शारदीय नवरात्रि की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में पारंपरिक गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू संगठनों ने उत्सव के दौरान आयोजित होने वाले सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों में मुस्लिम समुदाय के लोगों की मौजूदगी पर कड़ा एतराज जताया है। इस सिलसिले में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर उच्चाधिकारियों से मुलाकात की और एडीसीपी महिला अपराध स्नेहा तिवारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने उत्सव के दौरान महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने, कार्यक्रमों में प्रवेश के कड़े नियम लागू करने और धार्मिक स्थलों के आस-पास व्यापारिक गतिविधियों की सघन निगरानी की मांग रखी।
पुलिस अधिकारियों से बातचीत के दौरान वीएचपी के प्रांत अध्यक्ष राजीव महाना ने सीधा आरोप लगाया कि कुछ गैर-हिंदू युवक इन आयोजनों में किसी धार्मिक आस्था या श्रद्धा भाव से नहीं पहुंचते, बल्कि उनका मकसद लव जिहाद जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना होता है। उन्होंने तर्क दिया कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उनका मां दुर्गा के उत्सव से जुड़े गरबा और डांडिया कार्यक्रमों में शामिल होना किसी भी तरह से समझ से परे है। इसी आधार पर संगठन ने मांग की कि ऐसे सांस्कृतिक पंडालों और उत्सवों में केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश दिया जाए जिनकी पूरी पहचान पहले जांची जा चुकी हो।
मंदिरों के बाहर पूजन सामग्री की दुकानों पर भी आपत्ति
ज्ञापन में केवल सांस्कृतिक पांडालों तक ही बात सीमित नहीं रखी गई, बल्कि नवरात्रि के नौ दिनों में प्रमुख देवी मंदिरों के बाहर लगने वाले अस्थायी बाजारों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि कई गैर-हिंदू दुकानदार अपनी असली पहचान छिपाकर मंदिर परिसरों के पास पूजन सामग्री और अन्य वस्तुओं की दुकानें लगाते हैं। वीएचपी ने प्रशासन से मांग की कि देवी मंदिरों के बाहर दुकान लगाने वाले प्रत्येक व्यक्ति का आधिकारिक सत्यापन किया जाए ताकि श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था के साथ किसी तरह का छल न हो सके।
इस मामले में वीएचपी के प्रांत मंत्री राजीव पोरवाल ने कानपुर के प्रसिद्ध तपेश्वरी मंदिर का विशेष तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि तपेश्वरी मंदिर परिसर और उसके आस-पास पूजन सामग्री बेचने वालों को लेकर स्थानीय स्तर पर भी असंतोष है। पोरवाल ने यह दावा भी किया कि मंदिर के मेला आयोजन समिति के सदस्यों ने भी इस संबंध में पहले ही अपनी शिकायतें दर्ज कराई हैं, जिस पर त्वरित कानूनी और प्रशासनिक कदम उठाए जाने की दरकार है।
आयोजकों के स्टाफ की जांच और आधार कार्ड से प्रवेश की शर्त
उत्सव स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हिंदू संगठनों ने एक व्यापक रूपरेखा पेश की है। संगठन ने मांग की है कि डांडिया और गरबा कराने वाले मुख्य आयोजकों, सह-आयोजकों, इवेंट मैनेजमेंट टीमों और सुरक्षा में तैनात निजी गार्डों की पृष्ठभूमि की पूरी जांच होनी चाहिए। इसके अलावा, पांडालों के प्रवेश द्वारों पर प्रत्येक आगंतुक का आधार कार्ड देखकर ही उन्हें भीतर जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
राजीव महाना ने यह भी स्पष्ट किया कि पंडालों में व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस प्रशासन का सहयोग करने के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ता भी स्वयंसेवक के रूप में तैनात रहेंगे। संगठन का कहना है कि नवरात्रि कार्यक्रमों में युवतियों और महिलाओं की अत्यधिक भीड़ होती है, इसलिए किसी भी अप्रिय घटना या असामाजिक तत्वों की घुसपैठ को रोकने के लिए पहचान सत्यापन की सख्त व्यवस्था लागू करना बेहद जरूरी है।
पुलिस प्रशासन ने दिए सुरक्षा के कड़े निर्देश
ज्ञापन स्वीकार करने के बाद एडीसीपी महिला अपराध स्नेहा तिवारी ने बताया कि संगठनों की ओर से मिले पत्र और मांगों को संज्ञान में लिया गया है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के पावन पर्व पर सभी प्रमुख देवी मंदिरों, धार्मिक मेलों और उत्सव स्थलों पर महिलाओं, युवतियों और छोटे बच्चों की भारी मौजूदगी रहती है। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए पूरे शहर के सभी थाना प्रभारियों को सतर्क रहने और पुख्ता सुरक्षा प्रबंध करने के स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, त्योहार के दौरान शहर भर में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखी जाएगी। संवेदनशील इलाकों, प्रमुख मंदिरों और गरबा आयोजनों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी, ताकि नागरिक बिना किसी भय या असुविधा के उत्सव मना सकें और शांति व्यवस्था कायम रहे।





















