. नवरात्रि से ठीक पहले संचालित यह शिविर स्थानीय कला प्रेमियों के बीच निरंतर चर्चा का विषय बना हुआ है.

सवाल-जवाब

उदयपुर में यह गरबा प्रशिक्षण शिविर किस बैनर तले आयोजित किया जा रहा है?
यह विशेष प्रशिक्षण शिविर 'रास रसिया' के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है.
शिविर में कितने प्रतिभागी पारंपरिक गरबा सीख रहे हैं?
इस शिविर में लगभग 200 प्रतिभागी पारंपरिक गुजराती गरबा सीख रहे हैं.
इस कार्यशाला में गरबा सिखाने की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा है?
इस शिविर का प्रशिक्षण कथक नृत्यांगना निमिषा भाटी, प्रियांशी जोशी और निखिल सावरिया द्वारा दिया जा रहा है.
प्रतिभागियों को गरबा की कौन सी पारंपरिक शैलियां सिखाई जा रही हैं?
शिविर में दो ताली, तीन ताली, डोडिया और हींच जैसी पारंपरिक शैलियों का गहन अभ्यास कराया जा रहा है.
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागी अपनी प्रस्तुति कहां देंगे?
सभी 200 प्रशिक्षित प्रतिभागी नवरात्रि के दौरान 'नवरंग नवरात्रि' उत्सव के मंच पर प्रस्तुति देंगे.
क्या शिविर के प्रतिभागियों को नवरंग नवरात्रि उत्सव के पास मिलेंगे?
हां, आयोजकों के अनुसार शिविर के सभी प्रतिभागियों को उत्सव के प्रवेश पास निशुल्क दिए जाएंगे.
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 मिनट पहले

अक्सर भीड़भाड़ वाले आयोजनों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए सिरदर्द बन जाता है, पर ऐसे सांस्कृतिक शिविरों में युवा अनुशासन सीख रहे हैं जो कि शहर के लिए अच्छा संकेत है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 मिनट पहले

करण जी, सही कहा आपने, आजकल के युवाओं में ऐसा अनुशासन देखना वाकई राहत की बात है।

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