तमिलनाडु के विल्लुपुरम जिले में स्थित प्रसिद्ध मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर में आदि अमावसई के पावन पर्व पर पारंपरिक झूला उत्सव यानी उंजल उत्सव अत्यंत श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर तमिलनाडु के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु देवी अंगलम्मा के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। पूरा मंदिर परिसर तड़के से लेकर आधी रात तक देवी के जयकारों और भक्तिमय वातावरण से गूंजता रहा।
भोर का महाअभिषेक और स्वर्ण कवच से भव्य श्रृंगार
आदि अमावसई के धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत बुधवार तड़के करीब 4 बजे मुख्य देवी, मां अंगलम्मा के विशेष अभिषेक के साथ हुई। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देवी की महाआराधना संपन्न की। इसके पश्चात देवी की प्रतिमा को अत्यंत आकर्षक स्वर्ण कवच (थंगा कवसम) से अलंकृत किया गया और विशेष दीपआराधना की गई। मुख्य मंदिर के द्वार खुलते ही सुबह से ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लग गई थीं, जहां भक्त घंटों अनुशासित रहकर मां के दर्शन का इंतजार करते नजर आए।
आधी रात को झूले मंडप में विराजित हुईं देवी
इस उत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण रात में आयोजित होने वाला उंजल उत्सव (झूला उत्सव) था। रात करीब 11 बजे उत्सव मूर्ति को मंदिर के उत्तरी द्वार से भव्य शोभायात्रा के साथ ऊंजल मंडप तक लाया गया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्ति गीतों के बीच मां अंगलम्मा को एक विशेष अलंकार में झूले पर विराजमान कराया गया। मंदिर के पुजारियों और वहां उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने मिलकर पारंपरिक अम्मन लोरियां और भक्ति गीत गाकर देवी की आराधना की। इसके पश्चात करीब आधी रात को महा दीपाराधना संपन्न हुई, जिसके साथ ही उंजल उत्सव का भव्य समापन हुआ।
मंत्री एन. आनंद की उपस्थिति और प्रशासनिक इंतजाम
इस पावन अवसर पर तमिलनाडु के ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री एन. आनंद ने भी मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। उन्होंने आम श्रद्धालुओं के बीच खड़े होकर भक्तिभाव से देवी के पालने की डोरी खींची और लोक कल्याण की प्रार्थना की। इस भव्य आयोजन में पुडुचेरी, चेन्नई, तिरुवन्नामलाई, वेल्लोर, कुड्डालोर तथा कल्लाकुरिची समेत राज्य के कोने-कोने से बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। श्रद्धालुओं की सहूलियत के लिए परिवहन विभाग द्वारा विभिन्न प्रमुख शहरों से विशेष बसों का संचालन किया गया। संपूर्ण उत्सव का सफल आयोजन हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग तथा मंदिर ट्रस्टी कमेटी के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
आदि अमावसई पर ऊंजल सेवा की पवित्र परंपरा
मेलमालयनूर अंगलम्मा मंदिर में आडी अमावसई के अवसर पर भव्य ऊंजल उत्सव आयोजित करने की सदियों पुरानी परंपरा रही है। इस पावन दिन मंदिर में तड़के अभिषेक से लेकर रात में झूला सेवा तक विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। मान्यता है कि अमावसई की रात देवी अंगलम्मा को झूले पर विराजमान कर लोरियां सुनाने से श्रद्धालुओं को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी अटूट आस्था के साथ हर वर्ष लाखों भक्त मां के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और आरती व दीपाराधना के साथ इस पावन पर्व का समापन होता है।



















