प्यार और आपसी समझ के अलावा रोजमर्रा की छोटी-छोटी पसंद भी किसी भी रिश्ते को चलाने में अहम भूमिका निभाती हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि खाने की पसंद भी दो लोगों के बीच तनाव की बड़ी वजह बन सकती है। मौजूदा समय में सोशल मीडिया और रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के बीच इसी स्थिति को परिभाषित करने के लिए फूड डाइवर्स शब्द का खूब इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि कपल्स का कानूनी रूप से तलाक हो रहा है, बल्कि इसका सीधा संबंध खान-पान को लेकर इतनी अधिक असहमति से है कि दोनों को अपनी पसंद के अनुसार बिल्कुल अलग भोजन चुनना पड़ रहा है।
क्या है फूड डाइवर्स का मतलब
फूड डाइवर्स किसी भी प्रकार का आधिकारिक कानूनी या चिकित्सीय शब्द नहीं है। यह एक अनौपचारिक शब्दावली है जिसका प्रयोग उन जोड़ों के लिए किया जाता है जिनकी खान-पान की आदतें और डाइट एक-दूसरे से पूरी तरह मेल नहीं खाती हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि एक पार्टनर पूरी तरह शाकाहारी है और दूसरा मांसाहारी भोजन पसंद करता है, तो रोज की थाली तैयार करना एक चुनौती बन जाता है। इसके अलावा किसी को बहुत मसालेदार खाना भाता है तो दूसरा बेहद हल्का और सादा भोजन पसंद करता है। एक व्यक्ति वजन नियंत्रित करने के लिए कम कैलोरी या हेल्दी डाइट पर ध्यान देता है, जबकि दूसरा पिज्जा, बर्गर और मीठे पकवानों का शौकीन होता है। इस तरह के तमाम मतभेदों के कारण हर दिन भोजन को लेकर बहस या मनमुटाव की स्थिति पैदा हो जाती है।
खान-पान को लेकर क्यों बढ़ रहा है तनाव
भोजन केवल पेट भरने का माध्यम मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली, पारिवारिक संस्कारों, संस्कृति और निजी प्राथमिकताओं से भी गहराई से जुड़ा होता है। यही कारण है कि जब दो अलग पृष्ठभूमि या पसंद के लोग साथ रहते हैं, तो उनकी खान-पान की आदतें दैनिक जीवन में टकराव पैदा कर देती हैं। यदि एक व्यक्ति हमेशा घर का बना सादा भोजन खाना पसंद करता है और दूसरा बाहर से फैंसी फूड ऑर्डर करने का शौकीन है, तो हर शाम यह तय करना कठिन हो जाता है कि थाली में क्या परोसा जाए। इसके अलावा अलग-अलग डाइट चार्ट होने पर रसोई में खाना पकाने और ग्रोसरी की खरीदारी करने की जिम्मेदारी भी एक पेचीदा मसला बन जाती है।
क्या अलग पसंद रिश्ते के लिए नुकसानदेह है
यह बिल्कुल आवश्यक नहीं है कि अलग-अलग पसंद किसी भी रिश्ते के लिए हमेशा हानिकारक ही साबित हो। मुख्य बात यह है कि दोनों पार्टनर इस अंतर को किस तरह स्वीकार करते हैं और कैसे संभालते हैं। यदि दोनों एक-दूसरे की पसंद का पूरा सम्मान करते हैं, तो भोजन की यह भिन्नता एक सामान्य बात बनकर रह जाती है। एक ही डाइनिंग टेबल पर बैठकर एक व्यक्ति अपनी हरी सलाद खा सकता है और दूसरा अपनी पसंद का कोई अन्य व्यंजन एन्जॉय कर सकता है। कई बार कपल्स एक-दूसरे की पसंद की चीजों को चखकर नए अनुभव भी साझा करते हैं।
आपसी सहमति से कैसे सुलझाएं यह मामला
भोजन को लेकर बार-बार होने वाली अनबन से बचने के लिए दोनों साथी कुछ व्यावहारिक नियम पहले ही बना सकते हैं। हफ्ते के कुछ दिन एक की पसंद का खाना तैयार किया जा सकता है और बाकी के दिन दूसरे की पसंद को प्राथमिकता दी जा सकती है। इसके अलावा ऐसे व्यंजनों का चुनाव भी किया जा सकता है जिनमें दोनों अपनी जरूरत के हिसाब से बदलाव कर सकें ताकि किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा न हो।



















