सेवा का जज्बा और समर्पण जब किसी नेक काम के पीछे हो, तो मुश्किलें भी खुद-ब-खुद रास्ते छोड़ देती हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक दास्तान जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के अमरपुरा गांव की नंद बाबा गौशाला की है, जो अपनी स्थापना के बाद से ही जनसेवा की अनूठी मिसाल पेश कर रही है। जनवरी 2025 में एक बेहद छोटे से संकल्प के साथ इस गौशाला की नींव रखी गई थी, जो आज के समय में 65 से अधिक बेसहारा और लावारिस गोवंश के लिए एक मजबूत और सुरक्षित आश्रय स्थल बन चुकी है। स्थानीय समाज के सक्रिय सहयोग और समर्पित गोसेवकों की अटूट मेहनत के कारण इस परिसर का स्वरूप लगातार बेहतर होता जा रहा है और यह क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जय गुरुदेव के अनुयायियों की प्रेरणा से शुरू हुआ सफर
इस पूरी पहल की शुरुआत आध्यात्मिक प्रेरणा और गोसेवा के भाव से हुई थी। जय गुरुदेव के अनुयायी और नंद बाबा आश्रम के महंत नंदा बाबा यादव के मार्गदर्शन से प्रेरणा लेते हुए गोसेवक कालूराम झाझड़िया और उनकी पूरी टीम ने गांव की सरकारी भूमि पर ही एक गौशाला की स्थापना करने का दृढ़ संकल्प लिया। शुरुआती दौर में इस नेक काम के सामने संसाधनों की भारी कमी थी और वित्तीय स्थिति भी बहुत ज्यादा मजबूत नहीं थी। इसके बावजूद गोसेवकों के हौसले डगमगाए नहीं और उन्होंने सेवा कार्यों को बिना रुके लगातार जारी रखा। समय बीतने के साथ ही इस नेक पहल से गांव के आम नागरिकों के साथ-साथ दूर-दराज के लोगों का जुड़ाव भी तेजी से बढ़ता गया, जिससे गौशाला के प्रति लोगों का अटूट विश्वास और अधिक मजबूत होता चला गया।
सोशल मीडिया की ताकत से दूर-दराज तक पहुंचा सेवा संदेश
नंद बाबा गौशाला को आर्थिक रूप से सुदृढ़ और मजबूत बनाने में डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया की भूमिका बेहद अहम साबित हुई है। गोसेवक कालूराम झाझड़िया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए गोसेवा के इस संदेश को आम जनता तक पहुंचाया। इसके परिणामस्वरूप देश और प्रदेश के विभिन्न कोनों से गौभक्त और दानदाता मदद के लिए स्वतः आगे आने लगे। किसी ने गोवंश के चारे और भूसे की व्यवस्था के लिए आर्थिक सहायता पहुंचाई, तो किसी ने गौशाला के निर्माण कार्यों में अपनी तरफ से बहुमूल्य योगदान दिया। इस प्रकार आम लोगों द्वारा दी जाने वाली छोटी-छोटी मदद और सहयोग राशि ने मिलकर एक बड़े और विशाल सेवा अभियान का रूप ले लिया।
65 से अधिक बेसहारा गोवंश को मिल रहा नियमित आश्रय
मौजूदा समय में नंद बाबा गौशाला के भीतर गांव और इसके आसपास के इलाकों में खुले आसमान के नीचे भटकने वाले 65 से अधिक बेसहारा गोवंश को शरण और सुरक्षा मिली हुई है। यहां रहने वाले सभी मवेशियों के लिए नियमित रूप से खाने के लिए चारे और पीने के साफ पानी का पुख्ता इंतजाम किया जाता है। इसके अलावा, किसी भी बीमार या दुर्घटना में घायल पशु की तुरंत पहचान की जाती है और समय पर उसका उचित उपचार भी सुनिश्चित किया जाता है। गौशाला की पूरी टीम का मुख्य प्रयास यही रहता है कि सड़क पर कोई भी बेसहारा गोवंश असुरक्षित हालत में न घूमे और उसे समय पर एक सुरक्षित आश्रय मिल सके।
विकास कार्यों के लिए प्रशासन की पहल और जमीन आवंटन
आम जनता और समाज के सहयोग से अब तक इस गौशाला परिसर के भीतर लगभग 5 लाख 20 हजार रुपये के विभिन्न विकास कार्य सफलतापूर्वक पूरे करवाए जा चुके हैं। गौशाला की इस बेहतरीन सेवा भावना और सामाजिक सरोकारों को गंभीरता से देखते हुए जिला कलक्टर ने भी इस दिशा में एक सकारात्मक पहल की है। उन्होंने जयपुर विकास प्राधिकरण यानी जेडीए के माध्यम से गौशाला के लिए स्थायी भूमि का आवंटन करवाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की ओर से स्थायी जमीन मिलने के बाद भविष्य में इस गौशाला के कामकाज को और अधिक सुव्यवस्थित तथा बड़े पैमाने पर संचालित करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण और पक्षियों की देखभाल पर भी जोर
नंद बाबा गौशाला का दायरा केवल मवेशियों और गोवंश की देखभाल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां पर्यावरण और बेजुबान पक्षियों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गौशाला के विशाल परिसर में हर महीने नियमित रूप से बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जाता है, जिससे हरियाली बनी रहे। इसके साथ ही भीषण गर्मी और अन्य कठिन मौसम के दौरान पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए जगह-जगह परिंडे बांधे जाते हैं। गौशाला से जुड़े सभी लोग अपने इन सेवा कार्यों को केवल पशुओं की सुरक्षा तक सीमित न रखकर प्रकृति, पर्यावरण और अन्य सभी जीव-जंतुओं के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी के रूप में निभा रहे हैं।
दिन-रात गोसेवा में जुटे रहते हैं गोसेवक कालूराम झाझड़िया
गोसेवक कालूराम झाझड़िया हर दिन खुद खड़े रहकर गौशाला की साफ-सफाई से लेकर गोवंश की हर प्रकार की देखभाल के कार्यों में जुटे रहते हैं। वे अपने हाथों से गोवंश को ताजा चारा खिलाने, पानी पिलाने के अलावा बीमार और कमजोर पशुओं की नियमित निगरानी करते हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत चिकित्सालय तक पहुंचाते हैं। दिन का समय हो या गहरी रात, किसी भी कोने से बेसहारा गोवंश के संकट में होने की सूचना मिलने पर उनकी टीम उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए दौड़ पड़ती है। यही निरंतर सेवा का भाव और समर्पण इस गौशाला को आम जनता के भरोसे और असीम सहयोग का मुख्य केंद्र बना रहा है।


















